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बाघों की सल्तनत में तरक्की के कुलाचे भर रहा हरदुआ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 29 Jan 2018 06:57 PM IST
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बाघों की सल्तनत में बसी ब्लॉक की नवसृजित ग्राम पंचायत हरदुआ जंगल के परिवेश में भी तरक्की के रास्ते पर बढ़ रही है। दो मजरों वाली छोटी सी ग्राम पंचायत का सृजन वर्ष 2015 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में नए परिसीमन के दौरान हुआ था। ग्राम पंचायत के बीच से होकर बहने वाला बरौछा नाला न केवल इस पंचायत की लाइफ लाइन है, बल्कि ग्राम पंचायत के प्राकृतिक सौंदर्य को भी बढ़ाता है। बरौंछा नाले का किनारा बाघों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। नई ग्राम पंचायत का दर्जा मिलने के बाद जंगल किनारे बसी इस पंचायत में विकास का मंगल शुरू हो गया है।
हरदुआ ग्राम पंचायत से सट कर निकले बरौछा नाला के भदरकुंड इलाके में उगी ऊंची-ऊंची नरकुल की घास लगी है, जो हमेशा से बाघों का पसंदीदा आवास रहा है। वन विभाग के अधिकारी और बाघों की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन करने वाले वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते हैं कि प्रसव के समय इस इलाके की बाघिन भदरकुंड में अपना बसेरा बना लेती है।
प्रसव के लिए बाघिनों का यह अनुकूल स्थल माना जाता है। इस इलाके में चीतल, बारहसिंघा, पाढ़ा आदि प्रजातियों के हिरनों के अलावा अन्य वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। वन्यजीवों के साथ रहते हुए इस पंचायत के लोग प्रकृति से काफी जुड़े हैं। आए दिन बाघ-बाघिन और अन्य हिंसक वन्यजीव आबादी के निकट तक पहुंच जाते हैं। यहां के लोग इनकी सुरक्षा के प्रति सजग हैं।
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दो मजरों की 1132 की आबादी वाली इस ग्राम पंचायत में पिछले दो साल के अंदर काफी विकास कार्य हुए हैं। दोनों मजरों में 220 मीटर खड़ंजा लगा हुआ है। 600 मीटर खड़ंजा प्रस्तावित है। ग्रामीणों को छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों के 18 आवास बनवाए जा रहे हैं। इसमें पांच आवास बनकर तैयार हो गए हैं। गांव को साफ-सुथरा रखने और लोगों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए 191 शौचालय प्रस्तावित हैं। इसमें 117 बनकर तैयार हो गए है। दो मजरों वाली इस पंचायत में 190 जॉबकार्ड धारक हैं। इस पंचायत में दो प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक स्कूल है।
ये हैं ग्राम पंचायत की समस्याएं
- पक्की सड़कों की समस्या।
- बरौछा नाला की सफाई न होने से फसलों में भरता है पानी।
- जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान।
- बाघ, तेंदुआ आदि हिंसक वन्यजीवों के हमलों का खतरा।
- ग्राम पंचायत के किसी मजरें में इंटरलॉकिंग रोड नहीं।
विवाद रहित ग्राम पंचायत हो तो आए खुशहाली
बरौछा नाले की सीपेज से गांव के आसपास के खेत खराब हो रहे हैं। बरौंछा नाले की खुदाई और सफाई मेरी प्राथमिकता है। गांव में होने वाले आपसी विवाद सुलझाने के लिए कोर्ट कचहरी और पुलिस के चक्कर में ग्रामीण अक्सर कंगाल हो जाते हैं। मेरी कोशिश यह है कि छोटे मोटे विवाद आपस में सुलझाकर विवाद रहित ग्राम पंचायत बने, ताकि तरक्की को नए आयाम मिलें और गांव के लोग खुशहाल हों।
- राम किशुन, ग्राम प्रधान।
नई ग्राम पंचायत बनने के बाद तेजी से हुआ विकास
ग्राम पंचायत हरदुआ इससे पहले जटपुरा ग्राम पंचायत का एक हिस्सा थी। वर्ष 2015 में नई पंचायत के रूप में आकार लेने के बाद यहां तेजी से विकास शुरू हुआ है। गांव के कच्चे रस्तों पर खड़ंजे लगाए जा रहे हैं। पंचायत को साफ-सुथरा रखने को शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है।
- इंद्रजीत, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी।
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हरदुआ ग्राम पंचायत से सट कर निकले बरौछा नाला के भदरकुंड इलाके में उगी ऊंची-ऊंची नरकुल की घास लगी है, जो हमेशा से बाघों का पसंदीदा आवास रहा है। वन विभाग के अधिकारी और बाघों की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन करने वाले वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते हैं कि प्रसव के समय इस इलाके की बाघिन भदरकुंड में अपना बसेरा बना लेती है।
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प्रसव के लिए बाघिनों का यह अनुकूल स्थल माना जाता है। इस इलाके में चीतल, बारहसिंघा, पाढ़ा आदि प्रजातियों के हिरनों के अलावा अन्य वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। वन्यजीवों के साथ रहते हुए इस पंचायत के लोग प्रकृति से काफी जुड़े हैं। आए दिन बाघ-बाघिन और अन्य हिंसक वन्यजीव आबादी के निकट तक पहुंच जाते हैं। यहां के लोग इनकी सुरक्षा के प्रति सजग हैं।
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दो मजरों की 1132 की आबादी वाली इस ग्राम पंचायत में पिछले दो साल के अंदर काफी विकास कार्य हुए हैं। दोनों मजरों में 220 मीटर खड़ंजा लगा हुआ है। 600 मीटर खड़ंजा प्रस्तावित है। ग्रामीणों को छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों के 18 आवास बनवाए जा रहे हैं। इसमें पांच आवास बनकर तैयार हो गए हैं। गांव को साफ-सुथरा रखने और लोगों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए 191 शौचालय प्रस्तावित हैं। इसमें 117 बनकर तैयार हो गए है। दो मजरों वाली इस पंचायत में 190 जॉबकार्ड धारक हैं। इस पंचायत में दो प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक स्कूल है।
ये हैं ग्राम पंचायत की समस्याएं
- पक्की सड़कों की समस्या।
- बरौछा नाला की सफाई न होने से फसलों में भरता है पानी।
- जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान।
- बाघ, तेंदुआ आदि हिंसक वन्यजीवों के हमलों का खतरा।
- ग्राम पंचायत के किसी मजरें में इंटरलॉकिंग रोड नहीं।
विवाद रहित ग्राम पंचायत हो तो आए खुशहाली
बरौछा नाले की सीपेज से गांव के आसपास के खेत खराब हो रहे हैं। बरौंछा नाले की खुदाई और सफाई मेरी प्राथमिकता है। गांव में होने वाले आपसी विवाद सुलझाने के लिए कोर्ट कचहरी और पुलिस के चक्कर में ग्रामीण अक्सर कंगाल हो जाते हैं। मेरी कोशिश यह है कि छोटे मोटे विवाद आपस में सुलझाकर विवाद रहित ग्राम पंचायत बने, ताकि तरक्की को नए आयाम मिलें और गांव के लोग खुशहाल हों।
- राम किशुन, ग्राम प्रधान।
नई ग्राम पंचायत बनने के बाद तेजी से हुआ विकास
ग्राम पंचायत हरदुआ इससे पहले जटपुरा ग्राम पंचायत का एक हिस्सा थी। वर्ष 2015 में नई पंचायत के रूप में आकार लेने के बाद यहां तेजी से विकास शुरू हुआ है। गांव के कच्चे रस्तों पर खड़ंजे लगाए जा रहे हैं। पंचायत को साफ-सुथरा रखने को शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है।
- इंद्रजीत, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी।