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बीमारियों से कराह रहे लोग,स्वास्थ सुविधाओं का है टोटा
Updated Fri, 16 Feb 2018 10:00 AM IST
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बीमारियों से कराह रहे लोग,
स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा
कहने को तो है सीएचसी पर न विशेषज्ञ डॉक्टर और न सर्जन
आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का भी नहीं है कोई इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज।
मौसम के बदलाव और इलाके में पसरी गंदगी से बीमारियां पैर पसार रही हैं। गांवों में बीमारियों से कराह रहे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके बांकेगंज सीएचसी में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न दवाएं। इसके चलते गंभीर बीमार रोगियों को भी झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सर्दी के मौसम का उतार और गर्मी के इस संधिकाल में इलाके में बीमारियां बढ़ रहीं हैं। खांसी, जुकाम, बुखार आदि के साथ-साथ गांवों में पसरी गंदगी के चलते लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बांकेगंज सीएचसी पर आने वाले मरीजों को देंखे तो इन दिनों आम दिनों की अपेक्षा पचास फीसदी रोगियों की संख्या बढ़ी है। करोड़ों रुपये खर्च के बाद बनी बांकेगंज सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है।
सामान्य फिजीशियन मात्र तीन, पैरामेडिकल स्टाफ भी कम
विशेषज्ञ डॉक्टरों की बात तो जाने दीजिए, सामान्य फिजीशियन मात्र तीन हैं। पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। संविदा कर्मियों के भरोसे अस्पताल का काम काज चलाया जाता है। उधर, अस्पताल में दवाओं की कमी के चलते मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के न मिलने और अस्पताल में ठीक ढंग से इलाज न हो पाने से मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिनके इलाज से मर्ज ठीक होने के बजाय और बढ़ जाता है।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों की है कमी
इससे पहले बांकेगंज इलाके के लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पीएचसी बनी थी। वर्ष 2008 में यह अस्पताल सीएचसी में तब्दील हो गया। सीएचसी बनते ही गांव के लोगों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी थी। दस साल बीतने के बाद भी यहां आज तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती न होने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया, जिसके चलते लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए यहां से 50 किलोमीटर लंबी दौड़ लगाकर जिला चिकित्सालय भागना पड़ता है।
कहने को सीएचसी पर सर्जन नहीं
बांकेगंज सीएचसी पर कोई सर्जन की तैनाती न होने से यहां इलाज के लिए आने वाले लोगों को शरीर में पैदा हुई बीमारियों के निदान के उपाय और सड़क दुर्घटना में घायल लोगों का सीएचसी में ऑपरेशन न होने से बीमारों और तीमारदारों को परेशानियां उठानी पड़ती है।
महिला और बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं
सीएचसी में महिला चिकित्सक और बाल रोग विशेषज्ञ का टोटा है, जिसके चलते यहां संस्थागत प्रसव को आने वाली महिलाओं के प्रसव स्टॉफ नर्स कराती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के नियमित जांच और इलाज का जिम्मा भी इन्हीं के कंधे पर है। केस बिगड़ने पर प्रसूताओं को जिला महिला चिकित्सालय भागना पड़ता है।
धूल फांक रहे उपकरण..
सीएचसी में कोई डेन्टिस्ट की तैनाती न होने से यहां लोगों के दांतों में होने वाले रोगो की जांच के लिए आए उपकरण सीएचसी में धूल फांक रहे है। दंत चिकित्सक न होने से दांतों में होने वाली तकलीफ के इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।
इस मौसम में यह हो सकती हैं बीमारियां
बांकेगंज सीएचसी के फिजीशियन डॉ. सामंत राव सामी का कहना है कि बदलते मौसम में लोगों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। सावधानी न बरतने से सेहत बिगड़ सकती है। उन्होंने बताया कि बारिश से सर्दी बढ़ी है। ऐसे में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। खासकर ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। बहुत जरूरी हो तो पर्याप्त गर्म कपड़े पहन कर निकलें। खासी, जुकाम, बुखार आदि होने पर सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की सलाह के बाद दवाई का सेवन करें। झोलाछाप से दूरी बनाएं।
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। सीएचसी में दवाओं का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में है। लोगों को सलाह दी जाती है कि बीमार पड़ने पर सरकारी अस्पताल में आकर इलाज कराएं।
- डॉ. सुशील कुमार नरवरिया, अधीक्षक-सीएचसीए बांकेगंज
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बीमारियों से कराह रहे लोग,
स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा
कहने को तो है सीएचसी पर न विशेषज्ञ डॉक्टर और न सर्जन
आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का भी नहीं है कोई इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज।
मौसम के बदलाव और इलाके में पसरी गंदगी से बीमारियां पैर पसार रही हैं। गांवों में बीमारियों से कराह रहे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके बांकेगंज सीएचसी में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न दवाएं। इसके चलते गंभीर बीमार रोगियों को भी झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सर्दी के मौसम का उतार और गर्मी के इस संधिकाल में इलाके में बीमारियां बढ़ रहीं हैं। खांसी, जुकाम, बुखार आदि के साथ-साथ गांवों में पसरी गंदगी के चलते लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बांकेगंज सीएचसी पर आने वाले मरीजों को देंखे तो इन दिनों आम दिनों की अपेक्षा पचास फीसदी रोगियों की संख्या बढ़ी है। करोड़ों रुपये खर्च के बाद बनी बांकेगंज सीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है।
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सामान्य फिजीशियन मात्र तीन, पैरामेडिकल स्टाफ भी कम
विशेषज्ञ डॉक्टरों की बात तो जाने दीजिए, सामान्य फिजीशियन मात्र तीन हैं। पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। संविदा कर्मियों के भरोसे अस्पताल का काम काज चलाया जाता है। उधर, अस्पताल में दवाओं की कमी के चलते मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के न मिलने और अस्पताल में ठीक ढंग से इलाज न हो पाने से मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिनके इलाज से मर्ज ठीक होने के बजाय और बढ़ जाता है।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों की है कमी
इससे पहले बांकेगंज इलाके के लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पीएचसी बनी थी। वर्ष 2008 में यह अस्पताल सीएचसी में तब्दील हो गया। सीएचसी बनते ही गांव के लोगों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी थी। दस साल बीतने के बाद भी यहां आज तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती न होने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया, जिसके चलते लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए यहां से 50 किलोमीटर लंबी दौड़ लगाकर जिला चिकित्सालय भागना पड़ता है।
कहने को सीएचसी पर सर्जन नहीं
बांकेगंज सीएचसी पर कोई सर्जन की तैनाती न होने से यहां इलाज के लिए आने वाले लोगों को शरीर में पैदा हुई बीमारियों के निदान के उपाय और सड़क दुर्घटना में घायल लोगों का सीएचसी में ऑपरेशन न होने से बीमारों और तीमारदारों को परेशानियां उठानी पड़ती है।
महिला और बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं
सीएचसी में महिला चिकित्सक और बाल रोग विशेषज्ञ का टोटा है, जिसके चलते यहां संस्थागत प्रसव को आने वाली महिलाओं के प्रसव स्टॉफ नर्स कराती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के नियमित जांच और इलाज का जिम्मा भी इन्हीं के कंधे पर है। केस बिगड़ने पर प्रसूताओं को जिला महिला चिकित्सालय भागना पड़ता है।
धूल फांक रहे उपकरण..
सीएचसी में कोई डेन्टिस्ट की तैनाती न होने से यहां लोगों के दांतों में होने वाले रोगो की जांच के लिए आए उपकरण सीएचसी में धूल फांक रहे है। दंत चिकित्सक न होने से दांतों में होने वाली तकलीफ के इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।
इस मौसम में यह हो सकती हैं बीमारियां
बांकेगंज सीएचसी के फिजीशियन डॉ. सामंत राव सामी का कहना है कि बदलते मौसम में लोगों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। सावधानी न बरतने से सेहत बिगड़ सकती है। उन्होंने बताया कि बारिश से सर्दी बढ़ी है। ऐसे में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। खासकर ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। बहुत जरूरी हो तो पर्याप्त गर्म कपड़े पहन कर निकलें। खासी, जुकाम, बुखार आदि होने पर सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की सलाह के बाद दवाई का सेवन करें। झोलाछाप से दूरी बनाएं।
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। सीएचसी में दवाओं का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में है। लोगों को सलाह दी जाती है कि बीमार पड़ने पर सरकारी अस्पताल में आकर इलाज कराएं।
- डॉ. सुशील कुमार नरवरिया, अधीक्षक-सीएचसीए बांकेगंज