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Lakhimpur Kheri News: दुधवा में मिलीं दुर्लभ प्रजाति की 275 मोठ तितलियां
Tue, 05 Aug 2025 11:07 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 05 Aug 2025 11:07 PM IST
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दुधवा में दिखी दुर्लभ मोठ तितली। स्रोत : वन विभाग।
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के खजाने में एक और अनमोल रत्न उस समय शामिल हो गया, जब दुधवा पार्क और किशनपुर अभयारण्य में पहली बार मोठ फ्लाई नाम की 275 दुर्लभ तितलियां देखी गईं। हाल ही में यहां हुए एक सर्वेक्षण में टाइगर बीटल कीटों की 19 प्रजातियां मिली थीं।
दुधवा और किशनपुर अभयारण्य में मोठ तितली की खोज के लिए 25 जुलाई से एक अगस्त तक अभियान चलाया गया था। इसमें दुधवा के बायोलॉजिस्ट अपूर्वा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवी, आउटरीच प्रोग्रामर विपिन सैनी के अलावा वनाधिकारी और फील्ड कर्मी शामिल रहे। इनकी खोज के लिए दुधवा और किशनपुर अभयारण्य में अलग-अलग स्थानों पर 25 स्क्रीन लगाई गई थीं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन और डीडी दुधवा जगदीश आर ने बताया कि इन तस्वीरों को कीट विज्ञान प्रयोगशाला नई दिल्ली भेजा गया है, जहां इनकी प्रजाति की पहचान होगी।
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रात में होती हैं सक्रिय, पंखों का रंग होता है फीका
आमतौर पर मोठ तितली रात में सक्रिय होती है। उसके पंख रंग-बिरंगी तितली की तुलना में फीके होते हैं। यह रोशनी की ओर आकर्षित होती है। पेड़ों और झाड़ियों में वास करने वाली मोठ पत्तों के पीछे अंडे देती है। मोठ काले, भूरे और सफेद रंग की होती है। फूलों से निकलने वाला मीठा रस इनका मुख्य भोजन है। चमगादड़, मेढ़क और छिपकली इसे बड़े चाव से खाते हैं।
दुधवा के डीडी ने बताया कि देश में 10 हजार और विश्व में एक लाख प्रजातियों की मोठ तितलियां पाई जाती हैं। एफडी का कहना है कि दुधवा की समृद्ध जैव विविधता, हरे भरे और घने जंगल बाघ व तेंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि कीट-पतंगों के लिए भी अनुकूल हैं। कीट-पतंगों की मौजूदगी से दुधवा का पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से मजबूत हो रहा है।
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दुधवा और किशनपुर अभयारण्य में मोठ तितली की खोज के लिए 25 जुलाई से एक अगस्त तक अभियान चलाया गया था। इसमें दुधवा के बायोलॉजिस्ट अपूर्वा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवी, आउटरीच प्रोग्रामर विपिन सैनी के अलावा वनाधिकारी और फील्ड कर्मी शामिल रहे। इनकी खोज के लिए दुधवा और किशनपुर अभयारण्य में अलग-अलग स्थानों पर 25 स्क्रीन लगाई गई थीं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन और डीडी दुधवा जगदीश आर ने बताया कि इन तस्वीरों को कीट विज्ञान प्रयोगशाला नई दिल्ली भेजा गया है, जहां इनकी प्रजाति की पहचान होगी।
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रात में होती हैं सक्रिय, पंखों का रंग होता है फीका
आमतौर पर मोठ तितली रात में सक्रिय होती है। उसके पंख रंग-बिरंगी तितली की तुलना में फीके होते हैं। यह रोशनी की ओर आकर्षित होती है। पेड़ों और झाड़ियों में वास करने वाली मोठ पत्तों के पीछे अंडे देती है। मोठ काले, भूरे और सफेद रंग की होती है। फूलों से निकलने वाला मीठा रस इनका मुख्य भोजन है। चमगादड़, मेढ़क और छिपकली इसे बड़े चाव से खाते हैं।
दुधवा के डीडी ने बताया कि देश में 10 हजार और विश्व में एक लाख प्रजातियों की मोठ तितलियां पाई जाती हैं। एफडी का कहना है कि दुधवा की समृद्ध जैव विविधता, हरे भरे और घने जंगल बाघ व तेंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि कीट-पतंगों के लिए भी अनुकूल हैं। कीट-पतंगों की मौजूदगी से दुधवा का पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से मजबूत हो रहा है।

दुधवा में दिखी दुर्लभ मोठ तितली। स्रोत : वन विभाग।

दुधवा में दिखी दुर्लभ मोठ तितली। स्रोत : वन विभाग।

दुधवा में दिखी दुर्लभ मोठ तितली। स्रोत : वन विभाग।