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खेतों में फिर दिखे बाघ के पग चिन्ह
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:53 PM IST
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tiger
मोहम्मदी महेशपुर वन क्षेत्र में बाघ दिखाई देने से गांव सुंदरपुर, अयोध्यापुर, गंगापुर, परबस्तनगर, घमहाघाट में दहशत है। बाघ अपना ठिकाना कठिना नदी की झाड़ी और गन्ने के खेतों में बनाए है। हालत यह है कि लोग ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर बने मचान पर सवार होकर खेतों को जा रहे हैं।
क्षेत्रवासियों की मानें तो पहली जून को दूलीपुर के गजराज पर हमला कर घायल करने, 17 जून को बछड़े को निवाला बनाने, 18 जून को सुंदरपुर के किसान बालकराम को मार गिराने के बाद भी बाघ हटने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे ग्रामीण घरों में कैद रहने के लिए विवश हैं। प्रधान रामबिलास चौधरी, बीडीसी रामकुमार वर्मा, पूर्व प्रधान सप्पू वर्मा, रामस्वरूप आदि का कहना है कि इस विषय को लेकर डब्लूटीआई टीम के वैैैज्ञानिक, वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर के वनकर्मियों, एसडीओ रविशंकर शुक्ला के साथ गांव पहुंचकर दो बार बैठक कर चुके हैं। बाघ की सीसीटीवी फुटेज को लखनऊ भेज चुके हैं। इतना सब होने के बाद भी बाघ के पगचिह्न खेतों में मिल रहे हैं। फारेस्टर रामप्रसाद, राजकुमार आदि वनकर्मियों का कहना है कि गांववाले जो लोकेशन बता रहे हैं उससे इंकार नहीं किया जा सकता है। गन्ने का एरिया अधिक है, जिसमें घुसने की हिम्मत नहीं हो रही है। वनकर्मियों की टीम गन्ने के खेत के बाहर बाघ की निगरानी कर रही है। साथ ही गांववालों को खेतों में समूह बनाकर जाने की सलाह दी जा रही है।
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क्षेत्रवासियों की मानें तो पहली जून को दूलीपुर के गजराज पर हमला कर घायल करने, 17 जून को बछड़े को निवाला बनाने, 18 जून को सुंदरपुर के किसान बालकराम को मार गिराने के बाद भी बाघ हटने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे ग्रामीण घरों में कैद रहने के लिए विवश हैं। प्रधान रामबिलास चौधरी, बीडीसी रामकुमार वर्मा, पूर्व प्रधान सप्पू वर्मा, रामस्वरूप आदि का कहना है कि इस विषय को लेकर डब्लूटीआई टीम के वैैैज्ञानिक, वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर के वनकर्मियों, एसडीओ रविशंकर शुक्ला के साथ गांव पहुंचकर दो बार बैठक कर चुके हैं। बाघ की सीसीटीवी फुटेज को लखनऊ भेज चुके हैं। इतना सब होने के बाद भी बाघ के पगचिह्न खेतों में मिल रहे हैं। फारेस्टर रामप्रसाद, राजकुमार आदि वनकर्मियों का कहना है कि गांववाले जो लोकेशन बता रहे हैं उससे इंकार नहीं किया जा सकता है। गन्ने का एरिया अधिक है, जिसमें घुसने की हिम्मत नहीं हो रही है। वनकर्मियों की टीम गन्ने के खेत के बाहर बाघ की निगरानी कर रही है। साथ ही गांववालों को खेतों में समूह बनाकर जाने की सलाह दी जा रही है।
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