{"_id":"5a65fb374f1c1b6c268b5cf4","slug":"31516632887-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदुस्तान बना नौटंकी, कलाकार है पक्ष-विपक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदुस्तान बना नौटंकी, कलाकार है पक्ष-विपक्ष
Updated Mon, 22 Jan 2018 08:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लीड----
22एलकेएच 21
‘हिंदुस्तान बना नौटंकी, कलाकार है पक्ष-विपक्ष’
पं. बंशीधर शुक्ल की जयंती पर कवियों ने किया काव्य पाठ
अमर उजाला ब्यूरो
फरधान।
अवधी सम्राट पं. बंशीधर शुक्ल की जयंती उनके पैतृक गांव मन्यौरा में सोमवार को श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में प्रदेश भर से नामी गिरामी साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। कवियों ने काव्यपाठ कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि सीतापुर के पूर्व सांसद जनार्दन मिश्र ने मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अवधी सम्राट पं. बंशीधर शुक्ल की 113 वीं जयंती पर कवि सम्मेलन हुआ। कवि संजीव कुमार व्योम ने देश के सिस्टम पर चोट करते हुए पढ़ा हिंदुस्तान बना नौटंकी, कलाकार हैं पक्ष विपक्ष। सुल्तानपुर से आए कवि मथुरा प्रसाद जटायु ने लोकहित हेतु अर्पित तनमन प्राण, लक्षण थे फकीर के...पंक्तियों से बंशीधर शुक्ल के व्यक्तित्व की तस्वीर खींची। राजकिशोर पांडेय प्रहरी ने पढ़ा- गंवई भाषा में रचा विपुल, शुक्ल थे अवधी के साहित्य। ओंकारनाथ द्विवेदी ने कहा- वंशीधरजी शुक्ल हैं अवधी के सरताज।
युवा कवि ज्ञानेंद्र वत्सल ने पढ़ा- पीर पराई अपनी होते मन चंदन हो जाता है। अवनीश वर्मा ने- रहती आंखों का तारा हिंदी नदी की धारा। कवि रामप्यारे प्रजापति ने हे गांव कवि हे देश कवि पंक्तियां पढ़कर श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा पूरनपुर से आए कवि देवेंद्रनाथ देव, शत्रुघ्न वर्मा, सार्थक, पुनीत बाजपेई, शिवाकांत मिश्र, हैदरगढ़ से रामबहादुर मिश्र, दिल्ली से भारतेंदु मिश्र, श्याम अरोरा, बदायूं से आदित्य तोमर, रामकुमार गुप्त, उमाशंकर शुक्ल आदि कवियों ने काव्यपाठ कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
विज्ञापन
समारोह में अनंत गाथा, दक्षिण द्वार, मेरी फुलवारी, कविवर शंख काव्य पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। संचालन राजकुमार ने किया। इस मौके पर बंशीधर के पुत्र सत्यधर शुुक्ला, पौत्र गौरव शुक्ला सहित कई कवि और विद्वान मौजूद रहे।
इनका हुआ सम्मान
कार्यक्रम में कई कवियों और विद्वानों को सम्मानित किया गया। कवि भारतेंदु मिश्र, ओंकारनाथ द्विवेदी, रामप्यारे प्रजापति, अशोक पांडेय को अवधी वारिध सम्मान। कवियत्री सुरंगमा यादव, कैलाश चंद्र लोहानी, अनुज प्रताप सिंह को राष्ट्रकवि बंशीधर शुक्ल सम्मान। नीलिमा श्रीवास्तव को सती गजरानी देवी सम्मान, कुलदीप अंगार को राजकवि रामभरोसे लाल सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं, राजेंद्र कंटक को डा. ब्रजेंद्र अवस्थी सम्मान और अभीक्ष पाठक और मृत्युंजय गुप्त को सुनीत शुक्ला सम्मान से नवाजा गया।
विज्ञापन
22एलकेएच 21
‘हिंदुस्तान बना नौटंकी, कलाकार है पक्ष-विपक्ष’
पं. बंशीधर शुक्ल की जयंती पर कवियों ने किया काव्य पाठ
अमर उजाला ब्यूरो
फरधान।
अवधी सम्राट पं. बंशीधर शुक्ल की जयंती उनके पैतृक गांव मन्यौरा में सोमवार को श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में प्रदेश भर से नामी गिरामी साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। कवियों ने काव्यपाठ कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्य अतिथि सीतापुर के पूर्व सांसद जनार्दन मिश्र ने मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अवधी सम्राट पं. बंशीधर शुक्ल की 113 वीं जयंती पर कवि सम्मेलन हुआ। कवि संजीव कुमार व्योम ने देश के सिस्टम पर चोट करते हुए पढ़ा हिंदुस्तान बना नौटंकी, कलाकार हैं पक्ष विपक्ष। सुल्तानपुर से आए कवि मथुरा प्रसाद जटायु ने लोकहित हेतु अर्पित तनमन प्राण, लक्षण थे फकीर के...पंक्तियों से बंशीधर शुक्ल के व्यक्तित्व की तस्वीर खींची। राजकिशोर पांडेय प्रहरी ने पढ़ा- गंवई भाषा में रचा विपुल, शुक्ल थे अवधी के साहित्य। ओंकारनाथ द्विवेदी ने कहा- वंशीधरजी शुक्ल हैं अवधी के सरताज।
विज्ञापन
युवा कवि ज्ञानेंद्र वत्सल ने पढ़ा- पीर पराई अपनी होते मन चंदन हो जाता है। अवनीश वर्मा ने- रहती आंखों का तारा हिंदी नदी की धारा। कवि रामप्यारे प्रजापति ने हे गांव कवि हे देश कवि पंक्तियां पढ़कर श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा पूरनपुर से आए कवि देवेंद्रनाथ देव, शत्रुघ्न वर्मा, सार्थक, पुनीत बाजपेई, शिवाकांत मिश्र, हैदरगढ़ से रामबहादुर मिश्र, दिल्ली से भारतेंदु मिश्र, श्याम अरोरा, बदायूं से आदित्य तोमर, रामकुमार गुप्त, उमाशंकर शुक्ल आदि कवियों ने काव्यपाठ कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
विज्ञापन
समारोह में अनंत गाथा, दक्षिण द्वार, मेरी फुलवारी, कविवर शंख काव्य पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। संचालन राजकुमार ने किया। इस मौके पर बंशीधर के पुत्र सत्यधर शुुक्ला, पौत्र गौरव शुक्ला सहित कई कवि और विद्वान मौजूद रहे।
इनका हुआ सम्मान
कार्यक्रम में कई कवियों और विद्वानों को सम्मानित किया गया। कवि भारतेंदु मिश्र, ओंकारनाथ द्विवेदी, रामप्यारे प्रजापति, अशोक पांडेय को अवधी वारिध सम्मान। कवियत्री सुरंगमा यादव, कैलाश चंद्र लोहानी, अनुज प्रताप सिंह को राष्ट्रकवि बंशीधर शुक्ल सम्मान। नीलिमा श्रीवास्तव को सती गजरानी देवी सम्मान, कुलदीप अंगार को राजकवि रामभरोसे लाल सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं, राजेंद्र कंटक को डा. ब्रजेंद्र अवस्थी सम्मान और अभीक्ष पाठक और मृत्युंजय गुप्त को सुनीत शुक्ला सम्मान से नवाजा गया।