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मदरसा शिक्षकों को नहीं मिला तीस माह से मानदेय
Updated Thu, 20 Sep 2018 07:08 PM IST
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मदरसा शिक्षकों को नहीं मिला तीस माह से मानदेय
प्रत्येक शिक्षक को 12 हजार केंद्र और तीन हजार देती है राज्य सरकार
राज्य सरकार ने 15 अगस्त को ही भेज दिया था अपना अंश, खातों में नहीं पहुंचा
अमर उजाला ब्यूरो
धौरहरा। सरकार ने मदरसों का आधुनिकीकरण करने की योजना के तहत मदरसों में उर्दू के साथ हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए मानदेय पर उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इन्हें 12 हजार केंद्रांश और तीन हजार राज्यांश मिलाकर 15 हजार रुपये मानदेय की योजना बनी। मानदेय भी शुरू किया गया, लेकिन तीस माह से इन्हें मानदेय नहीं मिला है। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बताते हैं कि राज्यांश 15 अगस्त को आ चुका है अभी शिक्षकों के खातों में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है।
सरकार की महत्वाकांक्षी मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत क्षेत्र में संचालित मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा देने की है। इसके लिए सरकार ने मान्यता प्राप्त हर मदरसों में उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर की शिक्षा के लिए मानदेय आधारित शिक्षक भर्ती किये थे। यह तहसील क्षेत्र के कस्बा धौरहरा सहित लालापुरवा गुलरिया तालुके अमेठी, अभयपुर कफारा, रामनगर लहबड़ी और ईसानगर संडौराकलां सहित करीब 107 मदरसे संचालित हैं। इनमे 312 शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यहां के शिक्षकों की माने तो इन्हें विगत तीस माह से मानदेय नही मिला है। वर्ष 18-19 का राज्यांश सरकार से आया है वह जिले पर लटका है अभी इनके खाते में नही पहुंच सका है।
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कृष्ण कुमार मौर्या ने बताया कि अभी केंद्रांश का पैसा नही आया है। राज्यांश का पैसा 15 अगस्त को खाते में आया है, जिसे एक दो दिन में शिक्षकों के खाते में भेजा जाएगा। केंद्रांश कब आएगा यह बता पाना संभव नही है।
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प्रत्येक शिक्षक को 12 हजार केंद्र और तीन हजार देती है राज्य सरकार
राज्य सरकार ने 15 अगस्त को ही भेज दिया था अपना अंश, खातों में नहीं पहुंचा
अमर उजाला ब्यूरो
धौरहरा। सरकार ने मदरसों का आधुनिकीकरण करने की योजना के तहत मदरसों में उर्दू के साथ हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए मानदेय पर उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इन्हें 12 हजार केंद्रांश और तीन हजार राज्यांश मिलाकर 15 हजार रुपये मानदेय की योजना बनी। मानदेय भी शुरू किया गया, लेकिन तीस माह से इन्हें मानदेय नहीं मिला है। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बताते हैं कि राज्यांश 15 अगस्त को आ चुका है अभी शिक्षकों के खातों में स्थानांतरित नहीं किया जा सका है।
सरकार की महत्वाकांक्षी मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत क्षेत्र में संचालित मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा देने की है। इसके लिए सरकार ने मान्यता प्राप्त हर मदरसों में उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर की शिक्षा के लिए मानदेय आधारित शिक्षक भर्ती किये थे। यह तहसील क्षेत्र के कस्बा धौरहरा सहित लालापुरवा गुलरिया तालुके अमेठी, अभयपुर कफारा, रामनगर लहबड़ी और ईसानगर संडौराकलां सहित करीब 107 मदरसे संचालित हैं। इनमे 312 शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यहां के शिक्षकों की माने तो इन्हें विगत तीस माह से मानदेय नही मिला है। वर्ष 18-19 का राज्यांश सरकार से आया है वह जिले पर लटका है अभी इनके खाते में नही पहुंच सका है।
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अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कृष्ण कुमार मौर्या ने बताया कि अभी केंद्रांश का पैसा नही आया है। राज्यांश का पैसा 15 अगस्त को खाते में आया है, जिसे एक दो दिन में शिक्षकों के खाते में भेजा जाएगा। केंद्रांश कब आएगा यह बता पाना संभव नही है।
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