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अबकी हमने ठान लिया है, पहले गर्दन काटेंगे
Updated Mon, 09 Apr 2018 08:39 PM IST
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फोटो-09एलकेएच 202,203,204,205,206,207,208,209 और 214
‘आंखें नहीं दिखाना सिंहों की संतानों को’
छोटी काशी का ऐतिहासिक चैती मेला
सांस्कृतिक मंच पर हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के ऐतिहासिक चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में अंतप्रांतीय कवियों ने शृंगार, ओज, वीर रस बिखेरते हुए काव्यपाठ कर श्रोताओं को देर रात तक रोके रखा।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की शुरुआत भाजपा नगराध्यक्ष दीपेन्द्र गुप्ता की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि भाजपा जिला कोषाध्यक्ष विजय माहेश्वरी, पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल, ईओ आरआर अंबेश ने दीप प्रज्वलित कर और मां सरस्वती का पूजन कर किया।
मथुरा से पधारे श्यामसुंदर अकिंचन ने कुछ यूं कहा, चोट दर चोट सहता है ये घायल का मुकद्दर है, लिपटकर पांव से बजती ये पायल का मुकद्दर है। अकिंचन दीद को कोई उमर सारी तरसता है, नैन में चैन से सोता ये काजल का मुकद्दर है।
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राजस्थान के विनीत चौहान अलवर ने कहा, दस के बदले बीस लाख देता हूं तुम किस्मत के हैठों को, हिम्मत है तो लड़ने भेजें मंत्री जी अपने बेटों को। संचालन करते हुए मध्यप्रदेश के शशिकांत यादव ने वीर रस बिखेरा, आंखें नहीं दिखाना सिंहों की संतानों को, जान हथेली पे ले चलते ऐसे देश दिवानों को। अबकी कोई भ्रम न पाले भारत मां को बांटेंगे, अबकी हमने ठान लिया है पहले गर्दन काटेंगे।
जयपुर राजस्थान के अब्दुल गफ्फार ने सुनाया कि पूरी संसद साथ खड़ी कर एक नया ऐलान करो, गो माता को राष्ट्र मां का दर्जा दे सम्मान करो। कानपुर के हेमंत पांडे ने हास्य रस बिखेरा, जब पंद्रह लाख एकाउंट में आ ही गए हैं, बुलेट ट्रेन से दोनों नैनीताल चलेंगे।
इलाहाबाद के अखिलेश द्विवेदी ने कहा कि जिसने विवाह करके अपनी पत्नी छोड़ दी, वो अपने देश में प्रधानमंत्री बने। आगरा की डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने शृंगार रस के गीत सुनाए - ठिठुरन हो या कड़ी धूप हो छांव की चिंता मत करना, लगे युद्ध में चोट अगर तो घाव की चिंता मत करना। पुणे के शरदेन्दु शुक्ल ने कहा कि खूब उड़ाने के लिए पैसा लक्ष्मी को मनाना चाहता हूं, आजीवन खर्च करने के लिए यमराज पटाना चाहता हूं। संचालन डॉ. वेदप्रकाश अग्निहोत्री ने किया ने किया। इस मौके पर व्यापार मंडल अध्यक्ष कैलाशचंद गुप्त, बालकृष्ण बल्लू, नानकचंद वर्मा, अनीस अहमद खां, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, राजेश बाजपेयी, निरेंद्र कुमार धाकड़े, श्रीशचंद्र त्रिपाठी, अमित श्रीवास्तव, गोपाल स्वरूप मिश्र, अजय कुमार वर्मा, मोहित गिरि, पंकज कुमार, अशोक कुमार, विशाल शुक्ला, अरविंद कुमार, मनोज राठौर, विशाल शुक्ला, रितेश कुमार, प्रेमप्रकाश पाठक, अतुल त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।
कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को किया मायूस
गोला गोकर्णनाथ। चैती मेले में होने वाले कवि सम्मेलन में प्रख्यात कवि गोपालदास नीरज, कुमार विश्वास, हरिओम पवार, विष्णु सक्सेना, सुनील जोगी, सर्वेश स्थाना आदि नामी गिरामी कवि पूर्व में आते रहे हैं। इसलिए कवि सम्मेलन को सुनने के लिए नगर ही नहीं कई किमी दूर काव्यप्रेमी प्रतिवर्ष आते हैं, इस बार सांस्कृतिक मंच पर संचालक शशिकांत यादव बार बार कहते रहे कि उनके पास कई ऐसे कवि हैं जो अंतप्रांतों में ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काव्यपाठ कर चुके हैं, यह सुन श्रोता रुके तो रहे लेकिन अंत तक कुछेक कवियों को छोड़कर किसी का ऐसा काव्यपाठ नही हुआ जो यादगार बन सके।
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फोटो-09एलकेएच 202,203,204,205,206,207,208,209 और 214
‘आंखें नहीं दिखाना सिंहों की संतानों को’
छोटी काशी का ऐतिहासिक चैती मेला
सांस्कृतिक मंच पर हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के ऐतिहासिक चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में अंतप्रांतीय कवियों ने शृंगार, ओज, वीर रस बिखेरते हुए काव्यपाठ कर श्रोताओं को देर रात तक रोके रखा।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की शुरुआत भाजपा नगराध्यक्ष दीपेन्द्र गुप्ता की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि भाजपा जिला कोषाध्यक्ष विजय माहेश्वरी, पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल, ईओ आरआर अंबेश ने दीप प्रज्वलित कर और मां सरस्वती का पूजन कर किया।
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मथुरा से पधारे श्यामसुंदर अकिंचन ने कुछ यूं कहा, चोट दर चोट सहता है ये घायल का मुकद्दर है, लिपटकर पांव से बजती ये पायल का मुकद्दर है। अकिंचन दीद को कोई उमर सारी तरसता है, नैन में चैन से सोता ये काजल का मुकद्दर है।
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राजस्थान के विनीत चौहान अलवर ने कहा, दस के बदले बीस लाख देता हूं तुम किस्मत के हैठों को, हिम्मत है तो लड़ने भेजें मंत्री जी अपने बेटों को। संचालन करते हुए मध्यप्रदेश के शशिकांत यादव ने वीर रस बिखेरा, आंखें नहीं दिखाना सिंहों की संतानों को, जान हथेली पे ले चलते ऐसे देश दिवानों को। अबकी कोई भ्रम न पाले भारत मां को बांटेंगे, अबकी हमने ठान लिया है पहले गर्दन काटेंगे।
जयपुर राजस्थान के अब्दुल गफ्फार ने सुनाया कि पूरी संसद साथ खड़ी कर एक नया ऐलान करो, गो माता को राष्ट्र मां का दर्जा दे सम्मान करो। कानपुर के हेमंत पांडे ने हास्य रस बिखेरा, जब पंद्रह लाख एकाउंट में आ ही गए हैं, बुलेट ट्रेन से दोनों नैनीताल चलेंगे।
इलाहाबाद के अखिलेश द्विवेदी ने कहा कि जिसने विवाह करके अपनी पत्नी छोड़ दी, वो अपने देश में प्रधानमंत्री बने। आगरा की डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने शृंगार रस के गीत सुनाए - ठिठुरन हो या कड़ी धूप हो छांव की चिंता मत करना, लगे युद्ध में चोट अगर तो घाव की चिंता मत करना। पुणे के शरदेन्दु शुक्ल ने कहा कि खूब उड़ाने के लिए पैसा लक्ष्मी को मनाना चाहता हूं, आजीवन खर्च करने के लिए यमराज पटाना चाहता हूं। संचालन डॉ. वेदप्रकाश अग्निहोत्री ने किया ने किया। इस मौके पर व्यापार मंडल अध्यक्ष कैलाशचंद गुप्त, बालकृष्ण बल्लू, नानकचंद वर्मा, अनीस अहमद खां, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, राजेश बाजपेयी, निरेंद्र कुमार धाकड़े, श्रीशचंद्र त्रिपाठी, अमित श्रीवास्तव, गोपाल स्वरूप मिश्र, अजय कुमार वर्मा, मोहित गिरि, पंकज कुमार, अशोक कुमार, विशाल शुक्ला, अरविंद कुमार, मनोज राठौर, विशाल शुक्ला, रितेश कुमार, प्रेमप्रकाश पाठक, अतुल त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।
कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को किया मायूस
गोला गोकर्णनाथ। चैती मेले में होने वाले कवि सम्मेलन में प्रख्यात कवि गोपालदास नीरज, कुमार विश्वास, हरिओम पवार, विष्णु सक्सेना, सुनील जोगी, सर्वेश स्थाना आदि नामी गिरामी कवि पूर्व में आते रहे हैं। इसलिए कवि सम्मेलन को सुनने के लिए नगर ही नहीं कई किमी दूर काव्यप्रेमी प्रतिवर्ष आते हैं, इस बार सांस्कृतिक मंच पर संचालक शशिकांत यादव बार बार कहते रहे कि उनके पास कई ऐसे कवि हैं जो अंतप्रांतों में ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काव्यपाठ कर चुके हैं, यह सुन श्रोता रुके तो रहे लेकिन अंत तक कुछेक कवियों को छोड़कर किसी का ऐसा काव्यपाठ नही हुआ जो यादगार बन सके।