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इस बार किसानों को रुलाएगा सूखा
Lakhimpur
Updated Sun, 13 Jul 2014 05:34 AM IST
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अभी 42 फीसदी हो सकी धान की रोपाई
लघु एवं सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
धान रोर्पाई की लागत में 20 फीसदी इजाफा
मोहम्मदी, मितौैली, गोला तहसीलें सूखे से प्रभावित
कृषि विभाग ने कम पानी में अच्छी पैदावार वाली फसलों की बुर्वाई का खाका खींचा
लखीमपुर खीरी। बाढ़ और कटान की समस्या से जूझने वाले जिले में इस बार सूखे की मार पड़ी है। बारिश कम होने से धान की रोपाई की गति नहीं पकड़ पा रही है। जून में सामान्य से 60 मिमी कम वर्षा हुई, जिससे कई क्षेत्रों में रोपाई की शुरुआत नहीं हो पाई है। जुर्लाई का पहला पखवाड़ा बीतने को है, लेकिन मानसून अभी भी किसानों को मुंह चिढ़ा रहा है। लिहाजा इस बार धान रोपाई के रकबे में कमी आने के आसार बन गए हैं। कृषि विभाग के सर्वे पर गौर करें, तो अभी तक जिले में 42 फीसदी धान की रोपाई हो पाई है। सूखे की मार से सबसे ज्यादा लघु एवं सीमांत किसान प्रभावित हुए हैं, जिसमें ज्यादातर मोहम्मदी, मितौली और गोला तहसील क्षेत्र के हैं। कृषि विभाग ने इन क्षेत्रों में धान के विकल्पों मसलन मक्का, बाजरा, मूंगफली, उरद, मूंग आदि फसलों की बुर्वाई का प्लान तैयार कर लिया है।
जिले की सात तहसीलों में पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर का बड़ा भूभाग तराई एरिया होने के चलते यहां धान की रोर्पाई शुरू हो चुकी है। जुर्लाई में अब तक धौरहरा क्षेत्र में 276 मिमी, निघासन क्षेत्र में 202 मिमी, पलिया क्षेत्र में 230 मिमी बारिश हो चुकी है, जिससे किसानों को रोर्पाई का मौका मिल गया, जबकि मोहम्मदी, मितौली और गोला क्षेत्र में धान की रोपाई पिछड़ गई है। मोहम्मदी क्षेत्र में सिर्फ 49 मिमी, मितौली क्षेत्र में 70 मिमी, लखीमपुर क्षेत्र में 80 मिमी बारिश हुई है। जून में जिले की सामान्य वर्षा 139.50 मिमी है, जिसके सापेक्ष 81.98 मिमी बारिश हुई है। बारिश कम होने की वजह से किसानों की लागत में वृद्धि हुई हैै। हालांकि बड़े और मझोले किसानों ने संसाधनों का इस्तेमाल कर रोपाई कर ली है, लेकिन लघु एवं सीमांत किसान बारिश पर ही आश्रित हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक धान की रोपाई का सबसे उपयुक्त समय 15 जून से 15 जुलाई तक ही है।
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1.73 लाख हेक्टेयर धान रोर्पाई का लक्ष्य
जिले में इस बार 1.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान रोपाई का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष अभी तक 42 फीसदी रोपाई की गई है। तराई क्षेत्र में ज्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन मोहम्मदी, मितौली और गोला क्षेत्र में बारिश न होने की वजह से रोपाई पिछड़ रही है। इन इलाकों में किसानों को कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए प्लान तैयार कर लिया गया है।
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-धीरेंद्र चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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20 हजार रकबा घटने का अनुमान
चार-पांच दिनों में बारिश होने के आसार बने हुए हैं। मौजूदा हालात में मितौली, मोहम्मदी क्षेत्रों में करीब 20 हजार हेक्टेयर रकबा कम होने के आसार बन रहे हैं। इन क्षेत्रों के किसानों को अन्य विकल्पों के तौर पर ज्वार, बाजरा, तिल, उरद, मूंग आदि बीज मुहैया कराने की कार्ययोजना डीएम की अध्यक्षता में पास हो गई है।
-शिवकुमार केसरी, उप कृषि निदेशक
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जून में 139.5 मिमी और जुलाई में 297.5 मिमी सामान्य वर्षा निर्र्धारित है। इसके मुताबिक पिछले पांच सालों में बारिश के आंकड़ों पर एक नजर।
वर्ष जून जुलाई
2013 405 243
2012 117 475
2011 1460 1763
2010 107 458
2009 138 332
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लघु एवं सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
धान रोर्पाई की लागत में 20 फीसदी इजाफा
मोहम्मदी, मितौैली, गोला तहसीलें सूखे से प्रभावित
कृषि विभाग ने कम पानी में अच्छी पैदावार वाली फसलों की बुर्वाई का खाका खींचा
लखीमपुर खीरी। बाढ़ और कटान की समस्या से जूझने वाले जिले में इस बार सूखे की मार पड़ी है। बारिश कम होने से धान की रोपाई की गति नहीं पकड़ पा रही है। जून में सामान्य से 60 मिमी कम वर्षा हुई, जिससे कई क्षेत्रों में रोपाई की शुरुआत नहीं हो पाई है। जुर्लाई का पहला पखवाड़ा बीतने को है, लेकिन मानसून अभी भी किसानों को मुंह चिढ़ा रहा है। लिहाजा इस बार धान रोपाई के रकबे में कमी आने के आसार बन गए हैं। कृषि विभाग के सर्वे पर गौर करें, तो अभी तक जिले में 42 फीसदी धान की रोपाई हो पाई है। सूखे की मार से सबसे ज्यादा लघु एवं सीमांत किसान प्रभावित हुए हैं, जिसमें ज्यादातर मोहम्मदी, मितौली और गोला तहसील क्षेत्र के हैं। कृषि विभाग ने इन क्षेत्रों में धान के विकल्पों मसलन मक्का, बाजरा, मूंगफली, उरद, मूंग आदि फसलों की बुर्वाई का प्लान तैयार कर लिया है।
जिले की सात तहसीलों में पलिया, निघासन, धौरहरा और लखीमपुर का बड़ा भूभाग तराई एरिया होने के चलते यहां धान की रोर्पाई शुरू हो चुकी है। जुर्लाई में अब तक धौरहरा क्षेत्र में 276 मिमी, निघासन क्षेत्र में 202 मिमी, पलिया क्षेत्र में 230 मिमी बारिश हो चुकी है, जिससे किसानों को रोर्पाई का मौका मिल गया, जबकि मोहम्मदी, मितौली और गोला क्षेत्र में धान की रोपाई पिछड़ गई है। मोहम्मदी क्षेत्र में सिर्फ 49 मिमी, मितौली क्षेत्र में 70 मिमी, लखीमपुर क्षेत्र में 80 मिमी बारिश हुई है। जून में जिले की सामान्य वर्षा 139.50 मिमी है, जिसके सापेक्ष 81.98 मिमी बारिश हुई है। बारिश कम होने की वजह से किसानों की लागत में वृद्धि हुई हैै। हालांकि बड़े और मझोले किसानों ने संसाधनों का इस्तेमाल कर रोपाई कर ली है, लेकिन लघु एवं सीमांत किसान बारिश पर ही आश्रित हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक धान की रोपाई का सबसे उपयुक्त समय 15 जून से 15 जुलाई तक ही है।
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1.73 लाख हेक्टेयर धान रोर्पाई का लक्ष्य
जिले में इस बार 1.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान रोपाई का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष अभी तक 42 फीसदी रोपाई की गई है। तराई क्षेत्र में ज्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन मोहम्मदी, मितौली और गोला क्षेत्र में बारिश न होने की वजह से रोपाई पिछड़ रही है। इन इलाकों में किसानों को कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए प्लान तैयार कर लिया गया है।
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20 हजार रकबा घटने का अनुमान
चार-पांच दिनों में बारिश होने के आसार बने हुए हैं। मौजूदा हालात में मितौली, मोहम्मदी क्षेत्रों में करीब 20 हजार हेक्टेयर रकबा कम होने के आसार बन रहे हैं। इन क्षेत्रों के किसानों को अन्य विकल्पों के तौर पर ज्वार, बाजरा, तिल, उरद, मूंग आदि बीज मुहैया कराने की कार्ययोजना डीएम की अध्यक्षता में पास हो गई है।
-शिवकुमार केसरी, उप कृषि निदेशक
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जून में 139.5 मिमी और जुलाई में 297.5 मिमी सामान्य वर्षा निर्र्धारित है। इसके मुताबिक पिछले पांच सालों में बारिश के आंकड़ों पर एक नजर।
वर्ष जून जुलाई
2013 405 243
2012 117 475
2011 1460 1763
2010 107 458
2009 138 332