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दादी मां की हल्दी में निकला अखाद्य केमिकल
Updated Fri, 04 May 2018 07:20 PM IST
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52 खाद्य पदार्थों के नमूने फेल
‘दादी मां’ हल्दी में निकला खतरनाक लेड क्रोमेड केमिकल
कचरी और छेने में सिंथेटिक कलर, मिठाई पर एल्युमीनियम वर्क
व्यापारियों और कंपनी के खिलाफ चलेगा मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा भरे गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले में बड़े पैमाने पर मिलावटखोर सक्रिय हैं, जिनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। सेहत के लिए मुफीद मानी जाने वाली हल्दी लोगों की सेहत खराब कर रही है, क्योंकि उसमें खतरनाक केमिकल लेड क्रोमेड (अखाद्य रंग) मिलाया गया है। लैब विश्लेषक ने ‘दादी मां’ ब्रांड हल्दी को असुरक्षित करार देते हुए इसका सेवन करना लोगों की सेहत के लिए खतरनाक बताया है। इसके अलावा मिठाइयों पर चांदी की जगह एल्युमीनियम के वर्क का प्रयोग बदस्तूर जारी है। बेकरी के बिस्कुट में राख की मात्रा ज्यादा पाई गई है। शहर के नामी शिवम रेस्टोरेंट से लिए गए बेसन नमूने में मटर के आटे की मिलावट पाई गई है। कुछ महीने पहले होली पर बेची गई कचरी में सिंथेटिक कलर पाया गया है।
एफएसडीए के अभिहित अधिकारी डॉ. अमर सिंह वर्मा ने बताया कि मुनाफे के लालच में खाद्य पदार्थों में मिलावट कर कुछ कारोबारी खतरनाक केमिकल का धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। अभियान चलाकर सितंबर 2017 से मार्च 2018 तक इकट्ठा किए गए करीब 115 नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था। विभिन्न लैब से आई रिपोर्ट ने ऐसे ही चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया, नकहा ब्लॉक क्षेत्र के गांव हरदासपुर लगुचा निवासी सुनील कुमार की दुकान से 25 सितंबर 2017 को लिए गए दादी मां ब्रांड की हल्दी नमूने में लेड क्रोमेड की मात्रा पाई गई है, जिसे प्लास्टिक समेत निर्माण कार्यों में पीला कलर लाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे मानव सेहत पर विपरीत असर पड़ता है। इसके सेवन से स्किन एलर्जी, एनीमिया के अलावा किडनी और ब्रेन पर निगेटिव असर पड़ता है। दादी मां ब्रांड की हल्दी की पैकिंग पर लखनऊ के जय प्रकाशनगर स्थित रिट्ज फार्मास्युटिकल्स फूड प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड का पता पाया गया है। अभिहित अधिकारी डॉ. अमर सिंह वर्मा ने कहा है कि दुकानदार के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाएगा। निर्माता कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लखनऊ के अभिहित अधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
अभिहित अधिकारी ने बताया कि होली के दौरान 22 फरवरी 2018 को हरदोई के संडीला क्षेत्र के गांव इमलिया निवासी मतीन अहमद संस की गाड़ी से कचरी का नमूना लिया गया था, जिसमें अखाद्य सिंथेटिक कलर (असुरक्षित) मिला है। उदयपुर महेवा निवासी प्रह्लाद की दुकान से लिया गया छेने की मिठाई में भी सिंथेटिक कलर पाया गया है, जिससे इस मिठाई का सेवन असुरक्षित करार दिया गया है। एकतानगर ओयल स्थित प्रेमचंद्र की दुकान से लिए गए बर्फी के नमूने में चांदी की जगह एल्युमीनियम का वर्क पाया गया है, जिससे इसे असुरक्षित की श्रेणी में रखा गया है। नई बस्ती निवासी राजनरायन गुप्ता (मिठाईवाला) की दुकान से लिए गए बेसन में कीड़े और लार्वे मिले हैं और छेना मिठाई में बाहरी तत्व पाए गए हैं। उत्तराखंड के रूद्रपुर से आने वाली गाड़ी से शीलचंद्र एग्रो आयल का रिफाइंड पामोलीन तेल पकड़ा गया था, जिसमें एसिड की मात्रा मिली है, जिससे अधोमानक करार दिया गया है। गढ़ी रोड निवासी सूरज सचदेवा के गुरु कृपा बेकर्स से लिए गए बिस्कुट के नमूने में राख की मात्रा लिमिट से ज्यादा पाई गई है। दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लखीमपुर का दूध अधोमानक निकला है।
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बकौल अभिहित अधिकारी, शिवम रेस्टोरेंट के बेसन नमूने को अधोमानक पाया गया है, क्योंकि इसमें मटर के आटे की मिलावट पाई गई है। गोला स्थित हर्ष प्रोविजन स्टोर से लिया गया सरसों तेल का नमूना अधोमानक और असुरक्षित पाया गया है। मैलानी के गांव राजेपुर सुआबोझ निवासी फारूक के बेसन का नमूना असुरक्षित पाया गया है। फरधान के गांव देवरिया निवासी रामलखन के दूध, रमियाबेहड़ निवासी दीपक गुप्ता के बेसन लड्डू का नमूना अधोमानक पाया गया है। इसी तरह भंसड़िया स्थित गोविंद उद्योग की नमकीन, गोला के बनभलिया स्थित दयाल मिल्क प्रोडक्ट का दही, सीतापुर के इमलिया सुल्तानपुर निवासी ओमप्रकाश के दूध, ईसानगर के किशनलाल गुप्ता के रिफाइंड सोयाबीन, सिकंद्राबाद निवासी प्रमोद कुमार के पामोलीन रिफाइंड, मितौली निवासी फहीम की बर्फी, उदित नारायन के दूध का नमूना अधोमानक मिला है।
बाक्स=
बढ़ रहे मिथ्याछाप के मामले
एलआरपी रोड निवासी सीमा गुप्ता के न्यू पर्ल फूड सेंचुरी ब्रांड बन को मिथ्याछाप करार दिया गया है, क्योंकि इस पर बैच नंबर, पैकिंग डेट, वजन आदि नहीं अंकित है। बरेली के सीबीगंज के मथुरापुर निवासी पुरूषोत्तम साहू की बेकरी का रस्क मिथ्या छाप पाया गया है। इसी तरह मोहम्मदी के बलमिया बड़खर निवासी सुनील गुप्ता की दुकान से लिया गया प्रीमियम सागर पान मसाला मिथ्याछाप मिला है।
बाक्स=वर्जन
अखाद्य रंगों के इस्तेमाल के कई मामले मिले हैं, जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चांदी की जगह एल्युमिनियम वर्क के प्रयोग का मामला बेहद गंभीर है। असुरक्षित नमूनों के मामलों में एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाएगा, जिससे पहले व्यापारियों को नोटिस देकर अवगत कराया गया है। जो व्यापारी जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है, वह दोबारा जांच करा सकते हैं।
- डॉ. अमर सिंह वर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए
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52 खाद्य पदार्थों के नमूने फेल
‘दादी मां’ हल्दी में निकला खतरनाक लेड क्रोमेड केमिकल
कचरी और छेने में सिंथेटिक कलर, मिठाई पर एल्युमीनियम वर्क
व्यापारियों और कंपनी के खिलाफ चलेगा मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा भरे गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले में बड़े पैमाने पर मिलावटखोर सक्रिय हैं, जिनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। सेहत के लिए मुफीद मानी जाने वाली हल्दी लोगों की सेहत खराब कर रही है, क्योंकि उसमें खतरनाक केमिकल लेड क्रोमेड (अखाद्य रंग) मिलाया गया है। लैब विश्लेषक ने ‘दादी मां’ ब्रांड हल्दी को असुरक्षित करार देते हुए इसका सेवन करना लोगों की सेहत के लिए खतरनाक बताया है। इसके अलावा मिठाइयों पर चांदी की जगह एल्युमीनियम के वर्क का प्रयोग बदस्तूर जारी है। बेकरी के बिस्कुट में राख की मात्रा ज्यादा पाई गई है। शहर के नामी शिवम रेस्टोरेंट से लिए गए बेसन नमूने में मटर के आटे की मिलावट पाई गई है। कुछ महीने पहले होली पर बेची गई कचरी में सिंथेटिक कलर पाया गया है।
एफएसडीए के अभिहित अधिकारी डॉ. अमर सिंह वर्मा ने बताया कि मुनाफे के लालच में खाद्य पदार्थों में मिलावट कर कुछ कारोबारी खतरनाक केमिकल का धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। अभियान चलाकर सितंबर 2017 से मार्च 2018 तक इकट्ठा किए गए करीब 115 नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था। विभिन्न लैब से आई रिपोर्ट ने ऐसे ही चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया, नकहा ब्लॉक क्षेत्र के गांव हरदासपुर लगुचा निवासी सुनील कुमार की दुकान से 25 सितंबर 2017 को लिए गए दादी मां ब्रांड की हल्दी नमूने में लेड क्रोमेड की मात्रा पाई गई है, जिसे प्लास्टिक समेत निर्माण कार्यों में पीला कलर लाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे मानव सेहत पर विपरीत असर पड़ता है। इसके सेवन से स्किन एलर्जी, एनीमिया के अलावा किडनी और ब्रेन पर निगेटिव असर पड़ता है। दादी मां ब्रांड की हल्दी की पैकिंग पर लखनऊ के जय प्रकाशनगर स्थित रिट्ज फार्मास्युटिकल्स फूड प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड का पता पाया गया है। अभिहित अधिकारी डॉ. अमर सिंह वर्मा ने कहा है कि दुकानदार के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाएगा। निर्माता कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लखनऊ के अभिहित अधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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बाक्स=
बढ़ रहे मिथ्याछाप के मामले
एलआरपी रोड निवासी सीमा गुप्ता के न्यू पर्ल फूड सेंचुरी ब्रांड बन को मिथ्याछाप करार दिया गया है, क्योंकि इस पर बैच नंबर, पैकिंग डेट, वजन आदि नहीं अंकित है। बरेली के सीबीगंज के मथुरापुर निवासी पुरूषोत्तम साहू की बेकरी का रस्क मिथ्या छाप पाया गया है। इसी तरह मोहम्मदी के बलमिया बड़खर निवासी सुनील गुप्ता की दुकान से लिया गया प्रीमियम सागर पान मसाला मिथ्याछाप मिला है।
बाक्स=वर्जन
अखाद्य रंगों के इस्तेमाल के कई मामले मिले हैं, जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चांदी की जगह एल्युमिनियम वर्क के प्रयोग का मामला बेहद गंभीर है। असुरक्षित नमूनों के मामलों में एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाएगा, जिससे पहले व्यापारियों को नोटिस देकर अवगत कराया गया है। जो व्यापारी जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है, वह दोबारा जांच करा सकते हैं।
- डॉ. अमर सिंह वर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए