{"_id":"1eb0052949ea5f4beb83be4e98ab9801","slug":"22-hours-electricity-will-not-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तो नहीं मिलेगी 22 घंटे बिजली!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तो नहीं मिलेगी 22 घंटे बिजली!
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 27 Aug 2015 11:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिलों के शहरी उपकेंद्रों को 22 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 16 घंटे बिजली मिले, इसके लिए तय किए गए मानक पर खीरी जिला खरा नहीं उतर रहा है। जर्जर बिजली लाइनों और करोड़ों रुपये का बकाया होने के कारण जिले के लोगों को अभी हाल-फिलहाल बिजली की कटौती से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। शासन ने बिजली अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लाइन हानियां कम से कम हों और अधिक से अधिक बकाया वसूली की जाए, ताकि जिले के लोगों को भी नियमित बिजली सप्लाई मुहैया कराया जा सके।
बिजली सप्लाई को व्यवस्थित करने के लिए जिले में लखीमपुर और गोला डिवीजन बनाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक दोनों डिवीजनों में 48 फीसदी लाइन हानियां हो रही हैं। शहरी क्षेत्र के उपकेंद्रों पर 25 से 27 फीसदी लाइन हानियां हो रही हैं। वहीं बिजली बिलों की वसूली में भी दोनों डिवीजन फिसड्डी रहे हैं। अकेले जिला मुख्यालय पर करीब 30 करोड़ रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 10 करोड़ रुपया बकाया है। गोला डिवीजन में कमोवेश यही स्थिति है। हालात यह है कि दोनों डिवीजनों में पिछले कुछ महीनों से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कैंप भी नहीं लगाए जा रहे हैं। इस तरह दो प्रमुख बिंदुओं पर जिले की बिजली व्यवस्था कहीं खरी नहीं उतर रही है। पिछले दिनों हुई वीडीओ कांफ्रेंसिंग में राजस्व वसूली बढ़ाने और लाइन हानियां कम करने का निर्देश दिया गया है। कहा गया है कि शहर के जिन उपकेंद्रों पर 15 फीसदी से कम लाइन हानियां होंगी वहां 22 घंटे और ग्रामीण उपकेंद्रों को 16 घंटे बिजली सप्लाई की जाएगी। इस संबंध में अधिशाषी अभियंता रजनीकांत मिश्रा का कहना है कि लखीमपुर डिवीजन की समीक्षा की जा रही है। उनकी प्राथमिकता है कि शहरी उपकेंद्रों की लाइन हानियां पंद्रह फीसदी से कम किया जाए और बकाया वसूली भी ज्यादा से ज्यादा हो।
विज्ञापन
बिजली सप्लाई को व्यवस्थित करने के लिए जिले में लखीमपुर और गोला डिवीजन बनाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक दोनों डिवीजनों में 48 फीसदी लाइन हानियां हो रही हैं। शहरी क्षेत्र के उपकेंद्रों पर 25 से 27 फीसदी लाइन हानियां हो रही हैं। वहीं बिजली बिलों की वसूली में भी दोनों डिवीजन फिसड्डी रहे हैं। अकेले जिला मुख्यालय पर करीब 30 करोड़ रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 10 करोड़ रुपया बकाया है। गोला डिवीजन में कमोवेश यही स्थिति है। हालात यह है कि दोनों डिवीजनों में पिछले कुछ महीनों से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कैंप भी नहीं लगाए जा रहे हैं। इस तरह दो प्रमुख बिंदुओं पर जिले की बिजली व्यवस्था कहीं खरी नहीं उतर रही है। पिछले दिनों हुई वीडीओ कांफ्रेंसिंग में राजस्व वसूली बढ़ाने और लाइन हानियां कम करने का निर्देश दिया गया है। कहा गया है कि शहर के जिन उपकेंद्रों पर 15 फीसदी से कम लाइन हानियां होंगी वहां 22 घंटे और ग्रामीण उपकेंद्रों को 16 घंटे बिजली सप्लाई की जाएगी। इस संबंध में अधिशाषी अभियंता रजनीकांत मिश्रा का कहना है कि लखीमपुर डिवीजन की समीक्षा की जा रही है। उनकी प्राथमिकता है कि शहरी उपकेंद्रों की लाइन हानियां पंद्रह फीसदी से कम किया जाए और बकाया वसूली भी ज्यादा से ज्यादा हो।
विज्ञापन