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जीराबोझी कांड की सीबीआई जांच कराने की मांग
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लखीमपुर खीरी। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने जीराबोझी कांड में पुलिस के खुलासे को खारिज करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से मनमानी कर रहा है। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ रही है।
उन्होंने कहा कि पसगवां थाना क्षेत्र के गांव जीराबोझी में जिन दो नाबालिग बच्चियों के शव बिजली के टावर से लटकते हुए मिले थे उसमें पुलिस ने निर्दोष लोगों को फर्जी फंसाकर जेल भेज दिया है। मृतक लड़कियों के परिवार के ही सदस्यों को पुलिस ने वर्कआउट दिखाते हुए जेल भेजा है। यह तथ्य जिले के आम लोगों के साथ-साथ मृतक लड़कियों के परिवारीजन भी स्वीकार नही कर पा रहे है। पुलिस ने जिस तरह अबोध बच्चियों पर चारित्रिक दोष लगाया है वह घटना से भी घृणित कृत्य है।
पुलिस ने केस का खुलासा करने के लिए मनगढ़ंत तरीके से फर्जी तथ्यों का तानाबाना बुना है जो स्वीकार कर पाना संभव नहीं है।
जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री को सात सूत्री पत्र में इस घटना से संबंधित सभी तथ्यों को विस्तार से रखते हुए जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की लचर स्थिति से भी अवगत कराया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी लिखा है कि इस घटना में जो सही अभियुक्त है उनको पुलिस दबाव के कारण सामने नही ला पा रही है। इसीलिए घटना को घुमाकर फर्जी तरीके से मृतक बच्चियों के भाइयों को ही अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस के इस कृत्य से जिले के लोग पूरी तरह से प्रशासनिक अमले के खिलाफ हैं।
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मृतक बच्चियों के परिवार की मालेंद्री देवी ने प्रमुख सचिव गृह को एक शिकायती पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने मांग की, कि हमारे परिवार के निर्दोष लोगों को हमारी ही बच्चियों की हत्या में पुलिस फंसा रही है। जितिन प्रसाद ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराकर दोषी लोगों को जेल भेजने और परिवार के निर्दोष लोगों को मुक्त करने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि पसगवां थाना क्षेत्र के गांव जीराबोझी में जिन दो नाबालिग बच्चियों के शव बिजली के टावर से लटकते हुए मिले थे उसमें पुलिस ने निर्दोष लोगों को फर्जी फंसाकर जेल भेज दिया है। मृतक लड़कियों के परिवार के ही सदस्यों को पुलिस ने वर्कआउट दिखाते हुए जेल भेजा है। यह तथ्य जिले के आम लोगों के साथ-साथ मृतक लड़कियों के परिवारीजन भी स्वीकार नही कर पा रहे है। पुलिस ने जिस तरह अबोध बच्चियों पर चारित्रिक दोष लगाया है वह घटना से भी घृणित कृत्य है।
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पुलिस ने केस का खुलासा करने के लिए मनगढ़ंत तरीके से फर्जी तथ्यों का तानाबाना बुना है जो स्वीकार कर पाना संभव नहीं है।
जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री को सात सूत्री पत्र में इस घटना से संबंधित सभी तथ्यों को विस्तार से रखते हुए जिले की प्रशासनिक व्यवस्था की लचर स्थिति से भी अवगत कराया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी लिखा है कि इस घटना में जो सही अभियुक्त है उनको पुलिस दबाव के कारण सामने नही ला पा रही है। इसीलिए घटना को घुमाकर फर्जी तरीके से मृतक बच्चियों के भाइयों को ही अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस के इस कृत्य से जिले के लोग पूरी तरह से प्रशासनिक अमले के खिलाफ हैं।
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मृतक बच्चियों के परिवार की मालेंद्री देवी ने प्रमुख सचिव गृह को एक शिकायती पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने मांग की, कि हमारे परिवार के निर्दोष लोगों को हमारी ही बच्चियों की हत्या में पुलिस फंसा रही है। जितिन प्रसाद ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराकर दोषी लोगों को जेल भेजने और परिवार के निर्दोष लोगों को मुक्त करने की मांग की है।