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सूखे तालाब, पानी के लिए भटक रहे वन्य जीव
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गोला गोकर्णनाथ। वैशाख की तपती गर्मी ने जहां आम जन को बेहाल कर दिया है, वहीं जंगलों में वन्य जीव भी इसकी जद में आ गए हैं। तालाबों में पानी न होने से वन्य जीवों को पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
वैशाख की तपती गर्मी का पारा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। अलसुबह से ही चिलचिलाती धूप और गर्म हवा के थपेड़ों से राह चलना दूभर हो गया है। महेशपुर रेंज की बिलहरी बीट के अंतर्गत जायका का छोटा सा जंगल का टुकड़ा है, जिसमें एक समिति भी गठित है। समिति में अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारी हैं। मगर जंगल को देखने कोई भी पदाधिकारी नहीं आता है। जिसके अभाव में सैकड़ों सूखे बेशकीमती शीशम के पेड़ सूख गए हैं, वही जंगल मे कई तालाबों की साफ सफाई न होने से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जिससे तालाब सूखे पड़े हैं। जंगलों में वन्य जीव लंगूर, नीलगाय, हिरन आदि जीवों को पीने के पानी की समस्या हो गई है। वन्य जीवों को पानी की तलाश में मीलों भटकना पड़ता है। पानी न मिलने से उनकी प्यास नहीं बुझ पा रही है। जंगलों के लगातार दोहन, बेजुबानों की बस्ती में इंसानों के बसेरों ने वन्य जीवों की जिंदगी पर डाका डाल दिया है। प्रकृति कि लगातार अनदेखी भी इन जीवों पर भारी पड़ रही है। जंगलों में जल स्रोत का कहीं अता पता नहीं है। ऐसी स्थिति में जंगली जीवों को पानी मिल पाना मुश्किल हो गया है। जंगलों में बने तालाब भी पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं।
बिझौली के रामेश्वर सिंह, जिला पंचायत सदस्य महेशचंद्र कनौजिया, बलराम सिंह, हरिपाल सिंह का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो वन्य जीव इंसानों की बस्ती में कूच कर जाएंगे।
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महेशपुर रेंज में वन्यजीवों के पानी के लिए सात वाटर होल बनवाए गए हैं। बेलहरी बीट के जायका जंगल में भी वाटर होल बनवाया जाएगा।
मोहम्मद आरिफ रेंजर मोहम्मदी महेशपुर।
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वैशाख की तपती गर्मी का पारा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। अलसुबह से ही चिलचिलाती धूप और गर्म हवा के थपेड़ों से राह चलना दूभर हो गया है। महेशपुर रेंज की बिलहरी बीट के अंतर्गत जायका का छोटा सा जंगल का टुकड़ा है, जिसमें एक समिति भी गठित है। समिति में अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारी हैं। मगर जंगल को देखने कोई भी पदाधिकारी नहीं आता है। जिसके अभाव में सैकड़ों सूखे बेशकीमती शीशम के पेड़ सूख गए हैं, वही जंगल मे कई तालाबों की साफ सफाई न होने से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जिससे तालाब सूखे पड़े हैं। जंगलों में वन्य जीव लंगूर, नीलगाय, हिरन आदि जीवों को पीने के पानी की समस्या हो गई है। वन्य जीवों को पानी की तलाश में मीलों भटकना पड़ता है। पानी न मिलने से उनकी प्यास नहीं बुझ पा रही है। जंगलों के लगातार दोहन, बेजुबानों की बस्ती में इंसानों के बसेरों ने वन्य जीवों की जिंदगी पर डाका डाल दिया है। प्रकृति कि लगातार अनदेखी भी इन जीवों पर भारी पड़ रही है। जंगलों में जल स्रोत का कहीं अता पता नहीं है। ऐसी स्थिति में जंगली जीवों को पानी मिल पाना मुश्किल हो गया है। जंगलों में बने तालाब भी पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं।
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बिझौली के रामेश्वर सिंह, जिला पंचायत सदस्य महेशचंद्र कनौजिया, बलराम सिंह, हरिपाल सिंह का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो वन्य जीव इंसानों की बस्ती में कूच कर जाएंगे।
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महेशपुर रेंज में वन्यजीवों के पानी के लिए सात वाटर होल बनवाए गए हैं। बेलहरी बीट के जायका जंगल में भी वाटर होल बनवाया जाएगा।
मोहम्मद आरिफ रेंजर मोहम्मदी महेशपुर।