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कसा शिकंजा...12 गन्ना माफियाओं पर मुकदमा दर्ज
Updated Sun, 07 Jan 2018 10:00 PM IST
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धौरहरा। क्षेत्र में अवैध रूप से तोल सेंटर लगाकर किसानों का गन्ना औने-पौने दामों पर खरीदे जाने के मामले में पुलिस ने 12 गन्ना माफिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। यह कार्रवाई गन्ना विकास समिति के सचिव द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर की गई है। इसके अलावा क्षेत्र में सक्रिय अन्य गन्ना माफिया के खिलाफ पुलिस जांच कर रही है, जल्द ही इन पर भी कार्रवाई संभव है।
चीनी मिल से तोल के लिए पर्चियां न मिलने से मजबूर किसानों का गन्ना औने-पौने दामों पर खरीदकर गन्ना माफिया मालामाल हो रहे हैं। इन माफिया ने बाकायदा अपने खरीद सेंटर भी बना रखे हैं, जहां से हजारों क्विंटल गन्ना प्रतिदिन चीनी मिलों को सप्लाई किया जा रहा है। इस मामले की शिकायत गन्ना आयुक्त से की गई थी, जिसके बाद गन्ना विकास समिति के सचिव टीएन यादव ने कुछ अवैध तोल सेंटरों को चिन्हित कर 12 गन्ना माफिया की सूची धौरहरा पुलिस को सौंपी थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बसंतापुर निवासी मिथिलेश कुमार, अवधराम, परमानंद, अखिलेश कुमार, राजीव कुमार, श्रीप्रकाश, राजेश कुमार, रामू पुत्र रामबख्स, रामू पुत्र मिश्रीलाल, मिश्रीलाल, बेलवा खरवहिया निवासी कमाल अहमद और करौंहा गांव निवासी शिवा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि कुछ अज्ञात लोग भी पुलिस के रडार पर आ चुके हैं।
गन्ना माफिया गन्ना खरीदकर कहां सप्लाई करते थे? इसकी जांच की जा रही है। इस मामले में मिल अधिकारी की संलिप्तता की जांच की जा रही है। 12 नामजद गन्ना माफिया के अलावा कई और माफिया चिन्हित किए जा रहे है। नामजदों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
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- बृजेश त्रिपाठी, प्रभारी कोतवाल
माफिया और मिल अधिकारियों के गठजोड़ ने तोड़ी किसानों की कमर
ऐरा, खंभारखेड़ा और गुलरिया मिल क्षेत्र में फैला है जाल
- अवैध सेंटरों पर खुलेआम होता है किसानों का शोषण
प्रेम जायसवाल
धौरहरा।
तहसील क्षेत्र में फैला गन्ना माफिया और चीनी मिल अधिकारियों/कर्मचारियों का गठजोड़ किसानों की कमर तोड़ रहा है। एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही हैं, तो दूसरी ओर खुलेआम गरीब किसानों का शोषण किया जा रहा है। खास यह है कि इससे अधिकारी भी अंजान नहीं हैं। अभी जिन 12 गन्ना माफिया के खिलाफ कार्रवाई हुई उसमें जिला प्रशासन या गन्ना विभाग का कोई खास रोल नहीं रहा है, बल्कि लखनऊ में बैठे गन्ना आयुक्त के निर्देश पर गन्ना माफिया के खिलाफ जिले में यह पहली कार्रवाई हुई है।
धौरहरा, रमियाबेहड़, ईसानगर ब्लॉक क्षेत्रों में गन्ना माफिया का बड़े पैमाने पर जाल फैला है, जो अवैध गन्ना सेंटर लगाकर मजबूर किसानों का गन्ना कम दामों पर खरीद लेते हैं। पड़ोसी जिला बहराइच के मिहिपुरवा ब्लॉक क्षेत्र से भी गन्ने की सप्लाई इस क्षेत्र के अवैध गन्ना सेंटरों पर की जाती है। इस क्षेत्र में प्रमुख रूप से ऐरा, खंभारखेड़ा और गुलरिया चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई की जाती है।
गन्ना माफिया के टारगेट पर लघु एवं सीमांत किसान रहते हैं, क्योंकि इन्हीं को चीनी मिलों से पर्चियां नहीं मिल पातीं। मजबूरन ऐसे किसानों को अपने परिवार की जरूरतों के आगे गन्ने की उपज कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ जाती है। वहीं चीनी मिल के कुछ अधिकारियों/कर्मचारियों की बदौलत गन्ना माफिया हजारों क्विंटल गन्ना चीनी मिल को सप्लाई कर चांदी काट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इन गन्ना माफिया को चीनी मिलों के बड़े अधिकारी अपने गन्ना क्रय केंद्रों से सीधा चालान जारी करवाते हैं, जिसके बदले यह माफिया मुनाफे का शेयर मिल के अधिकारियों को देते हैं।
ऐरा मिल के सेंटर के सामने कर रहे गन्ना खरीद
इन गन्ना माफिया ने बसंतापुर गांव में सड़क किनारे ठीक ऐरा चीनी मिल के गन्ना सेंटर के सामने और एक पुरानी क्रेसर में तोल सेंटर लगा रखे हैं। इसके अलावा धौरहरा तहसील बाईपास के पास एक बंद पड़ी क्रेसर, हौकना मटेरा, नैनापुर, पहडिय़ापुर, गोसाइनपुरवा, ईसानगर, रामनगर लहबड़ी सहित दर्जनों स्थानों पर अवैध गन्ना तोल सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिन पर गन्ना 200 से 240 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा जा रहा है, जबकि सरकारी खरीद का भाव 315 से 325 रुपये प्रति क्विंटल है।
गन्ना किसानों का शोषण नहीं होने देंगे। धौरहरा क्षेत्र में चिन्हित किए गए 12 लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराई गई है। जल्द ही ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। कैलेंडर के मुताबिक किसानों को पर्चियां जारी की जा रही हैं, इसलिए किसान अपना गन्ना सिर्फ चीनी मिलों को ही सप्लाई करें। समस्या आने पर जिला गन्ना अधिकारी या गन्ना विकास समिति के कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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चीनी मिल से तोल के लिए पर्चियां न मिलने से मजबूर किसानों का गन्ना औने-पौने दामों पर खरीदकर गन्ना माफिया मालामाल हो रहे हैं। इन माफिया ने बाकायदा अपने खरीद सेंटर भी बना रखे हैं, जहां से हजारों क्विंटल गन्ना प्रतिदिन चीनी मिलों को सप्लाई किया जा रहा है। इस मामले की शिकायत गन्ना आयुक्त से की गई थी, जिसके बाद गन्ना विकास समिति के सचिव टीएन यादव ने कुछ अवैध तोल सेंटरों को चिन्हित कर 12 गन्ना माफिया की सूची धौरहरा पुलिस को सौंपी थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बसंतापुर निवासी मिथिलेश कुमार, अवधराम, परमानंद, अखिलेश कुमार, राजीव कुमार, श्रीप्रकाश, राजेश कुमार, रामू पुत्र रामबख्स, रामू पुत्र मिश्रीलाल, मिश्रीलाल, बेलवा खरवहिया निवासी कमाल अहमद और करौंहा गांव निवासी शिवा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि कुछ अज्ञात लोग भी पुलिस के रडार पर आ चुके हैं।
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गन्ना माफिया गन्ना खरीदकर कहां सप्लाई करते थे? इसकी जांच की जा रही है। इस मामले में मिल अधिकारी की संलिप्तता की जांच की जा रही है। 12 नामजद गन्ना माफिया के अलावा कई और माफिया चिन्हित किए जा रहे है। नामजदों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
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- बृजेश त्रिपाठी, प्रभारी कोतवाल
माफिया और मिल अधिकारियों के गठजोड़ ने तोड़ी किसानों की कमर
ऐरा, खंभारखेड़ा और गुलरिया मिल क्षेत्र में फैला है जाल
- अवैध सेंटरों पर खुलेआम होता है किसानों का शोषण
प्रेम जायसवाल
धौरहरा।
तहसील क्षेत्र में फैला गन्ना माफिया और चीनी मिल अधिकारियों/कर्मचारियों का गठजोड़ किसानों की कमर तोड़ रहा है। एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही हैं, तो दूसरी ओर खुलेआम गरीब किसानों का शोषण किया जा रहा है। खास यह है कि इससे अधिकारी भी अंजान नहीं हैं। अभी जिन 12 गन्ना माफिया के खिलाफ कार्रवाई हुई उसमें जिला प्रशासन या गन्ना विभाग का कोई खास रोल नहीं रहा है, बल्कि लखनऊ में बैठे गन्ना आयुक्त के निर्देश पर गन्ना माफिया के खिलाफ जिले में यह पहली कार्रवाई हुई है।
धौरहरा, रमियाबेहड़, ईसानगर ब्लॉक क्षेत्रों में गन्ना माफिया का बड़े पैमाने पर जाल फैला है, जो अवैध गन्ना सेंटर लगाकर मजबूर किसानों का गन्ना कम दामों पर खरीद लेते हैं। पड़ोसी जिला बहराइच के मिहिपुरवा ब्लॉक क्षेत्र से भी गन्ने की सप्लाई इस क्षेत्र के अवैध गन्ना सेंटरों पर की जाती है। इस क्षेत्र में प्रमुख रूप से ऐरा, खंभारखेड़ा और गुलरिया चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई की जाती है।
गन्ना माफिया के टारगेट पर लघु एवं सीमांत किसान रहते हैं, क्योंकि इन्हीं को चीनी मिलों से पर्चियां नहीं मिल पातीं। मजबूरन ऐसे किसानों को अपने परिवार की जरूरतों के आगे गन्ने की उपज कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ जाती है। वहीं चीनी मिल के कुछ अधिकारियों/कर्मचारियों की बदौलत गन्ना माफिया हजारों क्विंटल गन्ना चीनी मिल को सप्लाई कर चांदी काट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इन गन्ना माफिया को चीनी मिलों के बड़े अधिकारी अपने गन्ना क्रय केंद्रों से सीधा चालान जारी करवाते हैं, जिसके बदले यह माफिया मुनाफे का शेयर मिल के अधिकारियों को देते हैं।
ऐरा मिल के सेंटर के सामने कर रहे गन्ना खरीद
इन गन्ना माफिया ने बसंतापुर गांव में सड़क किनारे ठीक ऐरा चीनी मिल के गन्ना सेंटर के सामने और एक पुरानी क्रेसर में तोल सेंटर लगा रखे हैं। इसके अलावा धौरहरा तहसील बाईपास के पास एक बंद पड़ी क्रेसर, हौकना मटेरा, नैनापुर, पहडिय़ापुर, गोसाइनपुरवा, ईसानगर, रामनगर लहबड़ी सहित दर्जनों स्थानों पर अवैध गन्ना तोल सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिन पर गन्ना 200 से 240 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा जा रहा है, जबकि सरकारी खरीद का भाव 315 से 325 रुपये प्रति क्विंटल है।
गन्ना किसानों का शोषण नहीं होने देंगे। धौरहरा क्षेत्र में चिन्हित किए गए 12 लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराई गई है। जल्द ही ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। कैलेंडर के मुताबिक किसानों को पर्चियां जारी की जा रही हैं, इसलिए किसान अपना गन्ना सिर्फ चीनी मिलों को ही सप्लाई करें। समस्या आने पर जिला गन्ना अधिकारी या गन्ना विकास समिति के कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी