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जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम में रूचि नहीं ले रहे सीएचसी अधीक्षक
Updated Tue, 25 Jul 2017 05:30 PM IST
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लखीमपुर खीरी। अफसर, जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों में रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे नसबंदी कार्यक्रम को झटका लगा है। अधिकारियों की उदासीनता के चलते ही पुरुष नसबंदी नहीं हो पा रही है। जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़े में अब तक जहां 196 महिलाओं की नसबंदी हुई है वहीं पुरुषों की संख्या मात्र 13 ही है।
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर शासन की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों को लेकर जिले के अधिकतर सीएचसी अधीक्षक उदासीन हैं। इस कारण न तो महिला नसबंदी ही हो रही हैं और न ही पुरुष नसबंदी। पखवाड़े में अब तक 13 पुरुष और 196 महिलाओं की ही नसबंदी कराई जा सकी है। सीएचसी अधीक्षक नकहा अब तक नौ पुरुष नसबंदी करा सके हैं। जबकि महिलाओं की सबसे ज्यादा 55 नसबंदी बेहजम सीएचसी पर हुई हैं। जिला परिवार कल्याण विशेषज्ञ हेमंद्र चौबे ने बताया मिशन निदेशक ने पखवाड़े की तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई तक कर दी है, प्रयास किया जाएगा कि इस दौरान अधिक से अधिक नसबंदी हो सकें।
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बाक्स=
यहां एक भी नहीं हुई पुरुष नसबंदी
सीएचसी रमियाबेहड़, धौरहरा, निघासन, बांकेगंज, गोला, मोहम्मदी, मितौली, बेहजम, पलिया, ईसानगर, पसगवां
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वर्जन
जनसंख्या नियंत्रण में रमियाबेहड़, धौरहरा और निघासन अधीक्षकों के रुचि न लेने से वहां पर अब तक एक-एक महिला की ही नसबंदी हो सकी है। जबकि पुरुषों की संख्या शून्य रही है। इस कार्यकम में रुचि न लेने वाले अधीक्षकों के खिलाफ मिशन निदेशक को लिखा जाएगा।
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-डॉ.मातादीन, एसीएमओ आरसीएच
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जनसंख्या नियंत्रण को लेकर शासन की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों को लेकर जिले के अधिकतर सीएचसी अधीक्षक उदासीन हैं। इस कारण न तो महिला नसबंदी ही हो रही हैं और न ही पुरुष नसबंदी। पखवाड़े में अब तक 13 पुरुष और 196 महिलाओं की ही नसबंदी कराई जा सकी है। सीएचसी अधीक्षक नकहा अब तक नौ पुरुष नसबंदी करा सके हैं। जबकि महिलाओं की सबसे ज्यादा 55 नसबंदी बेहजम सीएचसी पर हुई हैं। जिला परिवार कल्याण विशेषज्ञ हेमंद्र चौबे ने बताया मिशन निदेशक ने पखवाड़े की तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई तक कर दी है, प्रयास किया जाएगा कि इस दौरान अधिक से अधिक नसबंदी हो सकें।
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यहां एक भी नहीं हुई पुरुष नसबंदी
सीएचसी रमियाबेहड़, धौरहरा, निघासन, बांकेगंज, गोला, मोहम्मदी, मितौली, बेहजम, पलिया, ईसानगर, पसगवां
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वर्जन
जनसंख्या नियंत्रण में रमियाबेहड़, धौरहरा और निघासन अधीक्षकों के रुचि न लेने से वहां पर अब तक एक-एक महिला की ही नसबंदी हो सकी है। जबकि पुरुषों की संख्या शून्य रही है। इस कार्यकम में रुचि न लेने वाले अधीक्षकों के खिलाफ मिशन निदेशक को लिखा जाएगा।
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-डॉ.मातादीन, एसीएमओ आरसीएच