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सुंदरपुर में दिखा बाघ, दहशत
Updated Mon, 06 Aug 2018 06:44 PM IST
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सुंदरपुर में फिर दिखा बाघ, दहशत
ममरी। सुंदरपुर गांव और घमहाघाट क्षेत्र में दो महीने के अंदर सात बार हमला कर चुका बाघ सोमवार सुबह सुंदरपुर गांव की आबादी से सटे प्रधान राम बिलास चौधरी के खेत में नीलगाय का पीछा करते देखे जाने से लोगों में फिर दशहत फैल गई। इस संबंध में सूचना मोहम्मदी महेशपुर रेंज के वनकर्मियों को दी गई है।
सुंदरपुर के बीडीसी रामकुमार वर्मा, रामसनेही, बाबूराम, सत्यपाल, अवधेश वर्मा आदि ने बताया कि आबादी से सटा प्रधान रामबिलास चौधरी का खेत है। सोमवार सुबह गांव के कुछ लोग टावर के पास बैठे थे, इसी दौरान लोगों ने एक बाघ को नीलगाय का पीछा करते देखा जिससे भगदड़ मच गई। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में दो महीने से दहशत का पर्याय बने बाघ ने पहली जून को दूलीपुर के युवक गजराज को घायल किया, 17 जून को एक बछड़े पर हमला हुआ, 18 जून को सुंदरपुर के बालकराम को बाघ ने मारा। छह जुलाई को एक बछड़े, 12 जुलाई को सियार, 29 जुलाई को एक गाय, 31 जुलाई को एक पड्डे को बाघ ने अपना शिकार बनाया। गांव के लोगों का कहना है कि बाघ अभी तक अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए हुए है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे राजकुमार आदि वनकर्मियों ने भी बाघ के गन्ने में मौजूद होने और पगचिह्न मिलने की पुष्टि की और बताया कि उसकी निगरानी की जा रही है। रेंजर बनारसीदास मौर्य का कहना है कि जंगल से गांव की दूरी महज डेढ़ किमी है। बाघ शिकार के पीछे वहां जा पहुंचा होगा। उन्होंने गांव वालों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
ममरी। सुंदरपुर गांव और घमहाघाट क्षेत्र में दो महीने के अंदर सात बार हमला कर चुका बाघ सोमवार सुबह सुंदरपुर गांव की आबादी से सटे प्रधान राम बिलास चौधरी के खेत में नीलगाय का पीछा करते देखे जाने से लोगों में फिर दशहत फैल गई। इस संबंध में सूचना मोहम्मदी महेशपुर रेंज के वनकर्मियों को दी गई है।
सुंदरपुर के बीडीसी रामकुमार वर्मा, रामसनेही, बाबूराम, सत्यपाल, अवधेश वर्मा आदि ने बताया कि आबादी से सटा प्रधान रामबिलास चौधरी का खेत है। सोमवार सुबह गांव के कुछ लोग टावर के पास बैठे थे, इसी दौरान लोगों ने एक बाघ को नीलगाय का पीछा करते देखा जिससे भगदड़ मच गई। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में दो महीने से दहशत का पर्याय बने बाघ ने पहली जून को दूलीपुर के युवक गजराज को घायल किया, 17 जून को एक बछड़े पर हमला हुआ, 18 जून को सुंदरपुर के बालकराम को बाघ ने मारा। छह जुलाई को एक बछड़े, 12 जुलाई को सियार, 29 जुलाई को एक गाय, 31 जुलाई को एक पड्डे को बाघ ने अपना शिकार बनाया। गांव के लोगों का कहना है कि बाघ अभी तक अपना ठिकाना गन्ने के खेतों में बनाए हुए है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे राजकुमार आदि वनकर्मियों ने भी बाघ के गन्ने में मौजूद होने और पगचिह्न मिलने की पुष्टि की और बताया कि उसकी निगरानी की जा रही है। रेंजर बनारसीदास मौर्य का कहना है कि जंगल से गांव की दूरी महज डेढ़ किमी है। बाघ शिकार के पीछे वहां जा पहुंचा होगा। उन्होंने गांव वालों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
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