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लीवर और किडनी में खराबी से हुई बटालिक की मौत
Updated Sun, 17 Jun 2018 12:08 AM IST
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लीवर और किडनी में खराबी से हुई बटालिक की मौत
पार्क अधिकारियों ने नम आंखों से दी बटालिक को अंतिम विदाई
अमर उजाला ब्यूरो
पलिया कलां। दुधवा नेशनल पार्क के युवा हाथी बटालिक के शव का शनिवार सुबह चार वेटनरी डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक बटालिक की मौत लीवर और किडनी समेत कई अंगों के खराब हो जाने के कारण हुई है। बटालिक के हृदय, लीवर, गुर्दे, फेफड़े, आंतों में मिले बिसरे के साथ आंतों के अंश सुरक्षित कर लिए गए है। इन्हें जांच के लिए आईबीआरआई बरेली भेजा जा रहा है।
दुधवा नेशनल पार्क के युवा पालतू हाथी बटालिक की शुक्रवार शाम करीब 4.30 बजे मौत हो गई थी। शनिवार सुबह चार डॉक्टरों के पैनल ने बटालिक के शव का पोस्टमार्टम किया। डाक्टरों के इस पैनल में पलिया उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेबी सिंह, नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के उपनिदेशक एवं जाने माने पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, डब्ल्यूटीआई की पशु चिकित्सक डॉ. रितिका और डॉ. दक्ष शामिल थे। पोस्टमार्टम के दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डॉयरेक्टर रमेश कुमार पांडेय भी पूरे समय मौजूद रहे।
फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार हो रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही अधिकृत रूप से कुछ कहा जा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि बटालिक के मदमस्त होने पर उसकी बीमारियां उभर आईं और शॉक से उसकी मौत हो गई।
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नम आंखों से दी अंतिम विदाई
पोस्टमार्टम के बाद शव को सलूकापुर बेस कैंप के पास ही दफना दिया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय और दुधवा नेशनल पार्क के प्रभारी उपनिदेशक डॉ. अनिल पटेल समेत दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों ने नम आंखों से बटालिक को अंतिम विदाई दी। बटालिक के शव को सलूकापुर बेस कैंप के पास उसी जगह दफनाया गया जहां छह माह पहले उसकी मां पुष्पाकली को दफनाया गया था। फील्ड डायरेक्टर ने अपने हाथों से बटालिक को कफन ओढ़ाया और दफन करते समय अपने हाथों से मिट्टी डाली।
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लीवर और किडनी में खराबी से हुई बटालिक की मौत
पार्क अधिकारियों ने नम आंखों से दी बटालिक को अंतिम विदाई
अमर उजाला ब्यूरो
पलिया कलां। दुधवा नेशनल पार्क के युवा हाथी बटालिक के शव का शनिवार सुबह चार वेटनरी डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के मुताबिक बटालिक की मौत लीवर और किडनी समेत कई अंगों के खराब हो जाने के कारण हुई है। बटालिक के हृदय, लीवर, गुर्दे, फेफड़े, आंतों में मिले बिसरे के साथ आंतों के अंश सुरक्षित कर लिए गए है। इन्हें जांच के लिए आईबीआरआई बरेली भेजा जा रहा है।
दुधवा नेशनल पार्क के युवा पालतू हाथी बटालिक की शुक्रवार शाम करीब 4.30 बजे मौत हो गई थी। शनिवार सुबह चार डॉक्टरों के पैनल ने बटालिक के शव का पोस्टमार्टम किया। डाक्टरों के इस पैनल में पलिया उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेबी सिंह, नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के उपनिदेशक एवं जाने माने पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, डब्ल्यूटीआई की पशु चिकित्सक डॉ. रितिका और डॉ. दक्ष शामिल थे। पोस्टमार्टम के दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डॉयरेक्टर रमेश कुमार पांडेय भी पूरे समय मौजूद रहे।
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फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार हो रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही अधिकृत रूप से कुछ कहा जा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि बटालिक के मदमस्त होने पर उसकी बीमारियां उभर आईं और शॉक से उसकी मौत हो गई।
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नम आंखों से दी अंतिम विदाई
पोस्टमार्टम के बाद शव को सलूकापुर बेस कैंप के पास ही दफना दिया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय और दुधवा नेशनल पार्क के प्रभारी उपनिदेशक डॉ. अनिल पटेल समेत दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों ने नम आंखों से बटालिक को अंतिम विदाई दी। बटालिक के शव को सलूकापुर बेस कैंप के पास उसी जगह दफनाया गया जहां छह माह पहले उसकी मां पुष्पाकली को दफनाया गया था। फील्ड डायरेक्टर ने अपने हाथों से बटालिक को कफन ओढ़ाया और दफन करते समय अपने हाथों से मिट्टी डाली।