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690 क्विंटल गेहूं का बीज गोदाम में हुआ खराब
Updated Wed, 05 Dec 2018 11:21 PM IST
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पिछले वर्ष किसानों को बिक्री के लिए आया 690 क्विंटल गेहूं का बीज कृषि विभाग के गोदाम में रखे रखे ही खराब हो गया। इससे करीब 22 लाख रुपये का नुकसान विभाग को हुआ है। इसका खुलासा लैब से नमूनों की जांच रिपोर्ट आने पर हुआ। इसमें बताया गया है कि यह बीज अंकुरण की क्षमता खो चुका है। इसके बाद इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। साथ ही विभाग ने इस खराब बीज की नीलामी कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी को कई महीने पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
वर्ष 2017-18 में रबी की बुवाई के समय कृषि विभाग ने बीज विकास निगम लखनऊ से 7947 क्विंटल गेहूं का बीज मंगाया था। इसे 15 ब्लॉकों में स्थित राजकीय कृषि बीज केंद्रों पर बिक्री के लिए भेजा गया था। इसमें से 7257 क्विंटल बीज की बिक्री हुई थी, जबकि 690 क्विंटल बीज की बिक्री नहीं हो पाई थी। इस पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कार्रवाई करते हुए फरवरी 2018 में ही तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को निलंबित कर मुख्यालय से अटैच कर दिया था। इसके बाद उनके स्थान पर सत्येंद्र प्रताप सिंह को जिला कृषि अधिकारी बनाया गया और बचे हुए बीज का नमूना जांच के लिए अक्तूबर 2018 में लैब भेजा गया, जिसके बाद अब रिपोर्ट आई है। लैब की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बीज की अंकुरण क्षमता समाप्त हो चुकी है, जिससे इसकी बिक्री नहीं की जा सकती। वहीं बीज शोधन में कीटनाशकों के प्रयोग के चलते इसे खाया भी नहीं जा सकता। लिहाजा इस बीज को नीलाम किया जाएगा, जो स्टार्च आदि बनाने में प्रयोग हो सकता है।
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वर्ष 2017-18 में रबी की बुवाई के समय कृषि विभाग ने बीज विकास निगम लखनऊ से 7947 क्विंटल गेहूं का बीज मंगाया था। इसे 15 ब्लॉकों में स्थित राजकीय कृषि बीज केंद्रों पर बिक्री के लिए भेजा गया था। इसमें से 7257 क्विंटल बीज की बिक्री हुई थी, जबकि 690 क्विंटल बीज की बिक्री नहीं हो पाई थी। इस पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कार्रवाई करते हुए फरवरी 2018 में ही तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को निलंबित कर मुख्यालय से अटैच कर दिया था। इसके बाद उनके स्थान पर सत्येंद्र प्रताप सिंह को जिला कृषि अधिकारी बनाया गया और बचे हुए बीज का नमूना जांच के लिए अक्तूबर 2018 में लैब भेजा गया, जिसके बाद अब रिपोर्ट आई है। लैब की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बीज की अंकुरण क्षमता समाप्त हो चुकी है, जिससे इसकी बिक्री नहीं की जा सकती। वहीं बीज शोधन में कीटनाशकों के प्रयोग के चलते इसे खाया भी नहीं जा सकता। लिहाजा इस बीज को नीलाम किया जाएगा, जो स्टार्च आदि बनाने में प्रयोग हो सकता है।
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