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सोमवती अमवस्या: श्रद्धालुओं ने लगाई श्रद्धा की डुबकी
Updated Mon, 18 Dec 2017 11:29 PM IST
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सोमवती अमावस्या
- फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी। सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में डुबकी लगाई और भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। गरीबों और ब्राह्मणों को ऊनी कपड़े, अनाज, गुड़ और दक्षिणा आदि देकर पुण्य कमाया। महिलाओं ने पीपल पर धागा लपेटते हुए परिक्रमा कर अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की मांग की। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ।
शहर से सटे लिलौटीनाथ मंदिर पर सोमवती अमावस्या को भारी भीड़ जुटी। श्रद्धालुओं ने कंडवा और उल्ल नदी में स्नान करने के बाद प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक किया। लिलौटीनाथ मंदिर के अलावा शहर के भुइफोरवानाथ मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, ओयल के मेढ़क मंदिर समेत कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। लिलौटीनाथ मंदिर में दिन भर मेला लगा रहा।
गोला गोकर्णनाथ। पौराणिक शिव मंदिर में भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह ही स्थानीय और दूरदराज से आए भोलेनाथ के भक्त हाथों में भांग, धतूरा, पुष्प, दूध, शहद, मिष्ठान, बेलपत्र, पूजन सामग्री लेकर ओम नम: शिवाय जपते हुए कतार में लग गए। शिव भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और गोकर्ण तीर्थ पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुन दान-दक्षिणा कर पुण्य कमाया। बिझौली के निकट जमुनाबाद फार्म के ब्लाक नंबर दो स्थित फकीर बाबा देवस्थान पर सोमावती अमावस्या पर उल्ल नदी में स्नान कर फकीर बाबा की पूजा अर्चना की। सौंठन निवासी वेदप्रकाश ने विशाल भंडारे का आयोजन किया।
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धौरहरा। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी में डुबकी लगाई और शिव मंदिरों में जलाभिषेक किया। सोमवती अमावस्या पर पुरोहितों को श्रद्धालुओं ने तिल, तेल गुड़ का दान कर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी। महिलाओं ने सोमवती व्रत रख कर पीपल पूजन कर दान किया। कफारा के ऐतिहासिक श्री लीलानाथ मंदिर कस्बे के नागेश्वर नाथ मंदिर, नारायणेश्वर मंदिर, जंगलीनाथ मंदिरों मे श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मान्यता है कि सोमवार को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या पौष मास में पडने से इसका महत्व बढ़ जाता है। महिलाएं सोमवार का व्रत रखकर परिवार कल्याण के लिए पीपल के पेड़ में सूत का धागा लपेटती है और सुहाग सामग्री पुरोहितों को दान करती है। कफारा के श्री लीलानाथ मंदिर में सुबह से ही महिलाओं का तांता लगा रहा।
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शहर से सटे लिलौटीनाथ मंदिर पर सोमवती अमावस्या को भारी भीड़ जुटी। श्रद्धालुओं ने कंडवा और उल्ल नदी में स्नान करने के बाद प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक किया। लिलौटीनाथ मंदिर के अलावा शहर के भुइफोरवानाथ मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, ओयल के मेढ़क मंदिर समेत कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। लिलौटीनाथ मंदिर में दिन भर मेला लगा रहा।
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गोला गोकर्णनाथ। पौराणिक शिव मंदिर में भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह ही स्थानीय और दूरदराज से आए भोलेनाथ के भक्त हाथों में भांग, धतूरा, पुष्प, दूध, शहद, मिष्ठान, बेलपत्र, पूजन सामग्री लेकर ओम नम: शिवाय जपते हुए कतार में लग गए। शिव भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और गोकर्ण तीर्थ पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुन दान-दक्षिणा कर पुण्य कमाया। बिझौली के निकट जमुनाबाद फार्म के ब्लाक नंबर दो स्थित फकीर बाबा देवस्थान पर सोमावती अमावस्या पर उल्ल नदी में स्नान कर फकीर बाबा की पूजा अर्चना की। सौंठन निवासी वेदप्रकाश ने विशाल भंडारे का आयोजन किया।
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धौरहरा। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी में डुबकी लगाई और शिव मंदिरों में जलाभिषेक किया। सोमवती अमावस्या पर पुरोहितों को श्रद्धालुओं ने तिल, तेल गुड़ का दान कर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी। महिलाओं ने सोमवती व्रत रख कर पीपल पूजन कर दान किया। कफारा के ऐतिहासिक श्री लीलानाथ मंदिर कस्बे के नागेश्वर नाथ मंदिर, नारायणेश्वर मंदिर, जंगलीनाथ मंदिरों मे श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मान्यता है कि सोमवार को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या पौष मास में पडने से इसका महत्व बढ़ जाता है। महिलाएं सोमवार का व्रत रखकर परिवार कल्याण के लिए पीपल के पेड़ में सूत का धागा लपेटती है और सुहाग सामग्री पुरोहितों को दान करती है। कफारा के श्री लीलानाथ मंदिर में सुबह से ही महिलाओं का तांता लगा रहा।