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दुधवा में हाथियों के स्वास्थ्य परीक्षण का कैंप हुआ शुरू
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दुधवा में हाथियों के स्वास्थ्य परीक्षण का कैंप हुआ शुरू
पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व में रहने वाले पालतू हाथियों का पार्क प्रशासन बेहतर ढंग से ख्याल रख रहा है। पार्क अधिकारियों ने हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए तीन दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें हाथियों के खून, गोबर, मूत्र आदि की जांच की गई तथा उन्हें जरूरी विटामिन, मिनरल सहित दवाएं दी गईं। स्वास्थ्य परीक्षण में हाथियों का वजन पुराने वजन की अपेक्षा काफी बेहतर निकला। सोमवार को भीरा के वन डिपो में मौजूद कर्नाटक से आए हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
बता दें कि हाथियों के संरक्षण के लिए दुधवा नेशनल पार्क के एफडी रमेश पांडेय काफी सतर्कता बरत रहे हैं। बटालिक की मौत के बाद से हाथियों के स्वास्थ्य परीक्षण का बेहतर ख्याल रखा जा रहा है। इसी को लेकर बीते जुलाई में हाथियों के स्वास्थ्य परीक्षण कैंप का आयोजन किया गया था। एफडी के निर्देश पर छह माह बाद फिर से हाथियों के तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें पहले दिन दुधवा के सलूकापुर में सैलानियों के सेवा में जुटे हाथियों का परीक्षण किया। हेल्थ कैंप में विटनरी इंस्टीट्यूट गुवाहटी असम के हेड आफ प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा के साथ ही वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के डॉक्टरों की मदद से बारी-बारी से स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। भीरा वन निगम डिपो में मौजूद हाथियों का वजन कराया गया जिसमें वह एकदम फिट मिले। इसको लेकर पार्क के एफडी रमेश पांडेय ने बताया कि हाथियों के पेट में कीड़े हो जाते हैं जिनको खत्म करने के लिए उनका रेगुलर स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी है। बताया कि कुछ कीड़े ऐसे होते हैं जिनको खत्म करना जरूरी होता है क्योंकि बाद में वह हाथियों के सेहत पर असर डालने लगते हैं। एफडी ने बताया कि पेट्रोलिंग वाले हाथियों का रेगुलर हेल्थ चेकअप, खानपान की व्यवस्था इसी के तहत आती है जिसमें देखा जाता है कि इनके अंदर कोई कमी तो नहीं है। इसके लिए काजीरंगा से भी डॉक्टरों को बुलाया गया है। सोमवार को शिविर के दूसरे दिन वन निगम के सभी हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
दुधवा में कुल 23 हाथियों की है संख्या
दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 23 हाथी रहते हैं। इसमें 10 भीरा के वन निगम डिपो में हैं। जिसमें एक नन्ही दुर्गा दुधवा में मौजूद है। इसके अलावा सलूकापुर में 12 हाथी हैं। सलूकापुर में छह, बेस कैंप में दो तथा गैंडा पुर्नवास के भादीताल में दो हाथी देखभाल के लिए लगे हुए हैं।
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छह माह बाद फिर होगा परीक्षण
एफडी रमेश पांडेय ने बताया कि हाथियों का विशेष ख्याल रखने के लिए ही स्वास्थ्य परीक्षण कैंप का आयोजन किया जाता है। जो अब हर छह माह आयोजित किया जाएगा। बताया कि छह माह बाद दोबारा से स्वास्थ्य परीक्षण कर उनमें हो रहे बदलावों को देखा जाएगा।
महावतों को भी दी जाएगी ट्रेनिंग
एफडी रमेश पांडेय ने बताया कि दुधवा में हाथियों की देखभाल करने के लिए उनके महावतों को भी ट्रेनिंग की जरूरत होती है। ऐसा इसीलिए क्योंकि कुछ महावत हाथियों को क्रूर तरीके से चलाते हैं जिससे हाथियों के व्यवहार में भी बदलाव आता है। साथ ही जंगली हाथियों के आने पर क्या किया जाए इसके बारे में भी महावतों को प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। इसी के तहत महावतों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व में रहने वाले पालतू हाथियों का पार्क प्रशासन बेहतर ढंग से ख्याल रख रहा है। पार्क अधिकारियों ने हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए तीन दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें हाथियों के खून, गोबर, मूत्र आदि की जांच की गई तथा उन्हें जरूरी विटामिन, मिनरल सहित दवाएं दी गईं। स्वास्थ्य परीक्षण में हाथियों का वजन पुराने वजन की अपेक्षा काफी बेहतर निकला। सोमवार को भीरा के वन डिपो में मौजूद कर्नाटक से आए हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
बता दें कि हाथियों के संरक्षण के लिए दुधवा नेशनल पार्क के एफडी रमेश पांडेय काफी सतर्कता बरत रहे हैं। बटालिक की मौत के बाद से हाथियों के स्वास्थ्य परीक्षण का बेहतर ख्याल रखा जा रहा है। इसी को लेकर बीते जुलाई में हाथियों के स्वास्थ्य परीक्षण कैंप का आयोजन किया गया था। एफडी के निर्देश पर छह माह बाद फिर से हाथियों के तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें पहले दिन दुधवा के सलूकापुर में सैलानियों के सेवा में जुटे हाथियों का परीक्षण किया। हेल्थ कैंप में विटनरी इंस्टीट्यूट गुवाहटी असम के हेड आफ प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा के साथ ही वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के डॉक्टरों की मदद से बारी-बारी से स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। भीरा वन निगम डिपो में मौजूद हाथियों का वजन कराया गया जिसमें वह एकदम फिट मिले। इसको लेकर पार्क के एफडी रमेश पांडेय ने बताया कि हाथियों के पेट में कीड़े हो जाते हैं जिनको खत्म करने के लिए उनका रेगुलर स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी है। बताया कि कुछ कीड़े ऐसे होते हैं जिनको खत्म करना जरूरी होता है क्योंकि बाद में वह हाथियों के सेहत पर असर डालने लगते हैं। एफडी ने बताया कि पेट्रोलिंग वाले हाथियों का रेगुलर हेल्थ चेकअप, खानपान की व्यवस्था इसी के तहत आती है जिसमें देखा जाता है कि इनके अंदर कोई कमी तो नहीं है। इसके लिए काजीरंगा से भी डॉक्टरों को बुलाया गया है। सोमवार को शिविर के दूसरे दिन वन निगम के सभी हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
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दुधवा में कुल 23 हाथियों की है संख्या
दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 23 हाथी रहते हैं। इसमें 10 भीरा के वन निगम डिपो में हैं। जिसमें एक नन्ही दुर्गा दुधवा में मौजूद है। इसके अलावा सलूकापुर में 12 हाथी हैं। सलूकापुर में छह, बेस कैंप में दो तथा गैंडा पुर्नवास के भादीताल में दो हाथी देखभाल के लिए लगे हुए हैं।
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छह माह बाद फिर होगा परीक्षण
एफडी रमेश पांडेय ने बताया कि हाथियों का विशेष ख्याल रखने के लिए ही स्वास्थ्य परीक्षण कैंप का आयोजन किया जाता है। जो अब हर छह माह आयोजित किया जाएगा। बताया कि छह माह बाद दोबारा से स्वास्थ्य परीक्षण कर उनमें हो रहे बदलावों को देखा जाएगा।
महावतों को भी दी जाएगी ट्रेनिंग
एफडी रमेश पांडेय ने बताया कि दुधवा में हाथियों की देखभाल करने के लिए उनके महावतों को भी ट्रेनिंग की जरूरत होती है। ऐसा इसीलिए क्योंकि कुछ महावत हाथियों को क्रूर तरीके से चलाते हैं जिससे हाथियों के व्यवहार में भी बदलाव आता है। साथ ही जंगली हाथियों के आने पर क्या किया जाए इसके बारे में भी महावतों को प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। इसी के तहत महावतों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।