{"_id":"1-51542","slug":"Lakhimpur-51542-121","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश से उफनाई नदियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश से उफनाई नदियां
Lakhimpur
Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घाघरा में समाए माथुरपुर के 20 घर, आधा गांव कटा
मोहना की लहरों की चपेट में आए छह से अधिक गांव
लखीमपुर खीरी। जिले में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही वर्षा से नदियां उफान पर हैं। कहीं कटान तो कहीं पानी आ जाने के कारण जीवन संघर्षमय हो गया है।
धौरहरा। घाघरा ने पानी बढ़ने के साथ ही कटान करना तेज कर दिया है। कई-क ई मीटर मिट्टी की ढांगे नदी अपने आगोश में लेते हुए आगे बढ़ रही है। समीपवर्ती माथुरपुर आधे से अधिक गांव नदी में समा गया है। इसमें करीब 30 घरों में से 20 को नदी ने अपने आगोश में ले लिया है। कोई जनहानि तो नहीं हुई लेकिन अमेरिकी, राममूर्ति, रामबली, वेद प्रकाश, बनवारी लाल, ओमप्रकाश, राजेंद्र सिंह, चंद्रशेखर, शंभूदयाल, रामविलास, राजेंद्र, पृथ्वीपाल, बालकरन, लल्लू, राम खिलावन, बीना, रामचरन, मूलचंद, शत्रोहन, मिश्रीलाल, सीताराम के मकान घाघरा नदी में समा गए हैं। इस गांव में अब केवल 10-11 मकान ही रह गए हैं। प्रशासन से कोई सहायता न मिल पाने के कारण ग्रामीण खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।
00000
आधा दर्जन गांवों में घुसा मोहाना का पानी
तिकुनिया। मोहाना नदी उफान पर है। मोहाना का पानी समीपवर्ती थारू इलाके के आधा दर्जन गांवों में घुसने लगा है। इससे यहां अफरातफरी मच गई है। थारू गांव बेला परसुआ, सूरत नगर, गंगानगर, रामनगर आदि गांव मोहाना का पानी आने से खतरे में पड़ गए हैं। परसुआ से हरदियाल गांव तक पानी आ गया है।
विज्ञापन
0000
शहर की सड़कें बन गईं तालाब
लखीमपुर खीरी। शहर में अल सुबह से पांच घंटे तक हुई झमाझम बारिश से शहर के निचले इलाकों में जलभराव हो गया। रोडवेज के पास तो तालाब बन गया।
सरकारी दफ्तरों, अस्पतालाें और स्कूलों के परिसरों में पानी भरने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्कूल के समय बरसात होते रहने के कारण स्कूल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की संख्या नगण्य रही। यही हाल सरकारी कार्यालयों का रहा। जिले में अन्य स्थानों पर भी जबर्दस्त बारिश हुई। कच्चे और कमजोर मकानों के गिरने का सिलसिला जारी रहा।
2
शारदा खतरे के निशान से ऊपर
- दौलतापुर में परकोपाइन स्पर डूबे, कई के क्षतिग्रस्त होने की संभावना
पलियाकलां। इलाके और पहाड़ों पर जारी बारिश से शारदा नदी का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। शनिवार को नदी खतरे के लाल निशान को पार कर 154.190 सेंटीमीटर पर बह रही थी। खतरे के निशान 153.620 से करीब 57 सेंटीमीटर ऊपर है और इसे काफी खतरनाक माना जा रहा है। लाल निशान को पार कर 57 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच जाने से क्षेत्र में भयानक बाढ़ की आशंका जताई जा रही है। इससे लोगों में दहशत फैल गई है।
00000
कई गांव बाढ़ की चपेट में
नदी के समीपवर्ती गांव आजाद नगर, बर्बादनगर, मेलाघाट, श्री नगर, खैरहना, पकरिया, कंचनपुर आदि दर्जनों गांवों का फसली इलाका बुरी तरह से बाढ़ की चपेट में आया है। यहां फसलें जलमग्न है।
0000
परकोपाइन स्पर डूबे
जलस्तर काफी बढ़ जाने के कारण दौलतापुर गांव में सिंचाई महकमा के कटान रोकने को बनाए गए परकोपाइन स्पर डूब गए हैं और कई के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई गई है। बता दें कि नदी का जलस्तर बढ़ना अभी जारी है।
3
रेल प्रखंड पर फिर
खतरे के बादल
क्रासर
रेल लाइन के किनारे 25 मीटर और बढ़ा कटान का दायरा
पलियाकलां। शारदा नदी के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से गोंडा मैलानी रेल ट्रैक पर खतरे के छाए बादल और गहराते जा रहे हैं। दौलतापुर गांव के पास रेल ट्रैक के किनारे नदी ने 25 मीटर कटान कर दायरा और बढ़ा दिया है।
गोंडा-मैलानी रेल ट्रैक पर पलिया भीरा रेलवे स्टेशनो के बीच दौलतापुर में रेल लाइन पर छाया कटान का खतरा और बढ़ता जा रहा है। नदी के जलस्तर बढ़ने के साथ ही यहां रेल ट्रैक के किनारे हो रहे कटान का दायरा और बढ़ गया है। बताया गया है कि नदी ने 25 मीटर और आगे कटान शुरू कर दिया है। इससे यहां रेल ट्रैक के समनांतर कटान का दायरा बढ़कर करीब 225 मीटर हो गया है। लोगों का मानना है कि अभी जलस्तर बढ़ रहा है तो यह हाल है तो घटने पर भयानक कटान होगा। फिलहाल ट्रैक पर बचाव कार्य भी शून्य हो चुका है। ग्रामीण बुरी तरह परेशान हैं बता दें कि रेल ट्रैक गांव के लिए एक बंधे का काम करता है।
4
भारत-नेपाल मार्ग कटा, व्यापार प्रभावित
तिकुनियां। बार्डर पर बह रही मोहाना नदी ने कस्बे से करीब आठ किमी दूर डामर रोड काट कर भारत नेपाल के नागरिकों का आवागमन बंद कर दिया है। जिसके चलते भारत नेपाल के व्यापारियों समेत बार्डर के बाशिंदों के सामने कस्बे तक पहुंचने में काफी मुसीबत पैदा हो गयी है। नदी ने नए कटान में ग्राम इंदरनगर निवासी निशान सिंह, मान सिंह, भाग सिंह, राज सिंह, ओंकार सिंह सहित एक दजऩ किसानों की भूमि का कटान कर लिया है। लहलहाती फसलों के नदी की धारा में मिल जाने से बार्डर के किसान खून के आंसू रो रहे हैं। इसके बावजूद भी प्रशासन ने नदी कटान रोकने को कोई कदम नहीं उठाया है। बार्डर के नागरिकों ने मुख्यमंत्री से इलाके को बचाने की गुहार की है।
0000
गुरुद्वारा समेत कई घर निशाने पर
मोहाना नदी बार्डर के ग्राम सूरतनगर से जहां करीब दस मीटर पर पहुंच गयी है वहीं गांव से पश्चिम में स्थित खखरौला मार्ग को चपेट में ले लिया है। नदी का कटान इतनी तेजी से हो रहा है कि खखरौला मार्ग के पश्चिम में बना गुरुद्वारा सहित कई घर निशाने पर आ गए हैं। गांव के महेश, दूधनाथ, गोपीश्याम, पूर्व प्रधान रामकरन ने बताया कि नदी ने बार्डर पर कटान करके बार्डर का पूरा भूगोल ही बदल दिया है। नयी बस्ती गांव सड़क बाग त्रिपाठी फार्म की जगह मौजूदा समय में मोहाना और नेपाल की करनाली नदी की लहरों का उफान जारी है। नदी ने कस्बा तिकुनियां से नेपाल जाने वाले खखरौला डामर मार्ग को गुरुद्वारा के आगे करीब चालीस फीट तक काटकर नदी में ले लिया है। मौजूदा समय में नदी की तेज धार बार्डर की इस रोड को लीलने को बेताब है।
00000
तिकुनिया होकर नेपाल से आवागमन ठप
भारत-नेपाल का प्रमुख मार्ग कट जाने से नेपाली और भारतीय नागरिकों का आवागमन ठप हो गया है। नेपाली यात्री अब बनबीरपुर मार्ग पर करीब दस किमी का चक्कर काटकर आ-जा रहे हैं। कटान को लेकर एसएसबी कमांडेंट आरएस नेगी ने बताया कि बार्डर पर कटान रोकने के लिए शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया गया था। ग्राम पंचायत सूरतनगर के पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा ने बताया कि प्रशासन यदि चाहता तो बार्डर की यह दशा नहीं होती। अगर, चार-पांच ठोकरें बार्डर पर बना दी जातीं तो नदी कटान बेशक रोका जा सकता था। बार्डर इलाके के ग्राम गंगानगर के प्रधान मलूक सिंह, भाग सिंह, विजय कुमार, रामवृक्ष ने बार्डर के नागरिकों को कटान से बचाने की मांग सीएम से की है।
विज्ञापन
मोहना की लहरों की चपेट में आए छह से अधिक गांव
लखीमपुर खीरी। जिले में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही वर्षा से नदियां उफान पर हैं। कहीं कटान तो कहीं पानी आ जाने के कारण जीवन संघर्षमय हो गया है।
धौरहरा। घाघरा ने पानी बढ़ने के साथ ही कटान करना तेज कर दिया है। कई-क ई मीटर मिट्टी की ढांगे नदी अपने आगोश में लेते हुए आगे बढ़ रही है। समीपवर्ती माथुरपुर आधे से अधिक गांव नदी में समा गया है। इसमें करीब 30 घरों में से 20 को नदी ने अपने आगोश में ले लिया है। कोई जनहानि तो नहीं हुई लेकिन अमेरिकी, राममूर्ति, रामबली, वेद प्रकाश, बनवारी लाल, ओमप्रकाश, राजेंद्र सिंह, चंद्रशेखर, शंभूदयाल, रामविलास, राजेंद्र, पृथ्वीपाल, बालकरन, लल्लू, राम खिलावन, बीना, रामचरन, मूलचंद, शत्रोहन, मिश्रीलाल, सीताराम के मकान घाघरा नदी में समा गए हैं। इस गांव में अब केवल 10-11 मकान ही रह गए हैं। प्रशासन से कोई सहायता न मिल पाने के कारण ग्रामीण खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
00000
आधा दर्जन गांवों में घुसा मोहाना का पानी
तिकुनिया। मोहाना नदी उफान पर है। मोहाना का पानी समीपवर्ती थारू इलाके के आधा दर्जन गांवों में घुसने लगा है। इससे यहां अफरातफरी मच गई है। थारू गांव बेला परसुआ, सूरत नगर, गंगानगर, रामनगर आदि गांव मोहाना का पानी आने से खतरे में पड़ गए हैं। परसुआ से हरदियाल गांव तक पानी आ गया है।
विज्ञापन
0000
शहर की सड़कें बन गईं तालाब
लखीमपुर खीरी। शहर में अल सुबह से पांच घंटे तक हुई झमाझम बारिश से शहर के निचले इलाकों में जलभराव हो गया। रोडवेज के पास तो तालाब बन गया।
सरकारी दफ्तरों, अस्पतालाें और स्कूलों के परिसरों में पानी भरने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्कूल के समय बरसात होते रहने के कारण स्कूल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की संख्या नगण्य रही। यही हाल सरकारी कार्यालयों का रहा। जिले में अन्य स्थानों पर भी जबर्दस्त बारिश हुई। कच्चे और कमजोर मकानों के गिरने का सिलसिला जारी रहा।
2
शारदा खतरे के निशान से ऊपर
- दौलतापुर में परकोपाइन स्पर डूबे, कई के क्षतिग्रस्त होने की संभावना
पलियाकलां। इलाके और पहाड़ों पर जारी बारिश से शारदा नदी का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। शनिवार को नदी खतरे के लाल निशान को पार कर 154.190 सेंटीमीटर पर बह रही थी। खतरे के निशान 153.620 से करीब 57 सेंटीमीटर ऊपर है और इसे काफी खतरनाक माना जा रहा है। लाल निशान को पार कर 57 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच जाने से क्षेत्र में भयानक बाढ़ की आशंका जताई जा रही है। इससे लोगों में दहशत फैल गई है।
00000
कई गांव बाढ़ की चपेट में
नदी के समीपवर्ती गांव आजाद नगर, बर्बादनगर, मेलाघाट, श्री नगर, खैरहना, पकरिया, कंचनपुर आदि दर्जनों गांवों का फसली इलाका बुरी तरह से बाढ़ की चपेट में आया है। यहां फसलें जलमग्न है।
0000
परकोपाइन स्पर डूबे
जलस्तर काफी बढ़ जाने के कारण दौलतापुर गांव में सिंचाई महकमा के कटान रोकने को बनाए गए परकोपाइन स्पर डूब गए हैं और कई के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई गई है। बता दें कि नदी का जलस्तर बढ़ना अभी जारी है।
3
रेल प्रखंड पर फिर
खतरे के बादल
क्रासर
रेल लाइन के किनारे 25 मीटर और बढ़ा कटान का दायरा
पलियाकलां। शारदा नदी के लगातार बढ़ रहे जलस्तर से गोंडा मैलानी रेल ट्रैक पर खतरे के छाए बादल और गहराते जा रहे हैं। दौलतापुर गांव के पास रेल ट्रैक के किनारे नदी ने 25 मीटर कटान कर दायरा और बढ़ा दिया है।
गोंडा-मैलानी रेल ट्रैक पर पलिया भीरा रेलवे स्टेशनो के बीच दौलतापुर में रेल लाइन पर छाया कटान का खतरा और बढ़ता जा रहा है। नदी के जलस्तर बढ़ने के साथ ही यहां रेल ट्रैक के किनारे हो रहे कटान का दायरा और बढ़ गया है। बताया गया है कि नदी ने 25 मीटर और आगे कटान शुरू कर दिया है। इससे यहां रेल ट्रैक के समनांतर कटान का दायरा बढ़कर करीब 225 मीटर हो गया है। लोगों का मानना है कि अभी जलस्तर बढ़ रहा है तो यह हाल है तो घटने पर भयानक कटान होगा। फिलहाल ट्रैक पर बचाव कार्य भी शून्य हो चुका है। ग्रामीण बुरी तरह परेशान हैं बता दें कि रेल ट्रैक गांव के लिए एक बंधे का काम करता है।
4
भारत-नेपाल मार्ग कटा, व्यापार प्रभावित
तिकुनियां। बार्डर पर बह रही मोहाना नदी ने कस्बे से करीब आठ किमी दूर डामर रोड काट कर भारत नेपाल के नागरिकों का आवागमन बंद कर दिया है। जिसके चलते भारत नेपाल के व्यापारियों समेत बार्डर के बाशिंदों के सामने कस्बे तक पहुंचने में काफी मुसीबत पैदा हो गयी है। नदी ने नए कटान में ग्राम इंदरनगर निवासी निशान सिंह, मान सिंह, भाग सिंह, राज सिंह, ओंकार सिंह सहित एक दजऩ किसानों की भूमि का कटान कर लिया है। लहलहाती फसलों के नदी की धारा में मिल जाने से बार्डर के किसान खून के आंसू रो रहे हैं। इसके बावजूद भी प्रशासन ने नदी कटान रोकने को कोई कदम नहीं उठाया है। बार्डर के नागरिकों ने मुख्यमंत्री से इलाके को बचाने की गुहार की है।
0000
गुरुद्वारा समेत कई घर निशाने पर
मोहाना नदी बार्डर के ग्राम सूरतनगर से जहां करीब दस मीटर पर पहुंच गयी है वहीं गांव से पश्चिम में स्थित खखरौला मार्ग को चपेट में ले लिया है। नदी का कटान इतनी तेजी से हो रहा है कि खखरौला मार्ग के पश्चिम में बना गुरुद्वारा सहित कई घर निशाने पर आ गए हैं। गांव के महेश, दूधनाथ, गोपीश्याम, पूर्व प्रधान रामकरन ने बताया कि नदी ने बार्डर पर कटान करके बार्डर का पूरा भूगोल ही बदल दिया है। नयी बस्ती गांव सड़क बाग त्रिपाठी फार्म की जगह मौजूदा समय में मोहाना और नेपाल की करनाली नदी की लहरों का उफान जारी है। नदी ने कस्बा तिकुनियां से नेपाल जाने वाले खखरौला डामर मार्ग को गुरुद्वारा के आगे करीब चालीस फीट तक काटकर नदी में ले लिया है। मौजूदा समय में नदी की तेज धार बार्डर की इस रोड को लीलने को बेताब है।
00000
तिकुनिया होकर नेपाल से आवागमन ठप
भारत-नेपाल का प्रमुख मार्ग कट जाने से नेपाली और भारतीय नागरिकों का आवागमन ठप हो गया है। नेपाली यात्री अब बनबीरपुर मार्ग पर करीब दस किमी का चक्कर काटकर आ-जा रहे हैं। कटान को लेकर एसएसबी कमांडेंट आरएस नेगी ने बताया कि बार्डर पर कटान रोकने के लिए शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया गया था। ग्राम पंचायत सूरतनगर के पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा ने बताया कि प्रशासन यदि चाहता तो बार्डर की यह दशा नहीं होती। अगर, चार-पांच ठोकरें बार्डर पर बना दी जातीं तो नदी कटान बेशक रोका जा सकता था। बार्डर इलाके के ग्राम गंगानगर के प्रधान मलूक सिंह, भाग सिंह, विजय कुमार, रामवृक्ष ने बार्डर के नागरिकों को कटान से बचाने की मांग सीएम से की है।