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न मिल चली न हुआ गन्ने का भुगतान, किसान परेशान
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 29 Oct 2018 05:32 PM IST
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sugar cane
- फोटो : amar ujala
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क्षेत्र में पेड़ी गन्ने की फसल तैयार है, लेकिन अभी चीनी मिलों में पेराई शुरू नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्हू पर गन्ने को औने-पौने दामों पर मनमाने तरीके से 190 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जा रहा है। त्योहारी सीजन और लिहाजा परिवार की जरूरतों और घर का खर्च चलाने के लिए मजबूरन किसानों को कोल्हू पर घाटे का सौदा करना पड़ रहा है।
अधिकतर किसान गन्ने की खेती पर ही निर्भर हैं। चीनी मिलों में पेराई सत्र की देरी का खामियाजा गन्ना किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कोल्हू मालिक किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर 300 रुपये प्रति क्विंटल वाला गन्ना 190 रुपये में खरीदकर चांदी काट रहे हैं। किसानों को निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए धन की जरूरत है, उनकी इस मजबूरी का फायदा कोल्हू मालिक उठा रहे हैं। गन्ना उत्पादक प्रमोद, धीरेंद्र का कहना है कि किसानों को इस समय अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रुपयों की सख्त जरूरत है। उनके खेतों में पेड़ी गन्ना फसल पककर तैयार खड़ी है। चीनी मिल न चलने से खेत न खाली होने पर रबी की बुवाई भी नहीं हो पा रही है, साथ ही दीवाली, भैयादूज का त्योहार भी आर्थिक तंगी में उन्हें कम दाम में गन्ना बेचने को मजबूर कर रहा है।
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अधिकतर किसान गन्ने की खेती पर ही निर्भर हैं। चीनी मिलों में पेराई सत्र की देरी का खामियाजा गन्ना किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कोल्हू मालिक किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर 300 रुपये प्रति क्विंटल वाला गन्ना 190 रुपये में खरीदकर चांदी काट रहे हैं। किसानों को निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए धन की जरूरत है, उनकी इस मजबूरी का फायदा कोल्हू मालिक उठा रहे हैं। गन्ना उत्पादक प्रमोद, धीरेंद्र का कहना है कि किसानों को इस समय अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रुपयों की सख्त जरूरत है। उनके खेतों में पेड़ी गन्ना फसल पककर तैयार खड़ी है। चीनी मिल न चलने से खेत न खाली होने पर रबी की बुवाई भी नहीं हो पा रही है, साथ ही दीवाली, भैयादूज का त्योहार भी आर्थिक तंगी में उन्हें कम दाम में गन्ना बेचने को मजबूर कर रहा है।
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