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जिला अस्पताल की ओपीडी 1500 के पार
Updated Fri, 08 Sep 2017 11:39 PM IST
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जिला अस्पताल की ओपीडी 1500 के पार
- फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी।
बारिश के बाद निकल रही तेज धूप से उमस भरी गर्मी हो रही है, जिससे उल्टी, दस्त व त्वचा रोग के मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। अभी तक जिला अस्पताल में जहां रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या हजार से बारह सौ तक ही रहती थी। वहीं शुक्रवार को इनकी संख्या 15 सौ का आंकड़ा पार कर गई। मरीजों के बढ़ने से पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कमरों के आगे मरीजों की लंबी लंबी लाइनें लगी रहीं।
उमस भरी गर्मी के चलते त्वचा रोग, बुखार व उल्टी दस्त के मरीजों में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। मरीजों की संख्या बढ़ने से पर्चा काउंटर से लेकर हर डॉक्टर कक्ष के आगे मरीजों की भीड़ सुबह आठ बजे से ही इकठ्ठा हो जाती है। अभी तक जहां त्वचा रोग की ओपीडी रोजाना पचास से साठ होती थी, उमस बढ़ने के बाद यह संख्या शुक्रवार को बढ़कर दो सौ तक पहुंच गई। इसमें महिलाओं व बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। गर्मी के कारण डायरिया, बुखार, उल्टी आदि पीड़ित बच्चों एवं बुजुर्गों की संख्या में भी बढ़ी है।
बारिश में शरीर की साफ सफाई का रखे ख्याल
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह ने बताया कि उमस वाली गर्मी से खुजली आदि के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस समय फंगल इंफेक्शन के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गंदगी और त्वचा की साफ सफाई में लापरवाही करने पर फंगल इंफेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए बारिश के पानी में भीगने से बचना चाहिए। साथ ही शरीर की साफ सफाई का भी ख्याल रखना चाहिए। बारिश में भीगने के बाद साफ पानी से जरूर नहाएं और गीले कपड़े पहनने से बचें।
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कटे रखे फल, तली भुनी चीजें बच्चों को न दें
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि बारिश के मौसम में खान पान और साफ सफाई पर ध्यान न देने से बच्चों में डायरिया, बुखार, सर्दी होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि पहले जहां पीड़ित बच्चों की संख्या सौ तक सीमित रहती थी। उमस भरी गर्मी के कारण अब डेढ़ सौ तक पहुंच गई हैं। उनका कहना है कि इस मौसम में स्वच्छता पर विशेष घ्यान दें और खुले में बिक रहे कटे रखे फल व अन्य तली भुनी चीजें बच्चों को न खिलाएं।
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बारिश के बाद निकल रही तेज धूप से उमस भरी गर्मी हो रही है, जिससे उल्टी, दस्त व त्वचा रोग के मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। अभी तक जिला अस्पताल में जहां रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या हजार से बारह सौ तक ही रहती थी। वहीं शुक्रवार को इनकी संख्या 15 सौ का आंकड़ा पार कर गई। मरीजों के बढ़ने से पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कमरों के आगे मरीजों की लंबी लंबी लाइनें लगी रहीं।
उमस भरी गर्मी के चलते त्वचा रोग, बुखार व उल्टी दस्त के मरीजों में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। मरीजों की संख्या बढ़ने से पर्चा काउंटर से लेकर हर डॉक्टर कक्ष के आगे मरीजों की भीड़ सुबह आठ बजे से ही इकठ्ठा हो जाती है। अभी तक जहां त्वचा रोग की ओपीडी रोजाना पचास से साठ होती थी, उमस बढ़ने के बाद यह संख्या शुक्रवार को बढ़कर दो सौ तक पहुंच गई। इसमें महिलाओं व बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। गर्मी के कारण डायरिया, बुखार, उल्टी आदि पीड़ित बच्चों एवं बुजुर्गों की संख्या में भी बढ़ी है।
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बारिश में शरीर की साफ सफाई का रखे ख्याल
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह ने बताया कि उमस वाली गर्मी से खुजली आदि के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस समय फंगल इंफेक्शन के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गंदगी और त्वचा की साफ सफाई में लापरवाही करने पर फंगल इंफेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए बारिश के पानी में भीगने से बचना चाहिए। साथ ही शरीर की साफ सफाई का भी ख्याल रखना चाहिए। बारिश में भीगने के बाद साफ पानी से जरूर नहाएं और गीले कपड़े पहनने से बचें।
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कटे रखे फल, तली भुनी चीजें बच्चों को न दें
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि बारिश के मौसम में खान पान और साफ सफाई पर ध्यान न देने से बच्चों में डायरिया, बुखार, सर्दी होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि पहले जहां पीड़ित बच्चों की संख्या सौ तक सीमित रहती थी। उमस भरी गर्मी के कारण अब डेढ़ सौ तक पहुंच गई हैं। उनका कहना है कि इस मौसम में स्वच्छता पर विशेष घ्यान दें और खुले में बिक रहे कटे रखे फल व अन्य तली भुनी चीजें बच्चों को न खिलाएं।