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अभिभावकों की बढ़ी परेशानी, किताबों की दुकान पर लगा रहे लाइन

Fri, 30 Mar 2018 07:35 PM IST
Updated Fri, 30 Mar 2018 07:35 PM IST
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अभिभावकों की बढ़ी परेशानी, किताबों की दुकान पर लगा रहे लाइन
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मिशन एडमिशन

किताबों की दुकान पर लाइन
में लग रहे अभिभावक
अभिभावक हो रहे परेशान, लेकिन जिला प्रशासन अंजान
- कोर्स खरीदने के लिए दुकान की ओर दौड़ रहे अभिभावक
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
नए सत्र में जहां बच्चों में अगली कक्षा में जाने का उत्साह है तो वहीं अभिभावक परेशान हैं। कॉन्वेंट स्कूलों की ओर से पहले ही दिन कोर्स के साथ ड्रेस में स्कूल आने के जारी फरमान से अभिभावकों की दौड़ निर्धारित ड्रेस और किताबों की दुकानों पर शुरू हो गई है। निर्धारित दुकानों पर ही यूनीफार्म और किताबें खरीदने की पाबंदी के कारण बेचारे अभिभावक बुकसेलर्स द्वारा मांगे जा रहे मनमाने दाम देने को मजबूर हैं।
बच्चों के स्कूल शुरू होने से पहले उनके मम्मी-पापा की जान आफत में पड़ गई है। स्कूल एडमीशन के समय ही तीन माह की फीस एक साथ वसूल कर रहे हैं। अभिभावकों को इसके लिए प्रवेश के समय ही खासा बजट व्यय करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कोर्स, ड्रेस आदि की खरीददारी की निर्धारित दुकानों पर इनके मनमाने दाम देने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत नौकरी पेशा वर्ग की हैं। सत्र समाप्ति को लेकर जहां ऑफिसों में वर्कलोड बढ़ा है, तो वहीं बच्चों के लिए कोर्स, ड्रेस खरीदना भी जरूरी है। वहीं बच्चे भी नई ड्रेस और कोर्स को लेकर उत्साहित हैं और इसके लिए जिद भी कर रहे हैं, क्योंकि स्कूलों ने पहले दिन ही ड्रेस और कोर्स के साथ आने के निर्देश दे रखे हैं। इस कारण बच्चों के पिता जहां ऑफिस से समय निकालकर किताबों की दुकानों पर लाइन लगा रहे हैं तो वहीं बच्चों की मम्मी भी घर का काम धाम निपटाकर दुकान पहुंच रही हैं। वहीं अभिभावकों को चिंता है कि कहीं ऐसा न हो कि कोर्स की शार्टेज के चलते कोर्स ही न मिल पाए।
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हर एक्टिविटी की अलग-अलग यूनीफार्म
कॉन्वेंट स्कूलों ने एक यूनीफार्म निर्धारित न करते हुए हर एक्टिविटी की अलग-अलग ड्रेस निर्धारित कर रखी है। इसमें सप्ताह में पांच दिन एक जैसी और दो दिन एक जैसी। वहीं समय समय पर होने वाले कार्यक्रम में बच्चों को रखने पर उसके लिए भी अलग से ड्रेस खरीदवाते हैं।
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बच्चों को पढ़ाना
आसान नहीं रहा
बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं रहा। हर साल फीस बढ़ाना और कोर्स बदलना स्कूलों की आदत बन गई है। कोर्स चाहें नर्सरी का लो या फिर बड़े क्लास का। सबकी कीमत चार-पांच हजार से कम नहीं बैठती।
- संगीता वर्मा, आवास विकास कॉलोनी

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मार्च में बढ़ जाती है टेंशन
बच्चों की फीस, एडमीशन और कोर्स को लेकर मार्च में टेंशन बढ़ जाती है। क्योंकि मालूम ही नहीं हो पाता है कि स्कूल वाले इस बार कितनी फीस बढ़ाएंगे और कितने का कोर्स मिलेगा।
- लक्ष्मी पांडे, हाथीपुर

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स्कूल करते हैं मनमानी
निर्धारित दुकान से कोर्स खरीदने पर दुकानदार द्वारा मांगी गई मुंहमांगी कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि अन्य दुकान पर इन्हें लिया जाए तो कुछ छूट भी मिल जाती है। वहीं कोर्स खरीदने के लिए लाइन भी लगो और पूरे दाम भी दो।

- वंदना उत्तम, बहादुर नगर

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कोर्स के लिए लाइन लगाओ
कोर्स और ड्रेस खरीदना भी काफी मुश्किल हो गया है। स्कूल पहले ही दिन बच्चे को कोर्स और ड्रेस में भेजने के निर्देश देते हैं। ड्यूटी से आओ, फिर कोर्स और ड्रेस के लिए दुकान पर जाकर लाइन लगाओ।
- दीपमाला, नईबस्ती
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