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कटरुआ, धरती फूल का लालच डाल रहा खतरे में
Updated Fri, 21 Sep 2018 05:56 PM IST
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कटरुआ और धरती के फूल की लालच में खतरे में डाल रहे जान
पेट्रोलिंग के बावजूद जंगल में हो रही ग्रामीण की घुसपैठ
गन्ना की फसल तैयार होने के साथ बढ़ा बाघ के हमले का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। बरसात के मौसम में साल, सागौन के जंगल में निकलने वाला कटरुआ और धरती के फूलों के लालच में जंगल के आसपास रहने वाले लोग खुद को खतरे में डाल रहे हैं। कटरुआ और धरती के फूल बीनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगल में घुसपैठ कर रहे हैं। जहां यह धरती के फूल निकलते हैं वहीं बाघों का प्राकृतिक आवास भी है। जंगल में कटरुआ, धरती के फूल बीनते समय अक्सर लोग बाघ के हमलों का शिकार हो जाते हैं। इसके बावजूद लोग लालच नहीं छोड़ पा रहे हैं।
मोहम्मदी रेंज में बृहस्पतिवार दोपहर अपने साथियों के साथ धरती का फूल निकालने गए युवक पर बाघ ने हमला कर उसे घायल कर दिया। साथियों ने हिम्मत दिखाई और शोर मचाते हुए बाघ पर फावड़े से प्रहार किया तब जाकर युवक की जान बच सकी। अन्यथा वह बाघ का निवाला बन गया होता। इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके लोग कुछ रुपयों की लालच में यह खतरा उठाते हैं।
जंगल में बाघ और दूसरे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में खलल न पड़े इसके लिए जंगल में मवेशी चराने, जलौनी लकड़ी, घास फूस लेने, औषधीय वनस्पतियां, जड़ी बूटी लेने, कटरुआ और धरती फूल आदि बीनने पर प्रतिबंध है। इसके लिए वन विभाग जंगल की निगरानी भी करता है। कभी वन कर्मियों की मिली भगत से तो कभी चोरी छिपे लोग जंगल में घुसपैठ कर वन संपदा का दोहन करते रहते हैं। जंगल में घुसपैठ से जहां इंसानों के लिए खतरा होता है वहीं जंगली जानवर भी खतरे में पड़ते हैं।
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बरसात के मौसम में होता है लाखों का कारोबार
कटरुआ और धरती के फूल एक तरह का जंगली मशरूम होता है जो खाने में स्वादिष्ट तो होता ही है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन भी होता है। हिरनों के अलावा भालू इसे बड़े चाव से खाते हैं। बारिश के दिनों में सब्जी के तौर पर इसका लाखों रुपये का कारोबार होता है। बड़े सब्जी व्यापारी जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को कटरुआ और धरती के फूल बीनने के लिए लगा देते हैं। उनसे सस्ते दाम पर खरीदकर बड़े बाजारों में महंगे दामों पर बेचकर लाखों का मुनाफा कमाते हैं। शुरुआती दौर में तो यह एक हजार से 1200 रुपया प्रति किलो तक बिकता है बाद में 400 रुपया प्रतिकिलो तक बिकता है।
बेअसर हो रही मानसून पेट्रोलिंग
जंगल की सुरक्षा और जंगल में अवैध घुसपैठ के लिए बरसात के मौसम में विशेष मानसून पेट्रोलिंग होती है। इसके बावजूद जंगल से निकलकर बड़ी मात्रा में कटरुआ और धरती के फूल बाजार में पहुंच रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि मानसून पेट्रोलिंग फेल है और लोग जंगल में घुसकर जंगली मशरूम निकाल रहे हैं।
गन्ना की फसल तैयार होने से भी बाघों का खतरा बढ़ा
जंगल के आसपास खेतों में गन्ने की फसल करीब-करीब तैयार हो चुकी है। यह गन्ने के खेत बाघों के लिए कॉरीडोर का काम करते हैं। बाघ जंगल से निकलकर इन्हीं खेतों से होते हुए आबादी तक आ जाते हैं। गन्ने की फसल तैयार होने के साथ ही बाघों के हमलों का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।
वर्न.......
जंगल में कटरुआ और धरती के फूल बीनने पर ही नहीं बल्कि जंगल के अंदर जाने या मवेशी आदि चराने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। जंगल में घुसपैठ से उनकी खुद की जिंदगी खतरे में पड़ती है। लोगों को जंगल के अंदर न जाने को ताकीद किया जा रहा है। जंगल से सटे इलाके में रहने वाले लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार पटेल, डीएफओ, खीरी।
पेट्रोलिंग के बावजूद जंगल में हो रही ग्रामीण की घुसपैठ
गन्ना की फसल तैयार होने के साथ बढ़ा बाघ के हमले का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। बरसात के मौसम में साल, सागौन के जंगल में निकलने वाला कटरुआ और धरती के फूलों के लालच में जंगल के आसपास रहने वाले लोग खुद को खतरे में डाल रहे हैं। कटरुआ और धरती के फूल बीनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगल में घुसपैठ कर रहे हैं। जहां यह धरती के फूल निकलते हैं वहीं बाघों का प्राकृतिक आवास भी है। जंगल में कटरुआ, धरती के फूल बीनते समय अक्सर लोग बाघ के हमलों का शिकार हो जाते हैं। इसके बावजूद लोग लालच नहीं छोड़ पा रहे हैं।
मोहम्मदी रेंज में बृहस्पतिवार दोपहर अपने साथियों के साथ धरती का फूल निकालने गए युवक पर बाघ ने हमला कर उसे घायल कर दिया। साथियों ने हिम्मत दिखाई और शोर मचाते हुए बाघ पर फावड़े से प्रहार किया तब जाकर युवक की जान बच सकी। अन्यथा वह बाघ का निवाला बन गया होता। इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके लोग कुछ रुपयों की लालच में यह खतरा उठाते हैं।
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जंगल में बाघ और दूसरे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में खलल न पड़े इसके लिए जंगल में मवेशी चराने, जलौनी लकड़ी, घास फूस लेने, औषधीय वनस्पतियां, जड़ी बूटी लेने, कटरुआ और धरती फूल आदि बीनने पर प्रतिबंध है। इसके लिए वन विभाग जंगल की निगरानी भी करता है। कभी वन कर्मियों की मिली भगत से तो कभी चोरी छिपे लोग जंगल में घुसपैठ कर वन संपदा का दोहन करते रहते हैं। जंगल में घुसपैठ से जहां इंसानों के लिए खतरा होता है वहीं जंगली जानवर भी खतरे में पड़ते हैं।
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बरसात के मौसम में होता है लाखों का कारोबार
कटरुआ और धरती के फूल एक तरह का जंगली मशरूम होता है जो खाने में स्वादिष्ट तो होता ही है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन भी होता है। हिरनों के अलावा भालू इसे बड़े चाव से खाते हैं। बारिश के दिनों में सब्जी के तौर पर इसका लाखों रुपये का कारोबार होता है। बड़े सब्जी व्यापारी जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को कटरुआ और धरती के फूल बीनने के लिए लगा देते हैं। उनसे सस्ते दाम पर खरीदकर बड़े बाजारों में महंगे दामों पर बेचकर लाखों का मुनाफा कमाते हैं। शुरुआती दौर में तो यह एक हजार से 1200 रुपया प्रति किलो तक बिकता है बाद में 400 रुपया प्रतिकिलो तक बिकता है।
बेअसर हो रही मानसून पेट्रोलिंग
जंगल की सुरक्षा और जंगल में अवैध घुसपैठ के लिए बरसात के मौसम में विशेष मानसून पेट्रोलिंग होती है। इसके बावजूद जंगल से निकलकर बड़ी मात्रा में कटरुआ और धरती के फूल बाजार में पहुंच रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि मानसून पेट्रोलिंग फेल है और लोग जंगल में घुसकर जंगली मशरूम निकाल रहे हैं।
गन्ना की फसल तैयार होने से भी बाघों का खतरा बढ़ा
जंगल के आसपास खेतों में गन्ने की फसल करीब-करीब तैयार हो चुकी है। यह गन्ने के खेत बाघों के लिए कॉरीडोर का काम करते हैं। बाघ जंगल से निकलकर इन्हीं खेतों से होते हुए आबादी तक आ जाते हैं। गन्ने की फसल तैयार होने के साथ ही बाघों के हमलों का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।
वर्न.......
जंगल में कटरुआ और धरती के फूल बीनने पर ही नहीं बल्कि जंगल के अंदर जाने या मवेशी आदि चराने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। जंगल में घुसपैठ से उनकी खुद की जिंदगी खतरे में पड़ती है। लोगों को जंगल के अंदर न जाने को ताकीद किया जा रहा है। जंगल से सटे इलाके में रहने वाले लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार पटेल, डीएफओ, खीरी।