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वन्यजीवों के शिकार की आशंका से दुधवा में अलर्ट
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:51 PM IST
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dudhwa
- फोटो : amar ujala
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बरसात के मौसम में वन्यजीवों के शिकार और वनापराध की घटनाओं की आशंका से दुधवा टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी किया गया है। जंगलों में चौकसी बढ़ाने के साथ ही पेट्रोलिंग भी तेज कर दी गई है। वाहनों के साथ पैदल गश्त भी जारी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि पेट्रोलिंग के लिए बनाई गई टीमों में वन विभाग के फील्ड स्टाफ के साथ स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के जवानों को भी शामिल किया गया है। टीमें मेटल डिटेक्टर और डॉग स्क्वाड साथ लेकर चल रही हैं ताकि जंगली जीवों के शिकार के लिए कुड़का या खाबड़ आदि लगा हो तो उसका पता लगाया जा सके।
दुधवा नेशनल पार्क में प्रशासन ने उन स्थलों को चिह्नित किया है जहां से अपराधी जंगल के अंदर घुसपैठ कर सकते हैं। इन रास्तों और स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा जंगल के रास्तों और पास से गुजरने वाले वाहनों की भी तलाशी ली जा रही है। यही नहीं जंगल से सटे उन गांवों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है जहां वनापराधी अपना ठिकाना बना सकते हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय के मुताबिक बरसात का मौसम शिकार और अन्य वनापराधों के लिहाज से काफी संवेदनशील होता है। जंगल के रास्तों पर पानी भर जाने से जंगल में गश्त शिथिल हो जाती है। ऐसे में वनापराधी सक्रिय हो जाते हैं और जंगली जीवों के शिकार की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जंगल में पैदल गश्त कराई जा रही है। पैदल गश्त में दुधवा पार्क के अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि पेट्रोलिंग के लिए बनाई गई टीमों में वन विभाग के फील्ड स्टाफ के साथ स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के जवानों को भी शामिल किया गया है। टीमें मेटल डिटेक्टर और डॉग स्क्वाड साथ लेकर चल रही हैं ताकि जंगली जीवों के शिकार के लिए कुड़का या खाबड़ आदि लगा हो तो उसका पता लगाया जा सके।
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दुधवा नेशनल पार्क में प्रशासन ने उन स्थलों को चिह्नित किया है जहां से अपराधी जंगल के अंदर घुसपैठ कर सकते हैं। इन रास्तों और स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा जंगल के रास्तों और पास से गुजरने वाले वाहनों की भी तलाशी ली जा रही है। यही नहीं जंगल से सटे उन गांवों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है जहां वनापराधी अपना ठिकाना बना सकते हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय के मुताबिक बरसात का मौसम शिकार और अन्य वनापराधों के लिहाज से काफी संवेदनशील होता है। जंगल के रास्तों पर पानी भर जाने से जंगल में गश्त शिथिल हो जाती है। ऐसे में वनापराधी सक्रिय हो जाते हैं और जंगली जीवों के शिकार की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जंगल में पैदल गश्त कराई जा रही है। पैदल गश्त में दुधवा पार्क के अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं।