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बर्फीली हवाएं चलने से तराई में शीतलहर का प्रकोप
Updated Sat, 16 Dec 2017 11:53 PM IST
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ठंड
- फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी।
तराई में शीतलहर का प्रकोप बढ़ने लगा है। शनिवार को दिन भर धूप निकलने के बावजूद गलन बनी रही। सर्द हवाओं के कारण खिलकर निकली धूप भी लोगों को गर्मी नहीं दे पाई। सुबह आसमान में धुंध छाई रहने से दस बजे के बाद ही सूरज के दर्शन हुए। इससे लोग देर तक रजाइयों में दुबके या अलाव तापते रहे। बच्चों को ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ा।
दिसंबर माह के मध्य तक सर्दी के मौसम में बासंती मौसम का अहसास हो रहा था। सुबह शाम गुलाबी सर्दी और दिन के समय कड़ी धूप होने से गर्म कपड़े भारी लग रहे थे, लेकिन पहाड़ों पर हुई बर्फबारी से 14 दिसंबर से मौसम ने एकाएक करवट बदली सर्द हवाओं के साथ शीतलहर का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया। शुक्रवार को मामूली राहत रही लेकिन शनिवार को एक बार फिर ठंडी हवाएं चलने से लोगों की कंपकंपी छूट गई। गलन एकाएक बढ़ जाने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
शीतलहर का प्रकोप बढ़ने से बाहर से काम की तलाश में आने वाले मजदूरों, रिक्शा चालकों, अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। कोचिंग और स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को कड़ाके की ठंड में दिक्कतें हुईं। बाढ़ और कटान से विस्थापित हुए लोग तटबंध किनारे खानाबदोशों की तरह जिंदगी गुजार रहे हैं। ऐसे लोगों पर यह ठंड भारी पड़ रही है।
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ठंड बढ़ने के बावजूद सरकारी स्तर पर अभी तक शहर में कहीं अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं हो सकी है। लोग कूड़ा करकट इकट्ठा कर खुद ही अलाव जला रहे है। उधर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि बढ़ती ठंड को देखते हुए शहर के विभिन्न चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की व्यवस्था की जा रही है। ठंड बढ़ी तो शहर में जरूरतमंदों के लिए रैन बसेरा भी बनाए जाएंगे।
गोला गोकर्णनाथ। अचानक मौसम ने करवट बदली, आसमान में छाए बादल और ठंडी हवा ने सुबह के मौसम को काफी सर्द कर दिया। बच्चे, बूढ़े सभी सर्दी से बचाव के लिए ऊनी कपड़े पहन कर घर से निकले। लोगों ने आग ताप पर ठंड से बचाव किया। दोपहर को खिली धूप से लोगों को राहत मिली लेकिन शाम होते ही सर्दी बढ़ने से मौसम काफी सर्द हो गया।
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तराई में शीतलहर का प्रकोप बढ़ने लगा है। शनिवार को दिन भर धूप निकलने के बावजूद गलन बनी रही। सर्द हवाओं के कारण खिलकर निकली धूप भी लोगों को गर्मी नहीं दे पाई। सुबह आसमान में धुंध छाई रहने से दस बजे के बाद ही सूरज के दर्शन हुए। इससे लोग देर तक रजाइयों में दुबके या अलाव तापते रहे। बच्चों को ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ा।
दिसंबर माह के मध्य तक सर्दी के मौसम में बासंती मौसम का अहसास हो रहा था। सुबह शाम गुलाबी सर्दी और दिन के समय कड़ी धूप होने से गर्म कपड़े भारी लग रहे थे, लेकिन पहाड़ों पर हुई बर्फबारी से 14 दिसंबर से मौसम ने एकाएक करवट बदली सर्द हवाओं के साथ शीतलहर का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया। शुक्रवार को मामूली राहत रही लेकिन शनिवार को एक बार फिर ठंडी हवाएं चलने से लोगों की कंपकंपी छूट गई। गलन एकाएक बढ़ जाने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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शीतलहर का प्रकोप बढ़ने से बाहर से काम की तलाश में आने वाले मजदूरों, रिक्शा चालकों, अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। कोचिंग और स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को कड़ाके की ठंड में दिक्कतें हुईं। बाढ़ और कटान से विस्थापित हुए लोग तटबंध किनारे खानाबदोशों की तरह जिंदगी गुजार रहे हैं। ऐसे लोगों पर यह ठंड भारी पड़ रही है।
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ठंड बढ़ने के बावजूद सरकारी स्तर पर अभी तक शहर में कहीं अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं हो सकी है। लोग कूड़ा करकट इकट्ठा कर खुद ही अलाव जला रहे है। उधर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि बढ़ती ठंड को देखते हुए शहर के विभिन्न चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की व्यवस्था की जा रही है। ठंड बढ़ी तो शहर में जरूरतमंदों के लिए रैन बसेरा भी बनाए जाएंगे।
गोला गोकर्णनाथ। अचानक मौसम ने करवट बदली, आसमान में छाए बादल और ठंडी हवा ने सुबह के मौसम को काफी सर्द कर दिया। बच्चे, बूढ़े सभी सर्दी से बचाव के लिए ऊनी कपड़े पहन कर घर से निकले। लोगों ने आग ताप पर ठंड से बचाव किया। दोपहर को खिली धूप से लोगों को राहत मिली लेकिन शाम होते ही सर्दी बढ़ने से मौसम काफी सर्द हो गया।