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मागी नाव न केवट आना
Updated Wed, 27 Sep 2017 10:33 PM IST
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27एलकेएचपी 25
फोटो-27जीएलएपी 6
जो पार कराए भव सागर, केवट पार कराई उन्हें नदी
रामलीला में सेठघाट पर हुआ नौका लीला का मंचन
गोला के गोकर्ण तीर्थ पर श्रीरामलीला महोत्सव में हुआ कई लीलाओं का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
शहर की ऐतिहासिक रामलीला के सातवें दिन बुधवार को नौका लीला का मंचन किया गया। सेठघाट पर हुई इस लीला में वन जा रहे राम, लक्ष्मण और सीता को यह कहकर केवट अपनी नाव पर बिठाने से मना कर देता है कि ‘छुवत शिला भै नारि सुहाई, पाहन ते न काठ कठिनाई’। कहा जब आप के चरण रज के स्पर्श से शिला एक सुंदर नारी बन गई तो मेरी काठ की नाव की क्या बिसात, नाव गई तो वह जीविका कैसे चलाएगा। वहीं गोला के गोकर्ण तीर्थ पर श्रीरामलीला महोत्सव के श्रीराम केवट संवाद के प्रदर्शन में व्यास सूरजपाल ने वाद्य यंत्रों पर श्रीरामचरित मानस की चौपाई ‘मागी नाव न केवट आना, कहइ तुम्हार मरमु मय जाना। गाई।
केवट राम के सामने शर्त रखता है कि वह उन्हें उसी दशा में नाव पर बिठाएगा जब वे उसे चरण पखारने की अनुमति दें। भगवान राम केवट की भावना और चतुराई को समझ जाते हैं। राम मंद मंद मुस्काते हुए केवट को चरण पखारने की अनुमति दे देते हैं। जो सारे संसार के लोगों को भव सागर पार उतारता है, उसे अपनी नाव से नदी को पार कराकर धन्य हो जाता है।
राम लक्ष्मण और सीता के चरण पखारने के बाद केवट स्वयं और अपने परिवार को चरणामृत पिलाकर अपने लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर लेता है। राम, लक्ष्मण और सीता को अपनी नाव से नदी पार कराने के बाद भी उसे संतोष नहीं मिलता। राम जब उसे उतराई के रूप में मुद्रिका देने लगते हैं तो केवट बड़ी चतुराई से उसे लेने से मना कर देता है। कहता है वापसी में आते समय आप जो देंगे उसे मैं शिरोधार्य करूंगा। इस तरह भगवान राम के दोबारा दर्शन का मार्ग प्रशस्त कर लेता है। राम वन गमन की इस नौका लीला में राम केवट का संवाद काफी प्रभावशाली रहा। सेठ घाट पर हुई इस लीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। सेठ गया प्रसाद ट्रस्ट के मुख्य सरवराकार विपुल सेठ और ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टी व्यवस्था में लगे रहे।
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गोला गोकर्णनाथ। केवट संवाद से पूर्व श्रवण कुमार के अंधे माता-पिता द्वारा राजा दशरथ को पुत्र वियोग के श्राप, कैकेई के हठ के आगे श्रीराम वन गमन, पुत्र वियोग में राजा दशरथ का परलोक गमन, निषादराज गुह से मित्रता का मंचन देख दर्शक श्रीराम के चरित्र में लीन हो गए। मंचन में राकेश ने श्रीराम का, गंगाश्याम ने लक्ष्मण का, ओमप्रकाश ने सीता का, कन्हैयालाल ने निषादराज गुह का रूप धरा। केवट के रूप से सजे रणधीर की संवाद अदायगी ने लोगों को आकर्षित किया वहीं कमेडियन रोल में भरतलाल शास्त्री ने लोगों को खूब गुदगुदाया। इस मौके पर समिति के जनार्दन गिरि, रामचंद्र रस्तोगी, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, रामरक्षपाल राजपूत आदि मौजूद रहे।
फोटो 27एमडीआईपी 4,5
बैंडबाजों के साथ निकली रामबारात
मोहम्मदी। नगर में आयोजित ऐतिहासिक श्रीरामलीला मेले में मंगलवार रात को राम बारात बैंडबाजों के साथ निकाली गई, जिसमें हाथी, ऊंट सहित कई मनमोहक झांकियां देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
नगर के रामलीला मेले से चली रामबारात में राधा-कृष्ण की भेषभूषा में आयोजित नृत्य और राजस्थानी झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं कई लोगों ने मुंह से आग की लपटें निकालकर हैरतअंगेज करतब दिखाए। श्रीरामचंद्र की बारात में सीता-राम और लक्ष्मण की झांकी के अलावा गणेशजी, शंकरजी, लवकुश, पुष्प वाटिका सहित कई मनमोहक झांकियों ने लोगों का मनमोहा। बारात में आगे चल रहे हाथी को नगर वासियों ने कई जगह केले खिलाए। रामलीला मेले से शुरू होकर बारात बरवर चौराहा, बाजारगंज, बाजार खुर्द, शुक्लापुर, नत्थू तिराहा होते हुए अस्तल मंदिर पहुंची जहां मंदिर के पुजारी उर्मिलेश मिश्र ने सीता-राम विवाह कार्यक्रम संपन्न कराया। बारात की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल मौजूद रहा। इस दौरान पालिका ईओ रविशंकर शुक्ला, पूर्व पालिकाध्यक्ष संदीप मेहरोत्रा, केएल कुशवाहा, गोविन्द गुप्ता, शिवम राठौर आदि लोग शामिल हुए।
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फोटो-27जीएलएपी 6
जो पार कराए भव सागर, केवट पार कराई उन्हें नदी
रामलीला में सेठघाट पर हुआ नौका लीला का मंचन
गोला के गोकर्ण तीर्थ पर श्रीरामलीला महोत्सव में हुआ कई लीलाओं का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
शहर की ऐतिहासिक रामलीला के सातवें दिन बुधवार को नौका लीला का मंचन किया गया। सेठघाट पर हुई इस लीला में वन जा रहे राम, लक्ष्मण और सीता को यह कहकर केवट अपनी नाव पर बिठाने से मना कर देता है कि ‘छुवत शिला भै नारि सुहाई, पाहन ते न काठ कठिनाई’। कहा जब आप के चरण रज के स्पर्श से शिला एक सुंदर नारी बन गई तो मेरी काठ की नाव की क्या बिसात, नाव गई तो वह जीविका कैसे चलाएगा। वहीं गोला के गोकर्ण तीर्थ पर श्रीरामलीला महोत्सव के श्रीराम केवट संवाद के प्रदर्शन में व्यास सूरजपाल ने वाद्य यंत्रों पर श्रीरामचरित मानस की चौपाई ‘मागी नाव न केवट आना, कहइ तुम्हार मरमु मय जाना। गाई।
केवट राम के सामने शर्त रखता है कि वह उन्हें उसी दशा में नाव पर बिठाएगा जब वे उसे चरण पखारने की अनुमति दें। भगवान राम केवट की भावना और चतुराई को समझ जाते हैं। राम मंद मंद मुस्काते हुए केवट को चरण पखारने की अनुमति दे देते हैं। जो सारे संसार के लोगों को भव सागर पार उतारता है, उसे अपनी नाव से नदी को पार कराकर धन्य हो जाता है।
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राम लक्ष्मण और सीता के चरण पखारने के बाद केवट स्वयं और अपने परिवार को चरणामृत पिलाकर अपने लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर लेता है। राम, लक्ष्मण और सीता को अपनी नाव से नदी पार कराने के बाद भी उसे संतोष नहीं मिलता। राम जब उसे उतराई के रूप में मुद्रिका देने लगते हैं तो केवट बड़ी चतुराई से उसे लेने से मना कर देता है। कहता है वापसी में आते समय आप जो देंगे उसे मैं शिरोधार्य करूंगा। इस तरह भगवान राम के दोबारा दर्शन का मार्ग प्रशस्त कर लेता है। राम वन गमन की इस नौका लीला में राम केवट का संवाद काफी प्रभावशाली रहा। सेठ घाट पर हुई इस लीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। सेठ गया प्रसाद ट्रस्ट के मुख्य सरवराकार विपुल सेठ और ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टी व्यवस्था में लगे रहे।
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गोला गोकर्णनाथ। केवट संवाद से पूर्व श्रवण कुमार के अंधे माता-पिता द्वारा राजा दशरथ को पुत्र वियोग के श्राप, कैकेई के हठ के आगे श्रीराम वन गमन, पुत्र वियोग में राजा दशरथ का परलोक गमन, निषादराज गुह से मित्रता का मंचन देख दर्शक श्रीराम के चरित्र में लीन हो गए। मंचन में राकेश ने श्रीराम का, गंगाश्याम ने लक्ष्मण का, ओमप्रकाश ने सीता का, कन्हैयालाल ने निषादराज गुह का रूप धरा। केवट के रूप से सजे रणधीर की संवाद अदायगी ने लोगों को आकर्षित किया वहीं कमेडियन रोल में भरतलाल शास्त्री ने लोगों को खूब गुदगुदाया। इस मौके पर समिति के जनार्दन गिरि, रामचंद्र रस्तोगी, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, रामरक्षपाल राजपूत आदि मौजूद रहे।
फोटो 27एमडीआईपी 4,5
बैंडबाजों के साथ निकली रामबारात
मोहम्मदी। नगर में आयोजित ऐतिहासिक श्रीरामलीला मेले में मंगलवार रात को राम बारात बैंडबाजों के साथ निकाली गई, जिसमें हाथी, ऊंट सहित कई मनमोहक झांकियां देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
नगर के रामलीला मेले से चली रामबारात में राधा-कृष्ण की भेषभूषा में आयोजित नृत्य और राजस्थानी झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं कई लोगों ने मुंह से आग की लपटें निकालकर हैरतअंगेज करतब दिखाए। श्रीरामचंद्र की बारात में सीता-राम और लक्ष्मण की झांकी के अलावा गणेशजी, शंकरजी, लवकुश, पुष्प वाटिका सहित कई मनमोहक झांकियों ने लोगों का मनमोहा। बारात में आगे चल रहे हाथी को नगर वासियों ने कई जगह केले खिलाए। रामलीला मेले से शुरू होकर बारात बरवर चौराहा, बाजारगंज, बाजार खुर्द, शुक्लापुर, नत्थू तिराहा होते हुए अस्तल मंदिर पहुंची जहां मंदिर के पुजारी उर्मिलेश मिश्र ने सीता-राम विवाह कार्यक्रम संपन्न कराया। बारात की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल मौजूद रहा। इस दौरान पालिका ईओ रविशंकर शुक्ला, पूर्व पालिकाध्यक्ष संदीप मेहरोत्रा, केएल कुशवाहा, गोविन्द गुप्ता, शिवम राठौर आदि लोग शामिल हुए।