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शैक्षिक भ्रमण भी होगा स्नातक हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल
Updated Sat, 21 Jul 2018 11:05 PM IST
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शैक्षिक भ्रमण भी स्नातक हिंदी पाठ्यक्रम में होगा शामिल
अध्यापन पद्धति में होगा नई तकनीक का इस्तेमाल
सोशल मीडिया और संवाद के नवाचार भी पढ़ेंगे विद्यार्थी
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की स्नातक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में लाए जा रहे बदलाव में सोशल मीडिया और शैक्षिक भ्रमण को भी शामिल किया जा रहा है। हिंदी के विद्यार्थी साहित्यकारों की जन्मस्थली और कर्मस्थली का भ्रमण कर उनकी रचनाओं के स्त्रोत का अध्ययन करेंगे। अध्यापन पद्धति में भी बदलाव लाने की तैयारी है। परंपरागत अध्यापन प्रणाली के अलावा दृश्य-श्रव्य माध्यम से ग्रुप डिस्कसन, विभिन्न कार्यालयों में जाकर राजभाषा की स्थिति और प्रयोग का भी विद्यार्थी अध्ययन करेंगे।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में परंपरागत अध्यापन प्रणाली के साथ अब आडियो-वीडियो के माध्यम से भी शिक्षण किया जाएगा। कार्यालयों में राजभाषा हिंदी की स्थिति, प्रयोग प्रणाली आदि के बारे में जानने के लिए विद्यार्थी विभिन्न कार्यालयों का भ्रमण कर उसका अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में शैक्षिक भ्रमण को भी शामिल किया जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थी साहित्यिक क्षेत्रों, साहित्यकारों की जन्मस्थली और कर्मस्थली का भी भ्रमण करेंगे। वहां की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों का अध्ययन कर साहित्यिक स्त्रोतों का आंकलन करेंगे।
बीए तृतीय वर्ष हिंदी भाषा के प्रथम प्रश्नपत्र में आधुनिक संचार माध्यमों में हिंदी के प्रयोग की स्थिति, मित कथन, विज्ञापन, बाजार, आकाशवाणी, समाचार वाचन आदि विधाओं से भी विद्यार्थी परिचित होेंगे। जनसंचार के अद्यतन माध्यम, सामूहिक संचार के नवाचार, फेसबुक, टेलीग्राम, व्हट्सएप, ब्लाग, ट्विटर आदि सोशल मीडिया में भाषागत अपडेशन, कंप्यूटर और इंटरनेट, ई-लेखन में हिंदी और देवनागरी कितना सक्षम है। इसका अध्ययन भी हिंदी के विद्यार्थी करेंगे।
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छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की हिंदी पाठ्यक्रम समिति की संयोजक और लखीमपुर खीरी के भगवानदीन इंटरकॉलेज की प्राचार्या डॉ. निरुपमा अशोक ने बताया कि विश्वविद्यालय हिंदी के पाठ्यक्रम को समय के अनुसार आधुनिक सांचे में ढालने जा रही है। इससे पाठ्यक्रम और अधिक व्यवहारिक बनेगा। अध्यापन की आधुनिक प्रणाली से शिक्षण अधिक रुचिकर बनेगा।
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अध्यापन पद्धति में होगा नई तकनीक का इस्तेमाल
सोशल मीडिया और संवाद के नवाचार भी पढ़ेंगे विद्यार्थी
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की स्नातक कक्षाओं के पाठ्यक्रम में लाए जा रहे बदलाव में सोशल मीडिया और शैक्षिक भ्रमण को भी शामिल किया जा रहा है। हिंदी के विद्यार्थी साहित्यकारों की जन्मस्थली और कर्मस्थली का भ्रमण कर उनकी रचनाओं के स्त्रोत का अध्ययन करेंगे। अध्यापन पद्धति में भी बदलाव लाने की तैयारी है। परंपरागत अध्यापन प्रणाली के अलावा दृश्य-श्रव्य माध्यम से ग्रुप डिस्कसन, विभिन्न कार्यालयों में जाकर राजभाषा की स्थिति और प्रयोग का भी विद्यार्थी अध्ययन करेंगे।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में परंपरागत अध्यापन प्रणाली के साथ अब आडियो-वीडियो के माध्यम से भी शिक्षण किया जाएगा। कार्यालयों में राजभाषा हिंदी की स्थिति, प्रयोग प्रणाली आदि के बारे में जानने के लिए विद्यार्थी विभिन्न कार्यालयों का भ्रमण कर उसका अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में शैक्षिक भ्रमण को भी शामिल किया जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थी साहित्यिक क्षेत्रों, साहित्यकारों की जन्मस्थली और कर्मस्थली का भी भ्रमण करेंगे। वहां की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों का अध्ययन कर साहित्यिक स्त्रोतों का आंकलन करेंगे।
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बीए तृतीय वर्ष हिंदी भाषा के प्रथम प्रश्नपत्र में आधुनिक संचार माध्यमों में हिंदी के प्रयोग की स्थिति, मित कथन, विज्ञापन, बाजार, आकाशवाणी, समाचार वाचन आदि विधाओं से भी विद्यार्थी परिचित होेंगे। जनसंचार के अद्यतन माध्यम, सामूहिक संचार के नवाचार, फेसबुक, टेलीग्राम, व्हट्सएप, ब्लाग, ट्विटर आदि सोशल मीडिया में भाषागत अपडेशन, कंप्यूटर और इंटरनेट, ई-लेखन में हिंदी और देवनागरी कितना सक्षम है। इसका अध्ययन भी हिंदी के विद्यार्थी करेंगे।
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छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर की हिंदी पाठ्यक्रम समिति की संयोजक और लखीमपुर खीरी के भगवानदीन इंटरकॉलेज की प्राचार्या डॉ. निरुपमा अशोक ने बताया कि विश्वविद्यालय हिंदी के पाठ्यक्रम को समय के अनुसार आधुनिक सांचे में ढालने जा रही है। इससे पाठ्यक्रम और अधिक व्यवहारिक बनेगा। अध्यापन की आधुनिक प्रणाली से शिक्षण अधिक रुचिकर बनेगा।