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घाघरा नदी की जद में 132 केवीए टॉवर आया, बचाव में जुटा विभाग

Sat, 18 Jul 2020 02:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2020 02:07 AM IST
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132 KVA tower comes in the wake of river Ghaghra, Department engaged in rescue
धौरहरा क्षेत्र में कटान की जद में आया बिजली टावर। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। नानपारा (बहराइच) से धौरहरा और पलिया को जोड़ने वाले 132 केवीए का 41 नंबर विद्युत टॉवर पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। घाघरा नदी की तेज धार टॉवर को कभी भी बहा ले जा सकती है। यदि यह टॉवर नदी में गिरा तो धौरहरा, नानपारा, बहराइच तक बिजली ठप होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि बाढ़ खंड विभाग इसे बचाने की पुरजोर कोशिश में जुट गया है।
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बरसात आते ही क्षेत्र की प्रमुख नदियां घाघरा और शारदा विनाश लीला शुरू कर देती हैं। इन नदियों ने बहराइच और खीरी की सीमावर्ती कृषि योग्य सैकड़ों एकड़ जमीन निगल ली है। इससे बहराइच के नानपारा और धौरहरा तहसील क्षेत्र के किसानों में सीमा विवाद भी पैदा हो गया है। हाल ही में नानपारा और धौरहरा के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से पैमाइश भी की, लेकिन नतीजा बेअसर रहा। अब कटान का संकट बिजली टॉवर पर भी मंडराने लगा है। धौरहरा और नानपारा तहसील सीमा के जालिम नगर पुल के पास लगे 41 नंबर 132 केवीए का टॉवर घाघरा नदी की जद में आ चुका है। टॉवर से नदी चंद कदम की दूरी पर तेजी से कटान कर रही है। बढ़ते भू कटान को देखकर बाढ़ खंड विभाग ने बचाव कार्य भी तेजी से शुरू किया है, लेकिन यह कार्य कारगर साबित होता नहीं दिख रहा। यदि यह टॉवर नदी में गिर गया तो नानपारा, बहराइच सहित धौरहरा क्षेत्र में बिजली गुल हो सकती है। बचाव कार्य में लगे जेई बाढ़ खंड राकेश वर्मा ने बताया कि कटान काफी तेज है। बम्बू केरेट लगा कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। नदी का बहाव तेज होने से बोरियां नदी में बह जा रही हैं, लेकिन हम जल्द ही कटान रोकने में सफल होंगे।
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जलस्तर तो घट रहा लेकिन रास्तों से नहीं उतर रहा पानी
पलियाकलां। शारदा नदी का जलस्तर बीते चार दिनों से लगातार गिर रहा है। नदी का जलस्तर तो कम हो रहा है लेकिन गांवों और खेतों की ओर जाने वाले रास्तों पर अब भी जलभराव है। जिससे लोग खतरा उठाकर गांव व खेतों की ओर जा रहे हैं। इमलिया फार्म में लोग ट्रैक्टर, बैलगाड़ी से होकर गांव जाने को विवश हैं। नदी हालांकि घट रही है जिससे उम्मीद है कि कुछ दिनों में यह रास्ता खुल जाएगा।
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बता दें कि पहाड़ों पर हुई बारिश तथा इलाके में हुई बरसात के बाद शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया था। लेकिन धीरे-धीरे नदी का जलस्तर घटने लगा और बीते चार दिनों से नदी खतरे के निशान से काफी नीचे पहुंच गई। जल आयोग के केके प्रजापति ने बताया कि नदी बीते दिनों से स्थिर है, जलस्तर में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उधर शारदा नदी का जलस्तर घट तो रहा है लेकिन इमलिया फार्म व बोझवा ठोकर नंबर एक पर अब भी पानी भरा हुआ है। इमलिया फार्म जाने वाले रास्ते पर पानी भरने से लोग बैलगाड़ी, नाव व ट्रैक्टर से गांव जा रहे हैं। अगर ऐसा न करे तो उनको भीरा का लंबा चक्कर काटकर पलिया की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके अलावा बोझवा ठोकर नंबर एक के रास्ते से होकर ग्रामीण अपने खेतों में जाते हैं लेकिन जलभराव होने से उनकी फसलों को तो नुकसान हुआ ही है साथ में वह खेतों से मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं।
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