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फाइलेरिया की रोकथाम के लिए अभियान 18 से
Updated Wed, 13 Dec 2017 11:54 PM IST
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लखीमपुर खीरी।
फाइलेरिया रोग से बचाव के लिए जिले के लोगों को दवा खिलाने का अभियान 18 दिसंबर से शुरू होगा और तीन दिन तक चलेगा। इस दौरान दो साल से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी 100 और एलबेंडाजोल 400 मिलीग्राम की गोली खिलाई जाएगी। इसके लिए बुधवार से एएनएम ट्रेनिंग सेंटर पर प्रशिक्षण शिविर हुआ, जिसमें सुपरवाइजरों को उम्र के अनुसार दवा खिलाने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण शिविर में ट्रेनर एसीएमओ डॉ. मातादीन ने सुपरवाइजरों को बताया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में 18 से 21 दिसंबर तक दवा खिलाने का अभियान चलेगा। इस दौरान दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को दवा नहीं खिलानी है। वहीं अन्य लोगों को भी खाली पेट दवा नहीं देनी है। उन्होंने बताया कि दवा खिलाने वालों को यह अवश्य बता दें कि इसे खाने के बाद बुखार, जी मचलना, उल्टी, बदन दर्द के साथ ही पित्ती उछलने की समस्या आ सकती है। ऐसा फाइलेरिया परजीवी के मरने के कारण होता है। इसलिए ऐसा होने पर घबराएं नहीं।
दवा खिलाने के लिए लगाई गई टीमें- 7685
निगरानी के लिए लगाए गए सुपरवाइजर- 431
डीईसी गोलियों की आवश्यकता- 9141283
एलबेंडाजोल गोलियों की आवश्यकता- 3651834
क्या है फाइलेरिया
जिला मलेरिया और फाइलेरिया अधिकारी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि फाइलेरिया एक संक्रामक रोग है। जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में मादा क्यूलेक्स मच्छर के द्वारा फैलती है। उन्होंने बताया कि इसे सामान्य तौर पर फील पांव या फिर हाथी पाव के नाम से जाना जाता है।
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उम्र डीईसी की मात्रा एलबेंडाजोल की मात्रा
दो से पांच साल तक एक टैबलेट 100 मिलीग्रा. एक टैबलेट 400 मिलीग्रा.
छह से 14 तक दो टैबलेट 100 मिलीग्रा. एक टैबलेट 400 मिलीग्रा.
14 से अधिक के लिए तीन टैबलेट 300 मिलीग्रा. एक टैबलेट 400 मिलीग्रा.
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फाइलेरिया रोग से बचाव के लिए जिले के लोगों को दवा खिलाने का अभियान 18 दिसंबर से शुरू होगा और तीन दिन तक चलेगा। इस दौरान दो साल से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी 100 और एलबेंडाजोल 400 मिलीग्राम की गोली खिलाई जाएगी। इसके लिए बुधवार से एएनएम ट्रेनिंग सेंटर पर प्रशिक्षण शिविर हुआ, जिसमें सुपरवाइजरों को उम्र के अनुसार दवा खिलाने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण शिविर में ट्रेनर एसीएमओ डॉ. मातादीन ने सुपरवाइजरों को बताया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में 18 से 21 दिसंबर तक दवा खिलाने का अभियान चलेगा। इस दौरान दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को दवा नहीं खिलानी है। वहीं अन्य लोगों को भी खाली पेट दवा नहीं देनी है। उन्होंने बताया कि दवा खिलाने वालों को यह अवश्य बता दें कि इसे खाने के बाद बुखार, जी मचलना, उल्टी, बदन दर्द के साथ ही पित्ती उछलने की समस्या आ सकती है। ऐसा फाइलेरिया परजीवी के मरने के कारण होता है। इसलिए ऐसा होने पर घबराएं नहीं।
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दवा खिलाने के लिए लगाई गई टीमें- 7685
निगरानी के लिए लगाए गए सुपरवाइजर- 431
डीईसी गोलियों की आवश्यकता- 9141283
एलबेंडाजोल गोलियों की आवश्यकता- 3651834
क्या है फाइलेरिया
जिला मलेरिया और फाइलेरिया अधिकारी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि फाइलेरिया एक संक्रामक रोग है। जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में मादा क्यूलेक्स मच्छर के द्वारा फैलती है। उन्होंने बताया कि इसे सामान्य तौर पर फील पांव या फिर हाथी पाव के नाम से जाना जाता है।
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उम्र डीईसी की मात्रा एलबेंडाजोल की मात्रा
दो से पांच साल तक एक टैबलेट 100 मिलीग्रा. एक टैबलेट 400 मिलीग्रा.
छह से 14 तक दो टैबलेट 100 मिलीग्रा. एक टैबलेट 400 मिलीग्रा.
14 से अधिक के लिए तीन टैबलेट 300 मिलीग्रा. एक टैबलेट 400 मिलीग्रा.