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बाघ ने जंगली सुअर का किया शिकार
Updated Thu, 01 Nov 2018 06:24 PM IST
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जंगली सुअर को मारकर खा गया बाघ
अमर उजाला ब्यूरो
ममरी। वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर के सुंदरपुर गांव के करीब बने मोबाइल टॉवर के पास बुधवार की शाम बाघ ने जंगली सुअर पर हमला कर उसे अपना शिकार बना डाला। गुरुवार की सुबह बीडीसी रामकुमार वर्मा के खेत में खून पड़ा देख गांव वालों में दहशत फैल गई है। सूचना वन कर्मियों को दे दी गई है।
बुधवार की शाम सुंदरपुर गांव के उत्तर आबादी के करीब बने टॉवर के पास गन्ने के खेतों में विचरण कर रहे बाघ ने बीडीसी रामकुमार वर्मा के खाली पड़े खेत में जंगली सुअर पर हमला कर उसे अपना शिकार बना डाला। गुरुवार की सुबह ग्रामीण जब खेतों की ओर गए तो खून पड़ा देख उनके होश उड़ गए। प्रधान रामविलास चौधरी और रामकुमार वर्मा ने बताया कि सूचना पाते ही तमाम ग्रामीण लाठी, डंडे, ट्रैक्टर लेकर इकट्ठे हो गए, लेकिन बाघ का पता नहीं चला। जबकि उसके पगचिन्ह चकरोड पर बने मिले जिससे गांववालों में दहशत फैल गई है।
गांववालों का कहना है कि पांच महीने से दहशत का पर्याय बने बाघ ने 18 जून को गन्ने की सिंचाई कर रहे सुंदरपुर के किसान बालकराम को हमला कर मार डाला था। तब से बाघ दर्जनों पशुओं को अपना शिकार बना चुका है। बताया कि बाघ के हमले को लेकर ग्रामीणों और वन कर्मियों के बीच काफी बवाल हुआ था।
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रेंजर बनारसी दास शाक्य, फॉरेस्टर रामप्रसाद का कहना है कि बाघ ने जिस वन्यजीव को शिकार बनाया है। उसके कोई भी अवशेष मौके पर नहीं मिले हैं। बल्कि बाघ के पग चिह्न और खून पड़ा मिला है। वन कर्मियों की टीम निगरानी में लगा दी गई है। गांव वालों की मानें तो बाघ अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए हुए हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
ममरी। वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर के सुंदरपुर गांव के करीब बने मोबाइल टॉवर के पास बुधवार की शाम बाघ ने जंगली सुअर पर हमला कर उसे अपना शिकार बना डाला। गुरुवार की सुबह बीडीसी रामकुमार वर्मा के खेत में खून पड़ा देख गांव वालों में दहशत फैल गई है। सूचना वन कर्मियों को दे दी गई है।
बुधवार की शाम सुंदरपुर गांव के उत्तर आबादी के करीब बने टॉवर के पास गन्ने के खेतों में विचरण कर रहे बाघ ने बीडीसी रामकुमार वर्मा के खाली पड़े खेत में जंगली सुअर पर हमला कर उसे अपना शिकार बना डाला। गुरुवार की सुबह ग्रामीण जब खेतों की ओर गए तो खून पड़ा देख उनके होश उड़ गए। प्रधान रामविलास चौधरी और रामकुमार वर्मा ने बताया कि सूचना पाते ही तमाम ग्रामीण लाठी, डंडे, ट्रैक्टर लेकर इकट्ठे हो गए, लेकिन बाघ का पता नहीं चला। जबकि उसके पगचिन्ह चकरोड पर बने मिले जिससे गांववालों में दहशत फैल गई है।
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गांववालों का कहना है कि पांच महीने से दहशत का पर्याय बने बाघ ने 18 जून को गन्ने की सिंचाई कर रहे सुंदरपुर के किसान बालकराम को हमला कर मार डाला था। तब से बाघ दर्जनों पशुओं को अपना शिकार बना चुका है। बताया कि बाघ के हमले को लेकर ग्रामीणों और वन कर्मियों के बीच काफी बवाल हुआ था।
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रेंजर बनारसी दास शाक्य, फॉरेस्टर रामप्रसाद का कहना है कि बाघ ने जिस वन्यजीव को शिकार बनाया है। उसके कोई भी अवशेष मौके पर नहीं मिले हैं। बल्कि बाघ के पग चिह्न और खून पड़ा मिला है। वन कर्मियों की टीम निगरानी में लगा दी गई है। गांव वालों की मानें तो बाघ अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए हुए हैं।