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जरुरत से ज्यादा खाद का प्रयोग किसान के लिए घातक
Updated Thu, 07 Dec 2017 11:55 PM IST
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किसान
- फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी।विराट किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी में शाहजहांपुर गन्ना संस्थान के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसपी यादव ने कहा कि जरूरत से ज्यादा रासायनिक खादों का इस्तेमाल मृदा की उर्वरा शक्ति को नष्ट करने के साथ ही किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है। संतुलित मात्रा में जैविक खादों के प्रयोग से मृदा उपचार किया जाना आवश्यक है। कहा कि गन्ने के बीच की दूरी कम होने से पैदावार घट जाती है, क्योंकि गन्ना पतला रह जाने से नुकसान के आसार बढ़ जाते हैं।
राजकीय इंटर कॉलेज के ग्राउंड में दूसरे दिन उप कृषि निदेशक एलबी यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। उन्होंने द मिलियन फार्मर स्कूल (किसान पाठशाला) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यह कार्यक्रम दो चरणों में 156 न्याय पंचायतों के कम उत्पादकता वाली ग्राम पंचायतों के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में चलाया जा रहा है। प्रथम चरण नौ दिसंबर 2017 तक और दूसरे चरण में 11 दिसंबर से 15 दिसंबर 2017 तक चलेगा। इससे कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों की जानकारी से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। मेले में किसानों से पारदर्शी किसान सेवा योजना में पंजीकरण कराने की अपील की गई।
मेले में बीजों पर अनुदान, मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य, टिकाऊ खेती के साथ विभिन्न कृषि निवेशों के उपयोग, सोलर पंप पर जानकारी दी गई। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए किसानों को जागरूक किया गया। भारतीय गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केपी पांडेय, डॉ अंगेस सिंह, डॉ एसपी यादव और डॉ पीके कपिल ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के बारे में बताया। मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा संतुलित रखने, गन्ने के साथ ही दूसरी फसलों सरसों, लाही, मसूर की खेती के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने खेत में फसलों के अवशेष न जलाने की अपील किसानों से कर उससे नुकसान गिनाए। इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी संतोष कुमार वर्मा, कृषि रक्षा अधिकारी सलीमुद्दीन, जिला उद्यान अधिकारी दिग्विजय भार्गव मौजूद रहे।
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राजकीय इंटर कॉलेज के ग्राउंड में दूसरे दिन उप कृषि निदेशक एलबी यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। उन्होंने द मिलियन फार्मर स्कूल (किसान पाठशाला) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यह कार्यक्रम दो चरणों में 156 न्याय पंचायतों के कम उत्पादकता वाली ग्राम पंचायतों के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में चलाया जा रहा है। प्रथम चरण नौ दिसंबर 2017 तक और दूसरे चरण में 11 दिसंबर से 15 दिसंबर 2017 तक चलेगा। इससे कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों की जानकारी से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। मेले में किसानों से पारदर्शी किसान सेवा योजना में पंजीकरण कराने की अपील की गई।
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मेले में बीजों पर अनुदान, मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य, टिकाऊ खेती के साथ विभिन्न कृषि निवेशों के उपयोग, सोलर पंप पर जानकारी दी गई। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए किसानों को जागरूक किया गया। भारतीय गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केपी पांडेय, डॉ अंगेस सिंह, डॉ एसपी यादव और डॉ पीके कपिल ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के बारे में बताया। मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा संतुलित रखने, गन्ने के साथ ही दूसरी फसलों सरसों, लाही, मसूर की खेती के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने खेत में फसलों के अवशेष न जलाने की अपील किसानों से कर उससे नुकसान गिनाए। इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी संतोष कुमार वर्मा, कृषि रक्षा अधिकारी सलीमुद्दीन, जिला उद्यान अधिकारी दिग्विजय भार्गव मौजूद रहे।
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