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गांव के विकास में रोड़ा बने आठ पंचायत सदस्य बर्खास्त
Updated Sat, 21 Jul 2018 11:05 PM IST
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गांव के विकास में रोड़ा बने आठ पंचायत सदस्य बर्खास्त
पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि का मामला
तीन सालों से कर रहे थे दबंगई, अनुसूचित जाति का है प्रधान
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जनपद के पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में पिछले तीन सालों में एक भी विकास कार्य नहीं कराया जा सका है, जिसमें पंचायत सदस्य ही दबंगई दिखाते हुए रोड़ा अटकाए थे। डीएम ने मामले की जांच कराई, तो आठ पंचायत सदस्य दोषी पाए गए हैं। इन पंचायत सदस्यों ने तीन सालों में एक भी बैठक में प्रतिभाग नहीं किया, जिससे कोरम के अभाव में कोई कार्ययोजना/प्रस्ताव पास नहीं हो सका। डीएम ने आठों पंचायत सदस्यों के खिलाफ पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95 (1) (छ) के तहत कार्रवाई करते हुए बर्खास्त (पदच्युत) कर दिया है।
डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में अनुसूचित जाति के सोनपाल प्रधान बने थे। वहीं 11 ग्राम पंचायत सदस्य भी चुने गए। प्रधान और सचिव ने ग्राम पंचायत की बैठक कराने के लिए तीन अक्तूबर 2016, 20 नवंबर 2016, एक दिसंबर 2016, 22 दिसंबर 2016 समेत 12 बार एजेंडा जारी किया गया। आरोप है कि आठ पंचायत सदस्यों राजपाल, भभूति, पूनम सिंह, रामवीर, राजेश, आलोक सिंह, बिंद्रा प्रसाद और नरेंद्र ने एकजुट होकर ग्राम प्रधान सोनपाल को 2015 में चुने जाने के बाद से गांव में विकास कार्य कराने ही नहीं दिया। एजेंडा जारी किए जाने के बावजूद यह आठों पंचायत सदस्य बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे गांव के विकास कार्य बाधित हुए और ग्रामीण सुविधाओं से वंचित रह गए। एडीओ पंचायत ने नौ नवंबर 2017 को विस्तृत रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को सौंपी, जिसके बाद डीएम ने पूरे मामले की जांच कराई। डीएम ने आठों दोषी पंचायत सदस्यों को पहले नोटिस देकर जवाब मांगा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
बाक्स=
कार्रवाई में देरी से बिगड़े हालात, पैसा बैंक में पड़ा
वर्ष 2015 में प्रधान निर्वाचित होने के बाद से अब तक एक भी विकास कार्य न करा पाने का मलाल तो रहेगा। वहीं सबसे बड़े सवाल जिला प्रशासन पर उठ गए हैं, जिसे कार्रवाई करने में तीन साल का लंबा समय लग गया, जबकि ग्राम पंचायत का कार्यकाल महज पांच साल है। इतने समय तक जिला प्रशासन ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में बाधित विकास कार्यों को चालू नहीं करा सका, जिसके लिए ग्राम पंचायत अधिकारी से लेकर बीडीओ भी सवालों के घेरे में हैं। हालांकि प्रशासन ने इनके खिलाफ कोई जांच नहीं कराई है।
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बाक्स=वर्जन
ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में तीन सालों से एक भी विकास कार्य नहीं कराया गया है, जिससे सारा पैसा बैंक खाताें में पड़ा है। बाधा बने आठों पंचायत सदस्यों को बर्खास्त किए जाने के बाद अब उपचुनाव कराए जाएंगे।
- चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
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पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि का मामला
तीन सालों से कर रहे थे दबंगई, अनुसूचित जाति का है प्रधान
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। जनपद के पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में पिछले तीन सालों में एक भी विकास कार्य नहीं कराया जा सका है, जिसमें पंचायत सदस्य ही दबंगई दिखाते हुए रोड़ा अटकाए थे। डीएम ने मामले की जांच कराई, तो आठ पंचायत सदस्य दोषी पाए गए हैं। इन पंचायत सदस्यों ने तीन सालों में एक भी बैठक में प्रतिभाग नहीं किया, जिससे कोरम के अभाव में कोई कार्ययोजना/प्रस्ताव पास नहीं हो सका। डीएम ने आठों पंचायत सदस्यों के खिलाफ पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95 (1) (छ) के तहत कार्रवाई करते हुए बर्खास्त (पदच्युत) कर दिया है।
डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में अनुसूचित जाति के सोनपाल प्रधान बने थे। वहीं 11 ग्राम पंचायत सदस्य भी चुने गए। प्रधान और सचिव ने ग्राम पंचायत की बैठक कराने के लिए तीन अक्तूबर 2016, 20 नवंबर 2016, एक दिसंबर 2016, 22 दिसंबर 2016 समेत 12 बार एजेंडा जारी किया गया। आरोप है कि आठ पंचायत सदस्यों राजपाल, भभूति, पूनम सिंह, रामवीर, राजेश, आलोक सिंह, बिंद्रा प्रसाद और नरेंद्र ने एकजुट होकर ग्राम प्रधान सोनपाल को 2015 में चुने जाने के बाद से गांव में विकास कार्य कराने ही नहीं दिया। एजेंडा जारी किए जाने के बावजूद यह आठों पंचायत सदस्य बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे गांव के विकास कार्य बाधित हुए और ग्रामीण सुविधाओं से वंचित रह गए। एडीओ पंचायत ने नौ नवंबर 2017 को विस्तृत रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को सौंपी, जिसके बाद डीएम ने पूरे मामले की जांच कराई। डीएम ने आठों दोषी पंचायत सदस्यों को पहले नोटिस देकर जवाब मांगा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
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कार्रवाई में देरी से बिगड़े हालात, पैसा बैंक में पड़ा
वर्ष 2015 में प्रधान निर्वाचित होने के बाद से अब तक एक भी विकास कार्य न करा पाने का मलाल तो रहेगा। वहीं सबसे बड़े सवाल जिला प्रशासन पर उठ गए हैं, जिसे कार्रवाई करने में तीन साल का लंबा समय लग गया, जबकि ग्राम पंचायत का कार्यकाल महज पांच साल है। इतने समय तक जिला प्रशासन ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में बाधित विकास कार्यों को चालू नहीं करा सका, जिसके लिए ग्राम पंचायत अधिकारी से लेकर बीडीओ भी सवालों के घेरे में हैं। हालांकि प्रशासन ने इनके खिलाफ कोई जांच नहीं कराई है।
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ग्राम पंचायत मुड़िया चूड़ामणि में तीन सालों से एक भी विकास कार्य नहीं कराया गया है, जिससे सारा पैसा बैंक खाताें में पड़ा है। बाधा बने आठों पंचायत सदस्यों को बर्खास्त किए जाने के बाद अब उपचुनाव कराए जाएंगे।
- चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ