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ग्रामीणों के आगे बेबस रहा पुलिस और वनविभाग
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 13 Apr 2018 08:18 PM IST
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सहतेपुरवा गांव निवासी 45 वर्षीय कामता प्रसाद के बाघ का निवाला बनने के बाद वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना के बाद पुलिस तो पहुंच गई, लेकिन वन विभाग के अधिकारी काफी देर बाद मौके पर पहुंचे। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को घेर लिया। वहां मौजूद महिलाओं और पुरुषों की वन विभाग के अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। पहले तो ग्रामीणों ने शव पुलिस को शव ही नहीं उठाने दिया। सीओ सविरत्न गौतम के काफी समझाने बुझाने के बाद ग्रामीण माने तब जाकर शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।
शुक्रवार को सुबह से गेहूं के खेत में ग्रामीणों के साथ वन विभाग की टीम और पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। जाल लगाने के बाद जब बाघ को पकड़ने के लिए ट्रैक्टर लेकर ग्रामीण अंदर घुसे उस समय बाघ दहाड़ते हुए गेहूं के खेत से निकलने लगा। ग्रामीणों ने पहले तो खेत से निकलते बाघ को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की। ट्रैक्टर की टक्कर से बाघ गिर गया। तभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर बाघ पर लाठी डंडों से हमला कर दिया। इस बीच वन विभाग के अधिकारी और पुलिस कर्मी पूरी तरह लाचार नजर आए। उन्होंने ग्रामीणों को रोकने की कोशिश तो की लेकिन कामयाब नहीं हुए। ग्रामीणों का गुस्सा तब थमा जब बाघ बेदम हो गया।
हमलावर हुए ग्रामीणों को सीओ सविरत्न गौतम, दरोगा हनुमंत तिवारी और सिपाही अंचित के अलावा वन विभाग के श्याम सिंह ने किसी तरह से ग्रामीणों को रोका और बाघ को घेरे में लेते हुए जाल आदि डालकर पिकअप पर लेकर लुधौरी वन रेंज आए। वहां से पिंजड़ा तैयार किया गया, लेकिन बाघ की हालत खराब होने के कारण उसे पलिया इलाज के लिए ले जाया गया।
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दो किलोमीटर तक लोगों का लगा था तांता
गांव सहतेपुरवा से लेकर बंगलहाकुटी और घटना स्थल से खेत तक लोगों की भारी भीड़ नजर आ रही थी। सहतेपुरवा, कृपाकुंड, बंगलहाराज, बंगलहाकुटी, कसावल पुरवा, बिरजापुरवा समेत कई गांवों के लोगों की भीड़ लगी हुई थी। सबकी आंखों में गुस्सा था।
खेत स्वामी ने नहीं घुसने
दिया अपने खेत में
गांव बंगलहा कुटी निवासी महेश के गेहूं के खेत में बाघ ने डेरा जमा रखा है। खेत स्वामी ने पुलिस और वन विभाग की टीम को खेत के अंदर नहीं घुसने दिया। मुआवजा देने के बाद ही खेत के अंदर जाने को कहा। वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने कहा तिकुनिया से कंबाइन मंगवाकर गेहूं काटने के बाद ही बाघ को खदेड़ा जाएगा। पुलिस ने बमुश्किल जंगल की ओर खड़े लोगों को हटवाकर एक तरफ से रास्ता खाली करवाया।
कई बार पुलिस से
उलझीं महिलाएं
ग्रामीण मृतक के परिवार वालों को मुआवजा दिलाने और बाघ को पकड़ने को लेकर महिलाएं आक्रोशित थीं। जब पुलिस ने शव सील करना शुरू किया तो महिलाएं पुलिस से भिड़ गईं। बहुत समझाने पर ही वह माने। बाद में शव को एक बार फिर रोक लिया गया। सीओ, नायब तहसीलदार ने फिर महिलाओं को समझाया। शव को जब पुलिस ने गाड़ी में रखा गया तो महिलाएं गाड़ी के आगे खड़ी हो गईं। काफी हंगामे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने दिया।
पहले चेतता विभाग तो शायद
नहीं जाती कामता की जान
तीन माह से अधिक समय से बाघ और बाघिन की दहशत से लोग परेशान हैं। वन विभाग यदि पहले ही सक्रियता दिखाता तो शायद कामता की जान बच जाती। 22 मवेशियों को निवाला बनाने और छह लोगों को घायल करने के बाद भी वनविभाग के कान पर जू तक नहीं रेंगी।
ग्रामीणों की वन विभाग
ने तैयार की लिस्ट
वन विभाग ने बाघ को अधमरा करने वालों की लिस्ट तैयार की है। उसमें बीडीओ और फोटो के माध्यम से कई लोगों को चिन्हित भी किया गया है। वन विभाग ग्रामीणों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी में है।
मौके पर मौजूद रहे
यह अधिकारी
इस दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल, सीओ सविरत्न गौतम, एसडीएम अखिलेश यादव, डब्ल्यूटीआई के प्रेमचंद्र, निघासन के रेंजर पलटूराम, मझगईं रेंजर राधेश्याम, बेलरायां रेंजर एमएन सिंह, पलिया के दिनेश बड़ोदा, तहसीलदार पूरन सिंह राना, नायब तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह, प्रभारी उपनिरीक्षक राकेश सिंह के अलावा सिंगाही का पुलिस बल भी पूरे समय वहां मौजूद रहा।
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शुक्रवार को सुबह से गेहूं के खेत में ग्रामीणों के साथ वन विभाग की टीम और पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। जाल लगाने के बाद जब बाघ को पकड़ने के लिए ट्रैक्टर लेकर ग्रामीण अंदर घुसे उस समय बाघ दहाड़ते हुए गेहूं के खेत से निकलने लगा। ग्रामीणों ने पहले तो खेत से निकलते बाघ को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की। ट्रैक्टर की टक्कर से बाघ गिर गया। तभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर बाघ पर लाठी डंडों से हमला कर दिया। इस बीच वन विभाग के अधिकारी और पुलिस कर्मी पूरी तरह लाचार नजर आए। उन्होंने ग्रामीणों को रोकने की कोशिश तो की लेकिन कामयाब नहीं हुए। ग्रामीणों का गुस्सा तब थमा जब बाघ बेदम हो गया।
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हमलावर हुए ग्रामीणों को सीओ सविरत्न गौतम, दरोगा हनुमंत तिवारी और सिपाही अंचित के अलावा वन विभाग के श्याम सिंह ने किसी तरह से ग्रामीणों को रोका और बाघ को घेरे में लेते हुए जाल आदि डालकर पिकअप पर लेकर लुधौरी वन रेंज आए। वहां से पिंजड़ा तैयार किया गया, लेकिन बाघ की हालत खराब होने के कारण उसे पलिया इलाज के लिए ले जाया गया।
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दो किलोमीटर तक लोगों का लगा था तांता
गांव सहतेपुरवा से लेकर बंगलहाकुटी और घटना स्थल से खेत तक लोगों की भारी भीड़ नजर आ रही थी। सहतेपुरवा, कृपाकुंड, बंगलहाराज, बंगलहाकुटी, कसावल पुरवा, बिरजापुरवा समेत कई गांवों के लोगों की भीड़ लगी हुई थी। सबकी आंखों में गुस्सा था।
खेत स्वामी ने नहीं घुसने
दिया अपने खेत में
गांव बंगलहा कुटी निवासी महेश के गेहूं के खेत में बाघ ने डेरा जमा रखा है। खेत स्वामी ने पुलिस और वन विभाग की टीम को खेत के अंदर नहीं घुसने दिया। मुआवजा देने के बाद ही खेत के अंदर जाने को कहा। वन विभाग और पुलिस प्रशासन ने कहा तिकुनिया से कंबाइन मंगवाकर गेहूं काटने के बाद ही बाघ को खदेड़ा जाएगा। पुलिस ने बमुश्किल जंगल की ओर खड़े लोगों को हटवाकर एक तरफ से रास्ता खाली करवाया।
कई बार पुलिस से
उलझीं महिलाएं
ग्रामीण मृतक के परिवार वालों को मुआवजा दिलाने और बाघ को पकड़ने को लेकर महिलाएं आक्रोशित थीं। जब पुलिस ने शव सील करना शुरू किया तो महिलाएं पुलिस से भिड़ गईं। बहुत समझाने पर ही वह माने। बाद में शव को एक बार फिर रोक लिया गया। सीओ, नायब तहसीलदार ने फिर महिलाओं को समझाया। शव को जब पुलिस ने गाड़ी में रखा गया तो महिलाएं गाड़ी के आगे खड़ी हो गईं। काफी हंगामे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने दिया।
पहले चेतता विभाग तो शायद
नहीं जाती कामता की जान
तीन माह से अधिक समय से बाघ और बाघिन की दहशत से लोग परेशान हैं। वन विभाग यदि पहले ही सक्रियता दिखाता तो शायद कामता की जान बच जाती। 22 मवेशियों को निवाला बनाने और छह लोगों को घायल करने के बाद भी वनविभाग के कान पर जू तक नहीं रेंगी।
ग्रामीणों की वन विभाग
ने तैयार की लिस्ट
वन विभाग ने बाघ को अधमरा करने वालों की लिस्ट तैयार की है। उसमें बीडीओ और फोटो के माध्यम से कई लोगों को चिन्हित भी किया गया है। वन विभाग ग्रामीणों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी में है।
मौके पर मौजूद रहे
यह अधिकारी
इस दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल, सीओ सविरत्न गौतम, एसडीएम अखिलेश यादव, डब्ल्यूटीआई के प्रेमचंद्र, निघासन के रेंजर पलटूराम, मझगईं रेंजर राधेश्याम, बेलरायां रेंजर एमएन सिंह, पलिया के दिनेश बड़ोदा, तहसीलदार पूरन सिंह राना, नायब तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह, प्रभारी उपनिरीक्षक राकेश सिंह के अलावा सिंगाही का पुलिस बल भी पूरे समय वहां मौजूद रहा।