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जंगल में बन रहे वाटर होल, ताकि प्यासे न रहें जीव

Mon, 14 Jan 2019 05:05 PM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Mon, 14 Jan 2019 05:05 PM IST
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जंगल में बन रहे वाटर होल, ताकि प्यासे न रहें जीव
लखीमपुर खीरी। जंगली जीवों को प्यास बुझाने के लिए जंगल से बाहर न जाना पड़े, इसके लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन विशेष इंतजाम कर रहा है। वन्यजीवों को जंगल के अंदर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो इसके लिए दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी में वाटर होल बनाए जा रहे है। इनमें प्राकृतिक सोते भी हैं। इन वाटर होल मेें पानी भरने के लिए बोरिंग भी कराई जा रही हैं। इसके साथ ही वन्यजीवों को शिकारियों की नजर से बचाने के लिए जगह-जगह मचान बनाए जा रहे हैं। यह मचान निगरानी चौकियों का काम करेंगे।
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बरसात खत्म होने के बाद जंगल की नदियों और झीलों का पानी कम हो जाता है। छोटे तालाब और पोखर सूख जाते हैं। उस समय वन्यजीवों के लिए पानी की किल्लत होती है। प्यास लगने पर जब जंगली जीवों को जंगल केे अंदर पानी नहीं मिलता तब वे पानी की तलाश में बाहर भटकने को विवश होते हैं। जंगल के अंदर वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए किशनपुर सेंक्चुरी और दुधवा नेशनल पार्क में घास के मैदानों के पास वाटर होल बनाए जा रहे हैं। इनमें पानी की कमी न हो इसके लिए बोरिंग कराई जा रही हैं।
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किशनपुर सेंक्चुरी में मुलराही रोड, चलतुआ, बेलडंडा, रोड नंबर 17, रोड नंबर 23 और लकड़ी पुलिया के पास छह वाटर होल बनाए गए हैं। इसी तरह दुधवा नेशनल पार्क में करीब एक दर्जन वाटर होल बनाए जा रहे हैं। आम चौराहा और भदरौला में बोरिंग भी कराई गई हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वाटर होल में पानी भरवाया जा सके। इसके साथ ही दुधवा और किशनपुर सेंक्चुरी के पुराने वेटलैंड्स का भी वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है। शैवाल और जलकुंभी आदि निकालकर जलाशयों को गहरा किया जा रहा है। ताकि इनमें हमेशा साफ पानी बना रहे और वन्यजीवों को पानी पीने के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े।
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शिकारियों पर नजर रखने को बनाए जा रहे मचान
दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के खानपान पर जहां ध्यान दिया जा रहा है वहीं वन्य जीवों और वनों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जंगल से गुजरने वाले रास्तों और बाघ बाहुल्यता वाले स्थलों पर पर स्थायी और अस्थाई मचान बनाए जा रहे हैं। इन मचानों पर बैठकर वनकर्मी जंगल में होने वाली हर अवांछित गतिविधियों पर नजर रखेंगे। जंगल के अंदर पैट्रोलिंग करने वाले वनकर्मी इन मचानों से एम-स्ट्राइप्स के जरिए अपनी लोकेशन भेजेंगे।
यह मचान निगरानी चौकियों के रूप में काम करेंगे। दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी में मचान बनाने का काम शुरू हो चुका है। किशनपुर सेंक्चुरी में कई मचान बनकर तैयार भी हो गए हैं।


दुधवा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के खानपान से लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। वन्यजीवों के लिए पानी की समस्या दूर करने को वाटर होल बनाए जा रहे हैं तो शिकारियों की घुसपैठ पर नजर रखने के लिए जंगल में मचान भी बनाए जा रहे हैं।
रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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