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तस्वीर कैद होने पर भी वन अधिकारी रहे लापरवाह
Updated Mon, 20 Nov 2017 12:34 AM IST
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ममरी।
मोहम्मदी-महेशपुर रेंज में बिहारीपुर फार्म के दक्षिण क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में शनिवार को बाघ और तेंदुए की तस्वीर कैद होने और खेतों में पगचिन्ह मिलने के बाद भी वन अधिकारी लापरवाह बने रहे। शायद यही वजह रही कि इलाके में अकेले खेतों में न जाने के लिए ग्रामीणों को अलर्ट तक नहीं किया गया, जबकि इसके लिए डुग्गी पिटवाकर लोगों को सचेत करने के साथ ही टीम को इलाके में लगाना चाहिए था।
मोहम्मदी-महेशपुर के जंगल में पिछले महीनों से बाघ की दहशत है। रविवार को जिस स्थान पर घटना हुई उससे महज तीन किलोमीटर की दूरी पर 21 अक्तूबर को बाघ के हमले से अशर्फीगंज निवासी 22 वर्षीय युवक लालाराम की मौत हो गई थी। पुलिस ने उस समय बाघ की मॉनीटरिंग शुरू की थी। साथ ही डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने कैमरे लगवाए थे। इन कैमरों में लगातार बाघ की तस्वीरें कैद हो रही थीं। इतना ही नहीं शुक्रवार को भी बिहारीपुर फार्म के दक्षिण क्षेत्र में कैमरे में बाघ और तेंदुए की तस्वीर कैद हुई तो वन कर्मी आए थे। उन्होंने बाघ के ताजा पगमार्क होने की भी बात भी कही थी। बिहारीपुर निवासी राजपाल सिंह, इंद्रजीत सिंह, हरविंदर सिंह और गोरेन्द्र सिंह का कहना है कि पगमार्क मिलने के बाद भी वन विभाग ने न तो इलाके में डुग्गी पिटवाई और न ही ग्रामीणों को अलर्ट करने के लिए वन कर्मियों को तैनात किया। यदि वन कर्मी लोगों को सचेत कर रहे होते तो शायद महेशपुर गांव का प्रकाश खेतों की ओर अकेले न जाता, जिससे उसकी जान बच सकती थी।
लाल झंडी और पोस्टर लगवाकर पा ली थी छुट्टी
एक महीने पहले लालाराम की मौत के बाद वन विभाग ने बाघ की लोकेशन वाले क्षेत्र में लाल झंडियां लगवाई थीं और अलर्ट करने के लिए पोस्टर भी चस्पा किए थे। कुछ दिन तो वन कर्मी नियुक्त भी किए गए, लेकिन फिर गांव वालों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान बाघ खेतों में ही रहा, लेकिन वन अधिकारी लाल झंडी और पोस्टर लगवाकर छुट्टी पा गए।
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लगातार हो रही थी मॉनीटरिंग
बाघ की लगातार मॉनीटरिंग हो रही थी। ग्रामीणों को अलर्ट भी किया गया था कि वह खेतों की ओर अकेले न जाएं। समूह बनाकर ही खेतों की तरफ जाएं। बाघ के जिधर पग मार्क मिल रहे थे, उधर लाल झंडियां भी लगाई गईं थीं।
- एसएन यादव, रेंजर, मोहम्म्दी महेशपुर रेंज
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मोहम्मदी-महेशपुर रेंज में बिहारीपुर फार्म के दक्षिण क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में शनिवार को बाघ और तेंदुए की तस्वीर कैद होने और खेतों में पगचिन्ह मिलने के बाद भी वन अधिकारी लापरवाह बने रहे। शायद यही वजह रही कि इलाके में अकेले खेतों में न जाने के लिए ग्रामीणों को अलर्ट तक नहीं किया गया, जबकि इसके लिए डुग्गी पिटवाकर लोगों को सचेत करने के साथ ही टीम को इलाके में लगाना चाहिए था।
मोहम्मदी-महेशपुर के जंगल में पिछले महीनों से बाघ की दहशत है। रविवार को जिस स्थान पर घटना हुई उससे महज तीन किलोमीटर की दूरी पर 21 अक्तूबर को बाघ के हमले से अशर्फीगंज निवासी 22 वर्षीय युवक लालाराम की मौत हो गई थी। पुलिस ने उस समय बाघ की मॉनीटरिंग शुरू की थी। साथ ही डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने कैमरे लगवाए थे। इन कैमरों में लगातार बाघ की तस्वीरें कैद हो रही थीं। इतना ही नहीं शुक्रवार को भी बिहारीपुर फार्म के दक्षिण क्षेत्र में कैमरे में बाघ और तेंदुए की तस्वीर कैद हुई तो वन कर्मी आए थे। उन्होंने बाघ के ताजा पगमार्क होने की भी बात भी कही थी। बिहारीपुर निवासी राजपाल सिंह, इंद्रजीत सिंह, हरविंदर सिंह और गोरेन्द्र सिंह का कहना है कि पगमार्क मिलने के बाद भी वन विभाग ने न तो इलाके में डुग्गी पिटवाई और न ही ग्रामीणों को अलर्ट करने के लिए वन कर्मियों को तैनात किया। यदि वन कर्मी लोगों को सचेत कर रहे होते तो शायद महेशपुर गांव का प्रकाश खेतों की ओर अकेले न जाता, जिससे उसकी जान बच सकती थी।
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लाल झंडी और पोस्टर लगवाकर पा ली थी छुट्टी
एक महीने पहले लालाराम की मौत के बाद वन विभाग ने बाघ की लोकेशन वाले क्षेत्र में लाल झंडियां लगवाई थीं और अलर्ट करने के लिए पोस्टर भी चस्पा किए थे। कुछ दिन तो वन कर्मी नियुक्त भी किए गए, लेकिन फिर गांव वालों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान बाघ खेतों में ही रहा, लेकिन वन अधिकारी लाल झंडी और पोस्टर लगवाकर छुट्टी पा गए।
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लगातार हो रही थी मॉनीटरिंग
बाघ की लगातार मॉनीटरिंग हो रही थी। ग्रामीणों को अलर्ट भी किया गया था कि वह खेतों की ओर अकेले न जाएं। समूह बनाकर ही खेतों की तरफ जाएं। बाघ के जिधर पग मार्क मिल रहे थे, उधर लाल झंडियां भी लगाई गईं थीं।
- एसएन यादव, रेंजर, मोहम्म्दी महेशपुर रेंज