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पदाधिकारियों के निलंबन से भड़के लेखपाल, जारी रहेगा आंदोलन
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:12 PM IST
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13एलकेएच01
पदाधिकारियों के निलंबन से भड़के लेखपाल
क्रासर.........
बोले हमारी मांगे जायज, सरकार कर रही हठधर्मिता
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर आठ सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन / कार्य बहिष्कार शुक्रवार को भी जारी रहा। जिला प्रशासन द्वारा संघ के जिलाध्यक्ष और जिला मंत्री समेत 16 लेखपालों के निलंबन पर रोष जाहिर किया गया। जिलाध्यक्ष रामकुमार दीक्षित ने कहा कि प्रशासन द्वारा संघ पदाधिकारियों के खिलाफ निलंबन और नवनियुक्त लेखपालों को नोटिस देकर अपनी हठधर्मिता का परिचय दिया है। वर्षों से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई न करके लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनरत लेखपालों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
विलोबी मेमोरियल परिसर में जिले भर से लेखपाल एकत्र हुए। सभी ने गुरुवार को 16 लेखपालों पर हुई निलंबन की कार्रवाई को सरकार का संवेदनहीन रवैया बताया। जिला मंत्री अतुल वाजपेयी ने कहा कि हमारी मांगे जायज हैं, जिनके लिए 27 अक्तबर 2014, 21 सितंबर 2016, 11 अप्रैल 2017, 31 अक्तूबर 2017, छह मई 2018, 11 जून और 22 जून 2018 को पत्राचार किया गया। सहमति बनने के बावजूद आज तक कोई मांग पूरी नहीं की गई है। सरकार के एस्मा, दमनकार्य निलंबन से लेखपाल नहीं डरेंगे। सभा स्थल पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष महंत सिंह, मंत्री परमानंद, एक्स-रे टेकनीशियन संघ के रामराज सिंह, संयुक्त चिकित्सा कर्मचारी संघ के सर्वेश वर्मा, आरके पांडेय, सोनम जायसवाल, वेदप्रकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
बाक्स=
सिर्फ छह लेखपाल कर रहे ड्यूटी
लखीमपुर खीरी। जिले की सात तहसीलों लखीमपुर, पलिया, निघासन, धौरहरा, मोहम्मदी, मितौली और गोला में 449 लेखपाल तैनात हैं। इसमें 443 लेखपाल तीन जुलाई 2018 से कार्य बहिष्कार पर हैं, जबकि मात्र छह लेखपाल ड्यूटी कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने गुरुवार को जिलाध्यक्ष और जिलामंत्री समेत सभी तहसील इकाई के अध्यक्ष और मंत्रियों को सस्पेंड कर दिया था, जिसके बाद लेखपाल संघ आंदोलन को धार देने में जुट गया है। वहीं लेखपालों की इस हड़ताल से तहसीलों में कामकाज ठप है। लोगों के जाति/आय प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं।
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पदाधिकारियों के निलंबन से भड़के लेखपाल
क्रासर.........
बोले हमारी मांगे जायज, सरकार कर रही हठधर्मिता
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर आठ सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन / कार्य बहिष्कार शुक्रवार को भी जारी रहा। जिला प्रशासन द्वारा संघ के जिलाध्यक्ष और जिला मंत्री समेत 16 लेखपालों के निलंबन पर रोष जाहिर किया गया। जिलाध्यक्ष रामकुमार दीक्षित ने कहा कि प्रशासन द्वारा संघ पदाधिकारियों के खिलाफ निलंबन और नवनियुक्त लेखपालों को नोटिस देकर अपनी हठधर्मिता का परिचय दिया है। वर्षों से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई न करके लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलनरत लेखपालों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
विलोबी मेमोरियल परिसर में जिले भर से लेखपाल एकत्र हुए। सभी ने गुरुवार को 16 लेखपालों पर हुई निलंबन की कार्रवाई को सरकार का संवेदनहीन रवैया बताया। जिला मंत्री अतुल वाजपेयी ने कहा कि हमारी मांगे जायज हैं, जिनके लिए 27 अक्तबर 2014, 21 सितंबर 2016, 11 अप्रैल 2017, 31 अक्तूबर 2017, छह मई 2018, 11 जून और 22 जून 2018 को पत्राचार किया गया। सहमति बनने के बावजूद आज तक कोई मांग पूरी नहीं की गई है। सरकार के एस्मा, दमनकार्य निलंबन से लेखपाल नहीं डरेंगे। सभा स्थल पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष महंत सिंह, मंत्री परमानंद, एक्स-रे टेकनीशियन संघ के रामराज सिंह, संयुक्त चिकित्सा कर्मचारी संघ के सर्वेश वर्मा, आरके पांडेय, सोनम जायसवाल, वेदप्रकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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सिर्फ छह लेखपाल कर रहे ड्यूटी
लखीमपुर खीरी। जिले की सात तहसीलों लखीमपुर, पलिया, निघासन, धौरहरा, मोहम्मदी, मितौली और गोला में 449 लेखपाल तैनात हैं। इसमें 443 लेखपाल तीन जुलाई 2018 से कार्य बहिष्कार पर हैं, जबकि मात्र छह लेखपाल ड्यूटी कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने गुरुवार को जिलाध्यक्ष और जिलामंत्री समेत सभी तहसील इकाई के अध्यक्ष और मंत्रियों को सस्पेंड कर दिया था, जिसके बाद लेखपाल संघ आंदोलन को धार देने में जुट गया है। वहीं लेखपालों की इस हड़ताल से तहसीलों में कामकाज ठप है। लोगों के जाति/आय प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं।
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