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मोहाना नदी का जलस्तर घटा, दर्जनों गांवों में भरा पानी
Updated Tue, 07 Aug 2018 06:40 PM IST
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मोहाना के पानी से घिरे कई गांव
बाढ़ से बचाव की तैयारियों की खुली कलई
भूख से परेशान हैं बाढ़ पीड़ित, पशुओं के लिए चारे का भी संकट
अमर उजाला ब्यूरो
तिकुनिया। मोहाना नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है फिर भी कई गांव पानी की गिरफ्त में हैं। जलस्तर कम होते ही गिरजापुरी बैराज के सभी फाटक खुल गए हैं। इससे नदी की धारा काफी तेज हो गई है। उधर बाढ़ से घिरे ग्रामीणों का अनाज भीग जाने से सभी के समक्ष भोजन का संकट पैदा हो गया है। पशुओं के लिए भी चारा नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन की तरफ से अब तक लोगों के लिए भोजन के इंतजाम नहीं किये जा सके हैं।
बाढ़ से हालात बिगड़ने पर तहसील प्रशासन और पुलिस बल ने पूरी रात गुरुद्वारा कौड़ियाला में कैंप कर मॉनीटरिंग की। कोतवाली के इंस्पेक्टर अजय सिंह ने प्रशासन से मिले तिरपाल बाढ़ पीड़ितों को बांटे। उधर, कई गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क कट चुका है। बाढ़ पीड़ित गांव टांडा के शिवप्रसाद, ज्वालाप्रसाद, चिरागई और जनकपुर के दूधनाथ, द्रोपदी, बालकराम, राम स्वरूप, रामू, रमेश, कमलेश ने बताया कि बाढ़ का पानी मंगलवार को घटा है। तहसील प्रशासन की ओर से तिरपाल के अलावा और कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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बाढ़ ने खोली तहसील प्रशासन की कलई
मोहाना नदी में सोमवार को आई बाढ़ में फंसे लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को लेकर तहसील प्रशासन केवल दो छोटी नाव ही उपलब्ध करा सका। इस बाबत नायब तहसीलदार ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि दो नाव बाढ़ पीड़ितों को गांव से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं लेकिन सच यह है की छोटी नाव को देखकर बाढ़ पीड़ितों ने नदी की तेज धारा की दहशत के चलते उस पर अपने बच्चों को ले जाने से मना कर दिया। गांव जनकपुर के लोगों ने गुरुद्वारा कौड़ियाला रोड पर किसी तरह पहुंचकर अपने बच्चों को सुरक्षित ठिकाना दिया। इसी प्रकार बंदरहिया, रघुनगर कौड़ियाला के लोगों ने भी ऊंचे स्थानों पर पहुंचकर अपने को सुरक्षित किया है।
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उधर एसडीएम निघासन केशवनाथ गुप्ता ने बताया कि प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर बराबर नजर बनाए हुए है। बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए नावें लगाई गई हैं
नदी की धारा में फंसे लेखपाल
तिकुनिया। एसडीएम केशवनाथ गुप्ता के आदेश पर सोमवार सुबह 10 बजे तहसील की टीम ग्राम पंचायत सूरतनगर के मजरा गांव चौगुर्जी गई थी। टीम को घाट के ठेकेदार लखीचंद के स्टीमर से भेजा गया था। स्टीमर पर नौ लेखपाल सोनू मौर्या, कोमल कुमार, हेमंत राजपूत, फूल सिंह, रामयज्ञ यादव, अनुज कश्यप, सतीश वर्मा, कमलेश तिवारी, सुनील शर्मा, तीन शिक्षक रमेश कुमार, योगेंद्र मिश्रा और रामनरेश थे। यह टीम पूरा दिन गांव में रही। शाम 6.30 बजे तहसील टीम और शिक्षक स्टीमर पर सवार होकर वापस कौड़ियाला घाट के लिए रवाना हुए। चौगुर्जी गांव से कौड़ियाला घाट नदी की दूरी करीब दो किलोमीटर है। गांव से वापस आते समय स्टीमर पर करीब 20 यात्री थे, जिन्हें तिकुनिया आना था, बाइक समेत बैठ लिए यह स्टीमर करीब 500 मीटर दूरी पर चलकर रुक गया। क्योंकि यहां पानी कम था। इसके चलते स्टीमर आगे नहीं बढ़ सका। लेखपालों ने इसकी सूचना फ्लड स्कावड को दी तो तहसील प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। रात भर इंतजाम करने के बाद मंगलवार सुबह 3.30 बजे स्टीमर में फंसे सभी लोगों को कौड़ियाला घाट पर लाया जा सका। इससे तहसील प्रशासन की बदइंतजामी की कलई खुल गई है।
सूत्रों के अनुसार चौगुर्जी गांव से 6.30 बजे रवाना हुआ स्टीमर 500 मीटर चलने के बाद जब फंसा तो इसकी सूचना लेखपाल ने फ्लड स्क्वाड को दी। उन्होंने तत्काल बाढ़ सुरक्षा दल को फोन कर फौरन कौड़ियाला घाट बुलाया। रात करीब 11 बजे एनडीआरएफ के आठ जवान दो मोटर वोट से स्टीमर तक पहुंचे और सभी को सुरक्षित निकालकर कौडियाला घाट लेकर आए।
नदी ने कर दिया कंगाल
शारदा नदी की मार ऐसी कि जमीदार भी कंगाल हो गए। कई एकड़ भूमि और पक्के घरों के मालिक आज सड़क पर आ गए। बैजनाथपुरवा गांव निवासी राजकुमार ने बताया की गांव के उत्तर में उनकी दस एकड़ कृषि भूमि थी। खेत में गन्ने की फसल थी। जमीन ही नही घर भी नदी में समा चुका है। इसी गांव के रामसज्जन के पास छह एकड़, शिवशंकर के पास 12 एकड़, अरविंद के पास चार एकड़ और धीर सिंह आठ एकड़ कृषि भूमि के मालिक थे। पीड़ितों के मुताबिक खेती पर्याप्त होने से वे खुशहाल थे। नदी के कहर ने हमें कही का नहीं छोड़ा। पक्के घरों में सोने वाले ये पीड़ित अब जंगल और शारदा बांध पर झोपड़ी में जीवन गुजारने को विवश हैं।
वर्जन.
जंगल, कृषि भूमि और गांव को मिलाकर करीब बीस हेक्टेयर की जमीन अब तक नदी में समा चुकी है। पीड़ितों की हर संभव मदद की जा रही है। नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
जगदीश सिंह, तहसीलदार निघासन