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खेतों में गन्ने के साथ सूख रहे किसान के अरमान

Mon, 09 Apr 2018 12:01 AM IST
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:01 AM IST
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खेतों में गन्ने के साथ सूख रहे किसान के अरमान
लखीमपुर खीरी।
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गर्मी बढ़ने के साथ ही खेतों में खड़ा गन्ना भी अब सूखने लगा है। गन्ने के साथ ही किसान के अरमान भी सूखने सूखने लगे हैं, जिस गन्ने की बुवाई करते समय किसान बिटिया के हाथ पीले करने, बच्चों की उच्च शिक्षा में आने वाले खर्चे, घर बनवाने और लोगों से उधार लिए पैसों को चुकता करने का सपना देखता है, वह सब अब टूटते नजर आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो हर चीनी मिल के एरिया में 50 से 70 क्विंटल तक गन्ना अब भी खेतों में खड़ा है, जबकि मिलें बंदी के कगार पर पहुंच रही हैं। जिले की गोला, पलिया, गुलरिया, खंभारखेड़ा, कुंभी, अजबापुर, ऐरा और संपूर्णानगर व बिलरायां की सहकारी चीनी मिल का कमोवेश यही हाल है। हालांकि प्रशासन और मिल प्रबंधन का अब भी यही दावा है कि जब तक खेतों में गन्ना है, वह पेराई सत्र समाप्त नहीं करेंगे, लेकिन किसान असमंजस में है। किसानों का कहना है कि एक साथ पर्चियां मिल भी गईं तो वह इतनी जल्दी गन्ना मिल तक कैसे पहुंचा पाएंगे। फिलहाल, किसान परेशान हैं। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट:

क्रेशर पर सस्ता गन्ना बेचना विवशता
गोला गोकर्णनाथ।
चीनी मिल छह नवंबर से अब तक एक करोड़ 73 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकी हैं, जबकि इस पेराई सत्र में किसानों का दो करोड़ 24 लाख क्विंटल गन्ने का सट्टा सहकारी गन्ना विकास समिति द्वारा किया गया था। अब सट्टे का 51 लाख क्विंटल गन्ना शेष है, चीनी मिल की पेराई क्षमता एक लाख 30 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है। इस प्रकार सट्टे का गन्ना ही 40 दिन में मिल पेर सकेगी, जबकि सट्टे के अतिरिक्त भी काफी किसानों का गन्ना खेतों में खड़ा है। मिल से पर्चियां न मिलने से गन्ना किसानों में संशय की स्थिति है। किसान क्रेशर और गुड़ कोल्हुओं को 180 से 190 रुपये कीमत पर गन्ना बेचने को विवश है।
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धांधली के कारण नहीं चढ़ा रकबा
बांकेगंज। कई ऐसे किसान हैं जिनका सट्टा तो है, लेकिन धांधली के चलते खेत में गन्ना खड़ा होने के बाद भी उनके सट्टे में गन्ने का रकबा ही नहीं है। चीनी मिल और गन्ना समिति के अधिकारियों की मानें तो लगभग 80 फीसदी गन्ना खरीद के लिए पर्चियां जारी हो चुकी हैं। इन भारी भरकम आंकड़ों के बावजूद हजारों किसानों को पर्चियां न मिलने से उनके खेतों में खड़ी गन्ना फसल सूख रही है।
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कोल्हू पर घाटे में बेचेंगे गन्ना
गोला गोकर्णनाथ।
ग्राम टेहुलिया के अतीक अहमद का कहना है कि उनका सट्टा दस ट्रॉलियों का बना है, जिसमें अभी तक सिर्फ पांच ट्रालियों की पर्चियां जारी हो सकी हैं, जबकि कोसा 0238 अधिक उपज का गन्ना होने के कारण सट्टे के अलावा भी उनके पास गन्ना है। खेतों में खड़ा गन्ना हवा से पलट कर सूख रहा है। बढ़े गन्ने का सर्वे नहीं हो रहा है, जिसे वह कोल्हू पर घाटे में बेचेंगे।

पर्ची न मिलने से गन्ना किसान परेशान
मोहम्मदी। मोहम्मदी गन्ना सोसायटी के अंतर्गत कुंभी और अजबापुर दो चीनी मिलें आती हैं। सचिव राजीव कुमार सिंह का कहना है कि दोनों मिलों के करीब 20 हजार सट्टेदार हैं। क्षेत्र से मिलों को 40 लाख क्विंटल गन्ना खरीदना होगा, लेकिन पर्चियों की गति इतनी धीमी है कि अब भी खेतों में दस लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है। किसानों ने कोल्हू और क्रेशरों पर भी 160 से 170 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना बेचा, क्योंकि उन्हें अगली फसल के लिए खेत भी खाली करने हैं। डीएससीएल शुगर अजबापुर के जीएम केन सुभाष खोखर का कहना है कि किसानों का गन्ना जब तक खेतों में खड़ा है, पेराई बंद नहीं होगी जबकि जीएम केन कुंभी चीनी मिल आरके तिवारी के अनुसार इंडेंट के अनुसार नियमानुसार पर्चियां निर्गत हो रही है।


क्या कहते हैं किसान

पांच एकड़ गन्ना अर्ली बोया गया था। सर्वे के बावजूद 25 पर्चियां थीं। अब तक 11 पर्चियां ही आई हैं। करीब तीन एकड़ गन्ना खेत में खड़ा सूख रहा है।
- पंकज मौर्य, टांडा

यही हाल रहा तो गन्ने की फसल से किनारा करना मजबूरी होगी। पर्चियां न मिलने से खेतों में खड़ा गन्ना सूखने लगा है। इस बार गन्ने में भारी घाटा हुआ है।
- डॉ. जहीर अहमद, बांकेगंज

सरकार को गन्ना किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए और बैंक से लिए कर्ज पर छूट देनी चाहिए। चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर ब्याज मिलना चाहिए।
- रमेश कुमार भार्गव, अर्जुनपुर

मिल बंद होने की ओर बढ़ रही है और अभी भी उनके खेत मे पेड़ी गन्ना खड़ा है, जिसकी पर्ची मिल नहीं दे रही है, जिससे वह परेशान है और गन्ना बुरी तरह सूख रहा है।
-कुलदीप सिंह, किसान-देवीपुर (निघासन)

क्या कहते हैं समिति संचालक

नहीं भरा गया ऑफर
प्रत्येक साल चीनी मिल अधिक गन्ना होने पर किसानों का ऑफर भरकर उनकी पर्चियां बढ़ाते थे। इस साल अभी तक सर्वे हुआ गन्ने की ही पर्चियां चीनी मिल नहीं दे पा रहा है। ऐसी में किसान ऑफर का बिना इंतजार किए अपना गन्ना कोल्हू और क्रेशर पर बेचने को विवश हैं।
- गोविंदर सिंह, संचालक, बिलरायां चीनी मिल, बिलरायां

नहीं सुन रहा मिल प्रबंधन
उनके 1424 गन्ने को इस वर्ष अचानक रिजेक्ट प्रजाति में शामिल कर दिया गया और पर्ची रोक दी गई, जिससे गन्ना खेत में सूख रहा है। मिल से मांग की गई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

- गुरदेव सिंह, संचालक, गन्ना समिति, पलिया

किसी भी किसान का गन्ना सूखने नहीं दिया जाएगा। चीनी मिलें तब तक चलेंगी, जब तक खेतों में गन्ना है। शत प्रतिशत गन्ना तौल कराई जाएगी। इस बाबत चीनी मिलों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
- बृजेश कुमार पटेल, डीसीओ
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