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Lakhimpur Kheri News: 50 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले 250 स्कूल होंगे समायोजित
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संजीव त्रिपाठी
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लखीमपुर खीरी। शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने पर जोर है। अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। बावजूद इसके स्कूलों में उपस्थित नहीं बढ़ पा रही। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए शासन ने अब ऐसे विद्यालयों की सूची तलब की है जहां पर बच्चों की संख्या 50 से कम है। ऐसे 250 विद्यालय समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जिले में करीब 250 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें बच्चों की संख्या 50 से कम है। ऐसे विद्यालयों का अब पड़ोसी स्कूल में विलय कर दिया जाएगा। इसको लेकर महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी को एक पत्र जारी करते हुए विद्यालयों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सूची 14 नवंबर तक तैयार किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल, विलय अगले वित्तीय सत्र से किया जाना है। शासन की ओर से मिले निर्देश के बाद यह कार्य तेजी से किया जा रहा है।
आदेश में महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि वे 13 नवंबर या फिर 14 नवंबर को बैठक कर ऐसे स्कूलों को सूचीबद्ध करें और पास के किस स्कूल में इनका विलय करना ठीक रहेगा, इसकी रिपोर्ट दें। साथ ही यह भी ध्यान दें कि छात्रों को दूसरे स्कूल जाने के लिए कितनी दूरी तय करनी होगी। भवन व शिक्षकों की उपलब्धता और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था, नहर, नदी, नाला इत्यादि के बारे में पूरा प्रस्ताव तैयार करना होगा।
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50 से कम नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ी प्रक्रिया प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश हैं। इसे ध्यान में रखकर कार्ययोजना तैयार की जाए कि उस ग्राम पंचायत में मानक विद्यालय है या नहीं। किस विद्यालय को पास के अन्य विद्यालय में विलय किया जा सकता है।
शिक्षा जरूरी है या स्कूलों का विलय
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव त्रिपाठी ने बताया कि कुछ जगहों पर पांच-पांच किलोमीटर की दूरी पर स्कूल हैं। ऐसे में स्कूल विलय होने पर बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होगा। वहीं निजी स्कूल संचालक इसका फायदा उठाएंगे। पूरा स्टाफ और बच्चों को दूसरे स्कूल में विलय करने पर सरकारी भूमि और भवन का क्या होगा। विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देनी जरूरी है या स्कूलों का विलय।
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जिले में करीब 250 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें बच्चों की संख्या 50 से कम है। ऐसे विद्यालयों का अब पड़ोसी स्कूल में विलय कर दिया जाएगा। इसको लेकर महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी को एक पत्र जारी करते हुए विद्यालयों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सूची 14 नवंबर तक तैयार किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल, विलय अगले वित्तीय सत्र से किया जाना है। शासन की ओर से मिले निर्देश के बाद यह कार्य तेजी से किया जा रहा है।
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आदेश में महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि वे 13 नवंबर या फिर 14 नवंबर को बैठक कर ऐसे स्कूलों को सूचीबद्ध करें और पास के किस स्कूल में इनका विलय करना ठीक रहेगा, इसकी रिपोर्ट दें। साथ ही यह भी ध्यान दें कि छात्रों को दूसरे स्कूल जाने के लिए कितनी दूरी तय करनी होगी। भवन व शिक्षकों की उपलब्धता और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था, नहर, नदी, नाला इत्यादि के बारे में पूरा प्रस्ताव तैयार करना होगा।
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50 से कम नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ी प्रक्रिया प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश हैं। इसे ध्यान में रखकर कार्ययोजना तैयार की जाए कि उस ग्राम पंचायत में मानक विद्यालय है या नहीं। किस विद्यालय को पास के अन्य विद्यालय में विलय किया जा सकता है।
शिक्षा जरूरी है या स्कूलों का विलय
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव त्रिपाठी ने बताया कि कुछ जगहों पर पांच-पांच किलोमीटर की दूरी पर स्कूल हैं। ऐसे में स्कूल विलय होने पर बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होगा। वहीं निजी स्कूल संचालक इसका फायदा उठाएंगे। पूरा स्टाफ और बच्चों को दूसरे स्कूल में विलय करने पर सरकारी भूमि और भवन का क्या होगा। विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देनी जरूरी है या स्कूलों का विलय।