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भारतीय जमीन पर नेपालियों ने किया कब्जे का प्रयास
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:44 PM IST
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भारतीय जमीन पर नेपालियों ने किया कब्जे का प्रयास
भारी फोर्स तैनात, एसएसबी व प्रशासनिक अधिकारियों ने वार्ता कर मामला संभाला
पिलर संख्या 194 कैमा ब्रिज के पास का प्रकरण
अमर उजाला ब्यूरो
महंगापुर। इंडो-नेपाल सीमा पर नेपाली नागरिकों ने पिलर संख्या 194 कैमा ब्रिज के पास भारतीय जमीन पर कब्जे की कोशिश की, लेकिन एसएसबी ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया। धीरे-धीरे भारी संख्या में नेपालियों का जमावड़ा मौके पर होने से मामला तूल पकड़ने लगा। नेपालियों की भीड़ देखकर एसएसबी जवानों ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। सूचना पर एसएसबी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने किसी तरह से सर्वे की बात कहकर नेपालियों को समझा बुझाकर शांत कराया।
करीब एक साल पहले बसही में नेपाली नागरिकों ने पिलर के पास भारतीय जमीन पर कब्जे की कोशिश की थी। जिसके बाद उग्र हुए नेपालियों ने पत्थरबाजी के साथ ही अराजकता फैलाई थी। इसमें दो भारतीय जवानों के चोटें आई थीं। प्रशासनिक अधिकारी भी चोटिल हुए थे। बृहस्पतिवार को पिलर संख्या 194 कैमा ब्रिज के पास नेपाली नागरिकों ने भारतीय जमीन में इलेक्ट्रॉनिक तार से फैसिंग कराने का प्रयास शुरू कर दिया। वहां मौजूद घोला बीओपी के जवानों और अधिकारियों ने उनको रोका तो वाद विवाद शुरू हो गया। धीरे-धीरे पिलर के पास नेपाली नागरिकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। इसको देखते हुए वहां के अधिकारियों ने आला अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद गदनियां मुख्यालय से एसएसबी कमानडेंट राजीव आहुवालिया, डिप्टी कमानडेंट कुमार राजीव रंजन के साथ ही पलिया एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी, तहसीलदार भगवानदीन वर्मा, सीओ प्रदीप कुमार यादव, संपूर्णानगर थाने का पुलिस फोर्स वहां पहुंच गई। अधिकारियों ने नेपालियों को समझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन वह कब्जे की बात पर अड़े रहे। एसएसबी कमानडेंट राजीव आहुवालिया ने नेपालियों से कहा कि सर्वे चल रहा है। टीम अपना काम कर रही है, जल्द ही सर्वे हो जाएगा, जिसके बाद सही तरीके से पता चल पाएगा कि किसकी जमीन है, जब तक सर्वे न हो जाए तब तक कब्जे की कोशिश न की जाए। इसी तरह जमीन पड़ी रहने दी जाए। बमुश्किल अधिकारी नेपालियों को संतुष्ट कर सके। इस दौरान पिलर के पास भारी अफरातफरी का माहौल बना रहा।
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नेपाली पुलिस व प्रधान मूकदर्शक बने
मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब नेपाली नागरिक कब्जे का प्रयास कर रहे थे तब नेपाली पुलिस व नेपाली प्रधान वहां पर खड़े होकर तमाशा देख रहे थे। उन्होंने किसी तरह से नेपालियों को समझाने का प्रयास नहीं किया तथा नेपालियों द्वारा किए जा रहे कब्जे में सहयोग देते रहे।
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एकबार फिर से छावनी में तब्दील हुआ पिलर
एक साल पहले बसही में हुए विवाद के बाद छावनी में पिलर तब्दील हुआ था। अब यही हाल कैमा ब्रिज के पास मौजूद पिलर संख्या 194 के पास दिखा। यहां पर भी नेपालियों के कब्जे की सूचना पर भारी संख्या में एसएसबी जवानों के साथ ही पुलिस बल पहुंच गया जिससे यह एरिया भी छावनी में तब्दील हो गया।
अधिकारी लगातार करेंगे निगरानी, ताकि दोबारा न हो सके कब्जे का प्रयास
अधिकारियों के मुताबिक बृहस्पतिवार को हुए विवाद के बाद पिलर संख्या 194 के पास अधिकारी लगातार निगरानी करेंगें। साथ ही एसएसबी जवानों को भी सतर्कता बरतने के निर्देश अधिकारियों ने दिए हैं। ऐसा इसीलिए कि दोबारा बसही जैसे हालात इस पिलर पर न बन सके।
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भारतीय जमीन पर नेपालियों ने किया कब्जे का प्रयास
भारी फोर्स तैनात, एसएसबी व प्रशासनिक अधिकारियों ने वार्ता कर मामला संभाला
पिलर संख्या 194 कैमा ब्रिज के पास का प्रकरण
अमर उजाला ब्यूरो
महंगापुर। इंडो-नेपाल सीमा पर नेपाली नागरिकों ने पिलर संख्या 194 कैमा ब्रिज के पास भारतीय जमीन पर कब्जे की कोशिश की, लेकिन एसएसबी ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया। धीरे-धीरे भारी संख्या में नेपालियों का जमावड़ा मौके पर होने से मामला तूल पकड़ने लगा। नेपालियों की भीड़ देखकर एसएसबी जवानों ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। सूचना पर एसएसबी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने किसी तरह से सर्वे की बात कहकर नेपालियों को समझा बुझाकर शांत कराया।
करीब एक साल पहले बसही में नेपाली नागरिकों ने पिलर के पास भारतीय जमीन पर कब्जे की कोशिश की थी। जिसके बाद उग्र हुए नेपालियों ने पत्थरबाजी के साथ ही अराजकता फैलाई थी। इसमें दो भारतीय जवानों के चोटें आई थीं। प्रशासनिक अधिकारी भी चोटिल हुए थे। बृहस्पतिवार को पिलर संख्या 194 कैमा ब्रिज के पास नेपाली नागरिकों ने भारतीय जमीन में इलेक्ट्रॉनिक तार से फैसिंग कराने का प्रयास शुरू कर दिया। वहां मौजूद घोला बीओपी के जवानों और अधिकारियों ने उनको रोका तो वाद विवाद शुरू हो गया। धीरे-धीरे पिलर के पास नेपाली नागरिकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। इसको देखते हुए वहां के अधिकारियों ने आला अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद गदनियां मुख्यालय से एसएसबी कमानडेंट राजीव आहुवालिया, डिप्टी कमानडेंट कुमार राजीव रंजन के साथ ही पलिया एसडीएम इंद्राकांत द्विवेदी, तहसीलदार भगवानदीन वर्मा, सीओ प्रदीप कुमार यादव, संपूर्णानगर थाने का पुलिस फोर्स वहां पहुंच गई। अधिकारियों ने नेपालियों को समझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन वह कब्जे की बात पर अड़े रहे। एसएसबी कमानडेंट राजीव आहुवालिया ने नेपालियों से कहा कि सर्वे चल रहा है। टीम अपना काम कर रही है, जल्द ही सर्वे हो जाएगा, जिसके बाद सही तरीके से पता चल पाएगा कि किसकी जमीन है, जब तक सर्वे न हो जाए तब तक कब्जे की कोशिश न की जाए। इसी तरह जमीन पड़ी रहने दी जाए। बमुश्किल अधिकारी नेपालियों को संतुष्ट कर सके। इस दौरान पिलर के पास भारी अफरातफरी का माहौल बना रहा।
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नेपाली पुलिस व प्रधान मूकदर्शक बने
मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब नेपाली नागरिक कब्जे का प्रयास कर रहे थे तब नेपाली पुलिस व नेपाली प्रधान वहां पर खड़े होकर तमाशा देख रहे थे। उन्होंने किसी तरह से नेपालियों को समझाने का प्रयास नहीं किया तथा नेपालियों द्वारा किए जा रहे कब्जे में सहयोग देते रहे।
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एकबार फिर से छावनी में तब्दील हुआ पिलर
एक साल पहले बसही में हुए विवाद के बाद छावनी में पिलर तब्दील हुआ था। अब यही हाल कैमा ब्रिज के पास मौजूद पिलर संख्या 194 के पास दिखा। यहां पर भी नेपालियों के कब्जे की सूचना पर भारी संख्या में एसएसबी जवानों के साथ ही पुलिस बल पहुंच गया जिससे यह एरिया भी छावनी में तब्दील हो गया।
अधिकारी लगातार करेंगे निगरानी, ताकि दोबारा न हो सके कब्जे का प्रयास
अधिकारियों के मुताबिक बृहस्पतिवार को हुए विवाद के बाद पिलर संख्या 194 के पास अधिकारी लगातार निगरानी करेंगें। साथ ही एसएसबी जवानों को भी सतर्कता बरतने के निर्देश अधिकारियों ने दिए हैं। ऐसा इसीलिए कि दोबारा बसही जैसे हालात इस पिलर पर न बन सके।