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तीन मिलों की चीनी पर रहेगा सरकार का नियंत्रण
Updated Sun, 12 Nov 2017 10:26 PM IST
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लखीमपुर खीरी।
जिले की नौ चीनी मिलों में से बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिल की उत्पादित चीनी समेत सहउत्पादों को सरकार अपने नियंत्रण में ले लेगी। इसके लिए गन्ना आयुक्त के आदेश पर गन्ना विभाग ने इस्क्रो खाता खोलने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसका संचालन जिला गन्ना अधिकारी, संबंधित समिति के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक और मिल के अध्यासी के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। चीनी, शीरा, बैगास और प्रेसमड की बिक्री से प्राप्त होने वाली रकम इसी इस्क्रो खाते में जमा की जाएगी, जिसमें से 85 फीसदी धनराशि से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा।
तीन मिलों गोला, पलिया और खंभारखेड़ा की बैंक से सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) स्वीकृत नहीं हुई है। वजह है कि इन मिलों के डिफॉल्टर की सूची में डाले जाने से कोई भी बैंक इनकी सीसीएल स्वीकृत करने को तैयार नहीं है। बताते चलें कि पिछले साल जिला प्रशासन ने एसडीएम की अभिरक्षा में इन मिलों की चीनी को दिया था, ताकि किसानों को समय से भुगतान कराया जा सके, लेकिन चीनी मिल अध्यासी अपनी कारगुजारी दिखाते हुए किसानों को भुगतान करने के बजाय बैंक से रकम को दूसरे कार्यों में डायवर्ट कर देते थे। इससे किसानों को समय पर भुगतान कराना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था, क्योंकि डीएम के नोटिस का भी मिल प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ रहा था। नतीजतन पलिया मिल पर अभी तक पिछले पेराई सत्र का करीब 55 करोड़ रुपये किसानों का गन्ना मूल्य बकाया है।
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गोला, पलिया और खंभाखेड़ा मिल की बैंक द्वारा सीसीएल न किए जाने से इस्क्रो एकाउंट खोलने की प्रक्रिया की जा रही है। चीनी समेत सहउत्पादों की बिक्री से प्राप्त होने वाली धनराशि को इसी एकाउंट में जमा कराया जाएगा, जिसमें से 85 फीसदी धनराशि को आरटीजीएस के जरिए किसानों के खाते में भुगतान किया जाएगा। इस व्यवस्था से किसानों को समय पर भुगतान मिल सकेगा।
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- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी