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थारू समुदाय के लोगों की एसडीएम से हुई नोंकझोंक, सौंपा ज्ञापन
Updated Tue, 01 May 2018 07:00 PM IST
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थारू समुदाय के लोगों की एसडीएम से नोंकझोंक
वनाधिकार कानून के तहत जलौनी लकड़ी और घासफूस की कर रहे हैं मांग
अमर उजाला ब्यूरो
पलियाकलां। वनाधिकार कानून के तहत जंगल से जलौनी लकड़ी और घासफूस लाने की मांग कर रहे बड़ी संख्या में थारू समुदाय के महिला, पुरुष तहसील पहुंचे। यहां पर उन्होंने एसडीएम से पूर्व में की गई बैठकों के बारे में पूछा। जिसपर सही जवाब न मिल पाने पर उनकी एसडीएम से नोंकझोंक भी हुई। इसके बाद सभी ने एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है। जिसमें वन विभाग के शोषण की बात कही गई है।
अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के बैनर तले भारी संख्या में थारूओं की भीड़ तहसील पहुंची। यहां पर उन्होंने एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी से वार्ता करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई बैठकें की गईं लेकिन वनाधिकार कानून के ऊपर कोई हल नहीं निकला है। कहा गया कि जंगल में जलौनी लकड़ी व घासफूस लेने जाते हैं तो वन विभाग द्वारा थारूओं का शोषण किया जाता है। इसी को लेकर उनकी एसडीएम से नोंकझोंक भी हुई। इसके बाद उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें कहा गया है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते 12 वर्ष कानून बने हुए हो गए हैं लेकिन उसका थारू समुदाय के लोगों को लाभ नहीं मिला हैं। जलौनी लकड़ी और घासफूस लेने जब जंगल जाते हैं तो वन विभाग रोक लगाता है तथा मारपीट, जेल भेजने व जुर्माना की कार्रवाईयां करता है। मांग की गई है कि दावों को तत्काल प्रभाव से निस्तारित किया जाए। कहा गया है कि दो मई से जंगल में सभी लोग जलौनी लकड़ी लेने जाएंगे अगर वन विभाग अड़चनें व टकराव की स्थिति करेगा उसके लिए प्रशासन वहां पर पुलिस प्रशासन को तैनात करें जिससे थारू समुदाय के लोग कानून के विरुद्ध न जाकर आसानी से अपना काम कर सके। इस दौरान अनीता देवी, निबादा, रामचंद्र राणा, सदई, दिनेश, जवाहर, बाबूराम सहित भारी संख्या में थारू समुदाय के लोग मौजूद रहे।
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थारू समुदाय के लोगों की एसडीएम से नोंकझोंक
वनाधिकार कानून के तहत जलौनी लकड़ी और घासफूस की कर रहे हैं मांग
अमर उजाला ब्यूरो
पलियाकलां। वनाधिकार कानून के तहत जंगल से जलौनी लकड़ी और घासफूस लाने की मांग कर रहे बड़ी संख्या में थारू समुदाय के महिला, पुरुष तहसील पहुंचे। यहां पर उन्होंने एसडीएम से पूर्व में की गई बैठकों के बारे में पूछा। जिसपर सही जवाब न मिल पाने पर उनकी एसडीएम से नोंकझोंक भी हुई। इसके बाद सभी ने एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है। जिसमें वन विभाग के शोषण की बात कही गई है।
अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के बैनर तले भारी संख्या में थारूओं की भीड़ तहसील पहुंची। यहां पर उन्होंने एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी से वार्ता करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई बैठकें की गईं लेकिन वनाधिकार कानून के ऊपर कोई हल नहीं निकला है। कहा गया कि जंगल में जलौनी लकड़ी व घासफूस लेने जाते हैं तो वन विभाग द्वारा थारूओं का शोषण किया जाता है। इसी को लेकर उनकी एसडीएम से नोंकझोंक भी हुई। इसके बाद उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें कहा गया है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते 12 वर्ष कानून बने हुए हो गए हैं लेकिन उसका थारू समुदाय के लोगों को लाभ नहीं मिला हैं। जलौनी लकड़ी और घासफूस लेने जब जंगल जाते हैं तो वन विभाग रोक लगाता है तथा मारपीट, जेल भेजने व जुर्माना की कार्रवाईयां करता है। मांग की गई है कि दावों को तत्काल प्रभाव से निस्तारित किया जाए। कहा गया है कि दो मई से जंगल में सभी लोग जलौनी लकड़ी लेने जाएंगे अगर वन विभाग अड़चनें व टकराव की स्थिति करेगा उसके लिए प्रशासन वहां पर पुलिस प्रशासन को तैनात करें जिससे थारू समुदाय के लोग कानून के विरुद्ध न जाकर आसानी से अपना काम कर सके। इस दौरान अनीता देवी, निबादा, रामचंद्र राणा, सदई, दिनेश, जवाहर, बाबूराम सहित भारी संख्या में थारू समुदाय के लोग मौजूद रहे।
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