{"_id":"5b367bb04f1c1bda6e8ba9b9","slug":"91530297264-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संपूर्णानगर मिल में बारिश में भीग गई हजारों बोरी चीनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संपूर्णानगर मिल में बारिश में भीग गई हजारों बोरी चीनी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 30 Jun 2018 12:40 AM IST
विज्ञापन
चीनी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्थानीय किसान सहकारी चीनी मिल में अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हजारों बोरी चीनी वर्षा के पानी से भीग गई। वजह रही दो महीने पहले क्षमता से अधिक चीनी रखने पर ढही गोदाम नंबर एक की दीवार का आज तक कोई बंदोबस्त नहीं किया गया, जबकि लगातार संभावना जताई जा रही थी कि वर्षा हुई तो चीनी भीग जाएगी, फिरभी प्रबंधन पल्ली और टीन शेड की छाया के भरोसे रहा। इतना ही नहीं शुक्रवार को मिल प्रबंधन तक जागा, जब करोड़ों की चीनी भीगने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इससे जाहिर होता है कि यहां पर भारी लापरवाही की जा रही है। वायरल खबर में भीगी चीनी की कीमत करोड़ों में बताई गई है, जबकि मिल प्रबंधन का कहना है कि सारी चीनी बिक चुकी है। गोदामों में सिर्फ 22 हजार क्विंटल बिकी हुई चीनी अवशेष है, जिसका उठान हो रहा है, इसलिए चीनी भीगने से मिल का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
बीते 30 अप्रैल व एक मई को आई आंधी में गोदाम नंबर एक की दीवार ढह गई थी। इसमें एक लाख 24 हजार 571 चीनी की बोरियां रखी थीं, जबकि इसकी क्षमता मात्र 55 हजार क्विंटल की ही है। मिल के पास कुल आठ गोदाम हैं और सभी की क्षमता 55 हजार क्विंटल ही चीनी रखने की है। मिल प्रशासन व फेडरेशन के संज्ञान में होते हुए भी गोदामों में क्षमत से अधिक चीनी रखी जा रही थी। इसके बाद आए तूफान से दीवार ढह गई और सारी बोरियां गिर गई थीं। बीते दो दिनों में हुई बरसात से खुले में पड़ी चीनी भरी बोरियां भींग गई। जिससे करोड़ों रुपये का मिल को नुकसान हुआ है। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आनन-फानन में जीएम ने मजदूरों से चीनी बोरियों में भरवानी शुरू कर दी। मौके पर चीनी भी फर्श पर पड़ी दिखी। मजदूरों से पूछने पर पता चला कि उन्होंने आज से ही कार्य शुरू किया है।
किसानों ने कहा, मिल की घोर लापरवाही से बरबाद हुई चीनी
वर्षा में चीनी भीगने की सूचना पर पहुंचे किसान अविनाश सिंह, लल्लन गौड़, महिपाल सिंह ने इसके लिए अधिकारियों की लापरवाही बताया है। उन्होंने बताया कि जब गोदाम ढह गया था तो वर्षा से पहले समय रहते चीनी को सुरक्षित पहुंचाया जा सकता था, लेकिन प्रबंधन लापरवाह बना रहा। जो नुकसान हुआ है वह किसानों का भी है, क्योंकि किसान इसके शेयर होल्डर भी हैं। किसानों ने बताया कि गोदाम के लिए शटर भी बनकर आया है, लेकिन मिल प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक उसे लगाया नहीं गया है। किसान लल्लन गौड़ ने बताया कि चीनी मिल को करोड़ों का घाटा हुआ है और गोदाम में क्षमता से अधिक चीनी रखकर उसे गिराया गया। यह प्रशासन और फेडरेशन की मिलीभगत है, जिससे यहां के किसानों का नुकसान हो रहा है।
विज्ञापन
मजदूरों की जान से किया जा रहा खिलवाड़
गोदाम की ऊंचाई काफी अधिक है। जिसपर रस्सी और पाइप के सहारे असुरक्षित ढंग से मजदूर पल्ली आदि बांधते हैं। गोदाम के अंदर मजदूर जिस प्रकार से काम कर रहे थे उनके पास न तो हेलमेट था और न ही सेफ्टी बेल्ट का ही कोई इस्तेमाल करते दिखा। मजदूर पाइप और रस्सी के सहारे टीन शेड पर चढ़ते दिखे। जिससे कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है।
भीगकर बर्बाद हुई चीनी वायरल खबर निराधार: डीएम
संपूर्णानगर चीनी मिल के पदेन अध्यक्ष डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि 31 अप्रैल और एक य्मई को आई आंधी में चीनी मिल गोदाम की दीवार ढह गई थी। उस समय शुगर फेडरेशन का प्रतिनिधि मंडल आया था। फिर गोदाम की दीवार निर्माण को बजट मिला और निर्माण भी शुरू कराया गया। इस बीच गोदाम में रखी सारी चीनी बिक गई, जिसका उठाना हो रहा है। वर्तमान में इस गोदाम में सिर्फ 22 हजार क्विंटल बिकी हुई चीनी शेष है, जिसका भी उठान हो रहा है। इस तरह सोशल मीडिया पर भीगकर चीनी बर्बाद होने की खबर निराधार है। ऐसा कुछ लोग मिल प्रबंधन को परेशान करने की मंशा से कर रहे हैं।
बीते दिन आई आंधी में दीवार गिर गई थी। आठ गोदाम हैं। इसकी सूचना फेडरेशन को पत्र लिखकर दी गई थी। इसमें हमारी कोई लापरवाही नहीं है। अधिक बोरी इसीलिए रखी गईं थी कि गोदाम कम है और पेराई ज्यादा है। सारी चीनी बिक चुकी है। गोदामों में सिर्फ 22 हजार क्विंटल बिकी हुई चीनी अवशेष है, जिसका उठान हो रहा है, इसलिए चीनी भीगने से मिल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। प्रताप नारायन, प्रधान प्रबंधक
किसान सहकारी चीनी मिल-संपूर्णानगर
विज्ञापन
बीते 30 अप्रैल व एक मई को आई आंधी में गोदाम नंबर एक की दीवार ढह गई थी। इसमें एक लाख 24 हजार 571 चीनी की बोरियां रखी थीं, जबकि इसकी क्षमता मात्र 55 हजार क्विंटल की ही है। मिल के पास कुल आठ गोदाम हैं और सभी की क्षमता 55 हजार क्विंटल ही चीनी रखने की है। मिल प्रशासन व फेडरेशन के संज्ञान में होते हुए भी गोदामों में क्षमत से अधिक चीनी रखी जा रही थी। इसके बाद आए तूफान से दीवार ढह गई और सारी बोरियां गिर गई थीं। बीते दो दिनों में हुई बरसात से खुले में पड़ी चीनी भरी बोरियां भींग गई। जिससे करोड़ों रुपये का मिल को नुकसान हुआ है। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आनन-फानन में जीएम ने मजदूरों से चीनी बोरियों में भरवानी शुरू कर दी। मौके पर चीनी भी फर्श पर पड़ी दिखी। मजदूरों से पूछने पर पता चला कि उन्होंने आज से ही कार्य शुरू किया है।
विज्ञापन
किसानों ने कहा, मिल की घोर लापरवाही से बरबाद हुई चीनी
वर्षा में चीनी भीगने की सूचना पर पहुंचे किसान अविनाश सिंह, लल्लन गौड़, महिपाल सिंह ने इसके लिए अधिकारियों की लापरवाही बताया है। उन्होंने बताया कि जब गोदाम ढह गया था तो वर्षा से पहले समय रहते चीनी को सुरक्षित पहुंचाया जा सकता था, लेकिन प्रबंधन लापरवाह बना रहा। जो नुकसान हुआ है वह किसानों का भी है, क्योंकि किसान इसके शेयर होल्डर भी हैं। किसानों ने बताया कि गोदाम के लिए शटर भी बनकर आया है, लेकिन मिल प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक उसे लगाया नहीं गया है। किसान लल्लन गौड़ ने बताया कि चीनी मिल को करोड़ों का घाटा हुआ है और गोदाम में क्षमता से अधिक चीनी रखकर उसे गिराया गया। यह प्रशासन और फेडरेशन की मिलीभगत है, जिससे यहां के किसानों का नुकसान हो रहा है।
विज्ञापन
मजदूरों की जान से किया जा रहा खिलवाड़
गोदाम की ऊंचाई काफी अधिक है। जिसपर रस्सी और पाइप के सहारे असुरक्षित ढंग से मजदूर पल्ली आदि बांधते हैं। गोदाम के अंदर मजदूर जिस प्रकार से काम कर रहे थे उनके पास न तो हेलमेट था और न ही सेफ्टी बेल्ट का ही कोई इस्तेमाल करते दिखा। मजदूर पाइप और रस्सी के सहारे टीन शेड पर चढ़ते दिखे। जिससे कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है।
भीगकर बर्बाद हुई चीनी वायरल खबर निराधार: डीएम
संपूर्णानगर चीनी मिल के पदेन अध्यक्ष डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि 31 अप्रैल और एक य्मई को आई आंधी में चीनी मिल गोदाम की दीवार ढह गई थी। उस समय शुगर फेडरेशन का प्रतिनिधि मंडल आया था। फिर गोदाम की दीवार निर्माण को बजट मिला और निर्माण भी शुरू कराया गया। इस बीच गोदाम में रखी सारी चीनी बिक गई, जिसका उठाना हो रहा है। वर्तमान में इस गोदाम में सिर्फ 22 हजार क्विंटल बिकी हुई चीनी शेष है, जिसका भी उठान हो रहा है। इस तरह सोशल मीडिया पर भीगकर चीनी बर्बाद होने की खबर निराधार है। ऐसा कुछ लोग मिल प्रबंधन को परेशान करने की मंशा से कर रहे हैं।
बीते दिन आई आंधी में दीवार गिर गई थी। आठ गोदाम हैं। इसकी सूचना फेडरेशन को पत्र लिखकर दी गई थी। इसमें हमारी कोई लापरवाही नहीं है। अधिक बोरी इसीलिए रखी गईं थी कि गोदाम कम है और पेराई ज्यादा है। सारी चीनी बिक चुकी है। गोदामों में सिर्फ 22 हजार क्विंटल बिकी हुई चीनी अवशेष है, जिसका उठान हो रहा है, इसलिए चीनी भीगने से मिल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। प्रताप नारायन, प्रधान प्रबंधक
किसान सहकारी चीनी मिल-संपूर्णानगर