फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   ावधान, कुते-बंदर ने काटा तो नहीं लग पाएगा टीका

ावधान, कुते-बंदर ने काटा तो नहीं लग पाएगा टीका

Thu, 29 Mar 2018 07:59 PM IST
Updated Thu, 29 Mar 2018 07:59 PM IST
विज्ञापन
ावधान, कुते-बंदर ने काटा तो नहीं लग पाएगा टीका
29 एलकेएच 201 और 202
विज्ञापन

फोटोलाइन 29एलकेएच 301

लीड
----जिला अस्पताल में रहती है मारामारी
मेन...

सावधान, कुत्ते-बंदर ने काटा
तो नहीं लग पाएगा टीका
अस्पतालों से गायब हो गई एंटी रैबीज वैक्सीन
सीएचसी और पीएचसी से रेफर किए जा रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
यदि आपको कुत्ता या बंदर ने काट लिया है तो एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) आसानी से नहीं मिलेगी। सीएचसी और पीएचसी पर तो यह वैक्सीन मिल ही नहीं सकती। जिला अस्पताल में उपलब्ध है, लेकिन यहां काफी मारामारी होती है, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जिला अस्पताल में सुविधा है, लेकिन यहां भी एक साथ चार या पांच मरीज होने पर ही इंजेक्शन लगाया जाता है।
जिले में 14 सीएचसी और 58 पीएचसी हैं। जिला अस्पताल को छोड़कर किसी भी सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल में भी दोपहर में ही कह दिया जाता है कि अब वैक्सीन खत्म हो गई है। अगले दिन आओ।
विज्ञापन

गुरुवार को रजागंज निवासी श्रीनिवास, निघासन के रामनरेश, सुकई, दीनदयाल, प्रेमकुमारी, रजनी, सुशीला आदि पीड़ितों ने बताया कि सुबह जिनके पर्चे जमा हो जाते हैं उन्हीं को वैक्सीन लगाई जाती है। उन्हें आने में देर हुई तो लौटा दिया गया, जबकि कुछ लोग सिफारिश लेकर आए तो उन्हें टीका लगा दिया गया। हालांकि सीएमएस डॉ. अरुण कुमार गौतम ने बताया कि जिला अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध है। रोजाना 150 से दो सौ लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने आते हैं। एक वॉयल में चार से पांच डोज बनती हैं। फिलहाल, कुत्ता अथवा बंदर के कटने के बाद लगने वाली वैक्सीन की काफी किल्लत है और लोग रोजाना परेशान होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीएचसी और पीएचसी पर डिमांड के हिसाब से एंटी रैबीज वैक्सीन भेजी जाती है। फ्रिज की व्यवस्था न होने अथवा स्टॉफ की कमी के कारण डिमांड नहीं की गई होगी। फिलहाल, जिले पर पर्याप्त वैक्सीन की व्यवस्था है। यदि किसी को कोई दिक्कत हो तो उनसे आकर मिले, वह तत्काल वैक्सीन लगवाएंगे।
- डॉ. जावेद अहमद, सीएमओ

ग्रामीण क्षेत्रों के हालात तो बेहद खराब
गोला गोकर्णनाथ।
नगर और क्षेत्र के फरधान, बांकेगंज, कुंभी, मैलानी आदि जगहों के लोग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी तय कर एंटी रैबीज की वैक्सीन लगवाने आते हैं। यहां प्रतिदिन कुत्ता, बंदर, सियार आदि पशुओं के काटे हुए लगभग 25 से 30 मरीज एंटी रैबीज की वैक्सीन लगवाने के लिए आते हैं। महीने भर में ऐसे मरीजों की संख्या लगभग 750 रहती है, जिनके लिए अस्पताल को प्रतिमाह 100 से 120 वॉयल एंटी रैबीज की वैक्सीन की जरूरत पड़ती है। सीएचसी के कार्यवाहक अधीक्षक राजेंद्र कुमार ने बताया कि वैक्सीन के 100 वॉयल की डिमांड भेजी है, जो अस्पताल को शीघ्र उपलब्ध हो जाएगी।
बरवर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी बरवर डॉ. प्रमोद कुमार वर्मा ने बताया कि यहां पर कुत्ता काटने के इंजेक्शन के स्टोर के लिए फ्रीजर की व्यवस्था नहीं है। इसलिए जो मरीज आते हैं उन्हें सीएचसी पसगवां रेफर कर दिया जाता है।
मैलानी। यहां पीएचसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं हैं। डॉ. शारिक के मुताबिक इन इंजेक्शन को रखने के लिए फ्रिज की जरूरत होती है और पीएचसी में फ्रिज ही नहीं है, इसलिए यहां कभी एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं आते हैं। उन्होंने बताया कि महीने में एकाध ऐसे मरीज आते हैं, तो उन्हें सीएचसी बांकेगंज रेफर किया जाता है।
धौरहरा। सीएसची रमियाबेहड़ और धौरहरा में बीते 15 दिनों से वैक्सीन नहीं। इससे लोगों को करीब 65 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय पर जाकर वैक्सीन लगवानी पड़ती है।
ईसानगर। सीएचसी ईसानगर में पिछले दो हफ्ते से एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इससे लोगों को खासी दिक्कत हो रही है।

प्राइवेट अस्पतालों में 325 रुपये की मिलती है वैक्सीन
बताते हैं, प्राइवेट अस्पतालों में यह इंजेक्शन 325 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में लगाया जाता है। महंगा होने के कारण लोग जिला अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं।

यह होती है डोज
डिप्टी सीएमओ डॉ. रविंद्र नाथ वर्मा ने बताया कि कुत्ता अथवा बंदर के काट लेने पर पहला इंजेक्शन 24 घंटे के भीतर लगता है। दूसरा तीसरे दिन, फिर सातवें दिन, 14वें दिन, 29वें दिन फिर 90 दिन पर लगाया जाता है। छह डोज में लगने वाली इस वैक्सीन का असर एक साल तक रहता है यानी एक साल में यदि दोबारा कुत्ता या बंदर काट ले तो एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने की जरूरत नहीं होती।

एक माह से नहीं मिल
रहे रैबीज के इंजेक्शन
निघासन। सीएचसी में करीब एक माह से रैबीज के इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं। इंजेक्शन न मिलने के कारण मरीज परेशान हैं। गांव भजनपुरवा निवासी सुशील ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले उनकी पुत्री जुगरा के कुत्ते ने काट लिया था। वह सीएचसी पर चक्कर काट रहा है, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं। मार्केट में वही इंजेक्शन दो से तीन सौ रुपये में मिल रहे हैं। सीएचसी प्रभारी अरुण मिश्रा ने बताया कि एक दिन में 50 से अधिक मरीजों को इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जबकि तमाम मरीज इंजेक्शन न होने के कारण लौट जाते है।

फोटो- 29एलकेएच502
वैक्सीन का झंझट, देहरी
लांघ कर रहे टोटका
बांकेगंज।
एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा कर रही है, वहीं कस्बा स्थित सीएचसी में महीनों से एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते कुत्ता, बंदरों के काटने पर लंबी दूरी तय कर दूर-दराज इलाके से इलाज करवाने आने वाले लोगों को वहां से वापस होना पड़ता है। ऐसे में परेशान हाल ग्रामीण अंधविश्वास के चलते कुत्ता काटने के इलाज के लिए गांव-गांव सजाई गई देहरी को लांघने का टोटका करने पर मजबूर हैं। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि सीएचसी के कई चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन नहीं लग पाता है, जिससे परेशान लोगों को 50 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर जिला अस्पताल भागना पड़ता है। वहीं ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 प्रधान वीरेंद्र कुमार भार्गव, जटपुरा कुलवंत सिंह कक्की, ग्रंट डाटपुर हंसराम, हरदुआ रामकिशुन आदि का कहना है कि बांकेगंज सीएचसी में एंटी रैबीज वैक्सीन का हमेशा टोटा बना रहता है। जहां इसका इलाज न मिलने पर अंधविश्वास के चलते देहरी लांघ कर कुत्ता काटने का इलाज करने वाले ग्रामीणों की मौत तक होने की संभावना रहती है।


29एलकेएच 301
मोहम्मदी सीएचसी में भी एआरवी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं
मोहम्मदी।
कुत्ता, बंदर और जंगली जानवरों के काटने पर लगने वाला एआरवी इंजेक्शन इस चिकित्सालय पर उपलब्ध नहीं है। जनपद मुख्यालय से उपलब्ध होने पर ही लगाए जा सकेंगे। यह सूचना सीएचसी मोहम्मदी में 24 मार्च 2018 को लगाई गई है। सामान्य तौर पर 30 से 40 मरीज प्रतिदिन सीएचसी पर कुत्ता काटे मरीज आते हैं, लेकिन समय पर इंजेक्शन न उपलब्ध होने पर लौट जाते हैं। बृहस्पतिवार को डेढ़ बजे करीब गांव बगरेठी के सत्यपाल सिंह अपने बच्चे को लेकर इंजेक्शन लगवाने आए थे, लेकिन हास्पिटल में इंजेक्शन न होने से निराश लौट गए। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि करीब एक माह से इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। डिमांड की गई है, जिले से मिलने पर लगाए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed