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ब्लू व्हेल गेम से दूर रहने के लिए छात्रों को स्कूल कर रहे जागरूक
Updated Mon, 18 Sep 2017 10:32 PM IST
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blue whale
- फोटो : blue whale
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लखीमपुर खीरी।
बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए ब्लू व्हेल गेम खतरनाक साबित हो रहा है। इस गेम से छात्रों को दूर रखने के लिए शासन ने स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिस पर स्कूलों में छात्रों को इस गेम से ही नहीं, बल्कि मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाने लगा है।
शासन के दिशा निर्देश के बाद छात्रों को इस जानलेवा गेम से दूर रखने के लिए स्कूल प्रबंधन भी सक्रिय हो गए हैं। स्कूलों में छात्रों को ब्लू व्हेल गेम से दूर रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है और उनका मानसिक स्तर बढ़ाने के लिए काउंसलिंग भी हो रही है। स्कूल में मोबाइल आदि लाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस गेम से अंजान अभिभावकों को भी स्कूल प्रबंधन ने पैरेंटस मीटिंग में अपने बच्चों को फोन आदि से दूर रखने की जानकारी दी जा रही है।
स्कूल में मोबाइल लाने पर है रोक
स्कूल में मोबाइल लाने पर रोक है। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि कोई भी छात्र स्कूल में मोबाइल आदि लेकर न आए, इसके लिए छात्रों की तलाशी तक ली जाती है। छात्रों को मोबाइल से दूर रहने के लिए उनकी कांउसलिंग कराई जा रही है।
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- सावित्री देवी, प्रधानाचार्या, केंद्रीय विद्यालय
मोबाइल प्रयोग के दौरान रखें नजर
छात्रों को मोबाइल, लैपटॉप के प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक किया जाता है। पैरेंटस मीटिंग में अभिभावकों से भी कहा जाता है कि वह मोबाइल आदि का प्रयोग करते समय बच्चों पर नजर रखें।
- जसमीत सिंह अजमानी, अजमानी इंटरनेशनल स्कूल
छात्रों की ली जा रही तलाशी
गेम को देखते हुए स्कूल में सतर्कता बढ़ा दी गई है, जिसके चलते अभियान चलाकर छात्रों की तलाशी ली जाती है। मोबाइल आदि मिलने पर उसे जब्त कर लिया जाता है और अभिभावकों को बुलाकर उनसे शिकायत की जाती है।
- स्वर्ण सिंह कंबोज, नवभारत पब्लिक इंटर कॉलेज
अभिभावक भी रखें नजर
स्कूल में तो मोबाइल लाने पर पूरी तरह से रोक हैं। अभिभावकों को भी घर पर बच्चों के मोबाइल आदि के प्रयोग पर नजर रखनी चाहिए। क्योंकि वैसे भी मोबाइल आदि का अधिक प्रयोग बच्चों के लिए नुकसानदेह है।
- विशाल सेठ, संचालक-सिटी मांटेसरी इंटर कॉलेज
सामने ही कराएं मोबाइल और लैपटॉप का प्रयोग
बच्चे जब लैपटॉप, मोबाइल का प्रयोग कर रहे हों तो अभिभावक स्वयं मौजूद रहें, जिससे मालूम होता रहे कि बच्चा उस पर क्या कर रहा है और कौन सा गेम खेल रहा है।
- रघुवीर सिंह यादव, विवेक ज्ञान स्थली विद्या मंदिर
50 स्टेज में पूरा होता है गेम
द ब्लू व्हेल गेम को 2013 में रूस से फिलिप बुडेकिन ने बनाया था। इस खेल में एक एडमिन होता है, जो खेलने वाले को अगले 50 दिन तक बताता रहता है कि उसे आगे क्या करना है। अंतिम दिन खेलने वाले को खुदकुशी करनी ही होती है और उससे पहले एक सेल्फी लेकर अपलोड भी करनी होती है।
गेम खेलने वाले को हर दिन एक कोड नंबर दिया जाता है, जो हॉरर से जुड़ा होता है। इसमें हाथ पर ब्लेड से एफ 57 लिखकर इसकी फोटो अपलोड करने के लिए कहा जाता है। इसके अलावा हर रोज के खेल के लिए एक कोड होता है, जो सुबह चार बजे ही ओपन हो सकता है। इस गेम का एडमिन स्काइप के जरिए गेम खेलने वाले से बात करता रहता है। हर टॉस्क के पूरा होने पर हाथ में एक कट लगाने को कहा जाता है और उसकी फोटो अपलोड करने को कहा जाता है। गेम का विनर उसे ही घोषित किया जाता है, जो अंतिम दिन जान दे देता है।
गेम छोड़ने पर मिलती है धमकी
अगर किसी ने एक बार गेम खेलना शुरू कर दिया, तो वो इसे बीच में नहीं छोड़ सकता। एक बार गेम शुरू हो जाने पर गेम खेलने वाले का फोन एडमिन हैक कर लेता है, जिससे फोन की सारी डिटेल उसके कब्जे में आ जाती है। अगर कोई बीच में गेम छोड़ना चाहे तो एडमिन की तरफ से धमकी मिलती रहती है कि उसे या फिर उसके माता-पिता को जान से मार दिया जाएगा।
मरने वालों को बॉयोलॉजिकल वेस्ट बताता है गेम मालिक
यह गेम 2013 में रूस में बना था, लेकिन सुसाइड का पहला मामला 2015 में आया था। इसके बाद गेम बनाने वाले फिलिप को जेल भेज दिया गया। जेल जाने के दौरान अपनी सफाई में फिलिप ने कहा था कि ये गेम समाज की सफाई के लिए है, जिन लोगों ने भी गेम की वजह से आत्महत्या की, वो बॉयोलॉजिकल वेस्ट थे।
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बच्चों, किशोरों और युवाओं के लिए ब्लू व्हेल गेम खतरनाक साबित हो रहा है। इस गेम से छात्रों को दूर रखने के लिए शासन ने स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिस पर स्कूलों में छात्रों को इस गेम से ही नहीं, बल्कि मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाने लगा है।
शासन के दिशा निर्देश के बाद छात्रों को इस जानलेवा गेम से दूर रखने के लिए स्कूल प्रबंधन भी सक्रिय हो गए हैं। स्कूलों में छात्रों को ब्लू व्हेल गेम से दूर रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है और उनका मानसिक स्तर बढ़ाने के लिए काउंसलिंग भी हो रही है। स्कूल में मोबाइल आदि लाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस गेम से अंजान अभिभावकों को भी स्कूल प्रबंधन ने पैरेंटस मीटिंग में अपने बच्चों को फोन आदि से दूर रखने की जानकारी दी जा रही है।
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स्कूल में मोबाइल लाने पर है रोक
स्कूल में मोबाइल लाने पर रोक है। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि कोई भी छात्र स्कूल में मोबाइल आदि लेकर न आए, इसके लिए छात्रों की तलाशी तक ली जाती है। छात्रों को मोबाइल से दूर रहने के लिए उनकी कांउसलिंग कराई जा रही है।
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- सावित्री देवी, प्रधानाचार्या, केंद्रीय विद्यालय
मोबाइल प्रयोग के दौरान रखें नजर
छात्रों को मोबाइल, लैपटॉप के प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक किया जाता है। पैरेंटस मीटिंग में अभिभावकों से भी कहा जाता है कि वह मोबाइल आदि का प्रयोग करते समय बच्चों पर नजर रखें।
- जसमीत सिंह अजमानी, अजमानी इंटरनेशनल स्कूल
छात्रों की ली जा रही तलाशी
गेम को देखते हुए स्कूल में सतर्कता बढ़ा दी गई है, जिसके चलते अभियान चलाकर छात्रों की तलाशी ली जाती है। मोबाइल आदि मिलने पर उसे जब्त कर लिया जाता है और अभिभावकों को बुलाकर उनसे शिकायत की जाती है।
- स्वर्ण सिंह कंबोज, नवभारत पब्लिक इंटर कॉलेज
अभिभावक भी रखें नजर
स्कूल में तो मोबाइल लाने पर पूरी तरह से रोक हैं। अभिभावकों को भी घर पर बच्चों के मोबाइल आदि के प्रयोग पर नजर रखनी चाहिए। क्योंकि वैसे भी मोबाइल आदि का अधिक प्रयोग बच्चों के लिए नुकसानदेह है।
- विशाल सेठ, संचालक-सिटी मांटेसरी इंटर कॉलेज
सामने ही कराएं मोबाइल और लैपटॉप का प्रयोग
बच्चे जब लैपटॉप, मोबाइल का प्रयोग कर रहे हों तो अभिभावक स्वयं मौजूद रहें, जिससे मालूम होता रहे कि बच्चा उस पर क्या कर रहा है और कौन सा गेम खेल रहा है।
- रघुवीर सिंह यादव, विवेक ज्ञान स्थली विद्या मंदिर
50 स्टेज में पूरा होता है गेम
द ब्लू व्हेल गेम को 2013 में रूस से फिलिप बुडेकिन ने बनाया था। इस खेल में एक एडमिन होता है, जो खेलने वाले को अगले 50 दिन तक बताता रहता है कि उसे आगे क्या करना है। अंतिम दिन खेलने वाले को खुदकुशी करनी ही होती है और उससे पहले एक सेल्फी लेकर अपलोड भी करनी होती है।
गेम खेलने वाले को हर दिन एक कोड नंबर दिया जाता है, जो हॉरर से जुड़ा होता है। इसमें हाथ पर ब्लेड से एफ 57 लिखकर इसकी फोटो अपलोड करने के लिए कहा जाता है। इसके अलावा हर रोज के खेल के लिए एक कोड होता है, जो सुबह चार बजे ही ओपन हो सकता है। इस गेम का एडमिन स्काइप के जरिए गेम खेलने वाले से बात करता रहता है। हर टॉस्क के पूरा होने पर हाथ में एक कट लगाने को कहा जाता है और उसकी फोटो अपलोड करने को कहा जाता है। गेम का विनर उसे ही घोषित किया जाता है, जो अंतिम दिन जान दे देता है।
गेम छोड़ने पर मिलती है धमकी
अगर किसी ने एक बार गेम खेलना शुरू कर दिया, तो वो इसे बीच में नहीं छोड़ सकता। एक बार गेम शुरू हो जाने पर गेम खेलने वाले का फोन एडमिन हैक कर लेता है, जिससे फोन की सारी डिटेल उसके कब्जे में आ जाती है। अगर कोई बीच में गेम छोड़ना चाहे तो एडमिन की तरफ से धमकी मिलती रहती है कि उसे या फिर उसके माता-पिता को जान से मार दिया जाएगा।
मरने वालों को बॉयोलॉजिकल वेस्ट बताता है गेम मालिक
यह गेम 2013 में रूस में बना था, लेकिन सुसाइड का पहला मामला 2015 में आया था। इसके बाद गेम बनाने वाले फिलिप को जेल भेज दिया गया। जेल जाने के दौरान अपनी सफाई में फिलिप ने कहा था कि ये गेम समाज की सफाई के लिए है, जिन लोगों ने भी गेम की वजह से आत्महत्या की, वो बॉयोलॉजिकल वेस्ट थे।