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एनएच 24 बाईपास में दबीं 111 किसानों की खुशियां
अमर उजाला ब्यूरो मैगलगंज (लखीमपुर खीरी)।
Updated Sun, 06 Aug 2017 11:38 PM IST
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farmer
- फोटो : अमर उजाला
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22 गांवों के 2127 किसानों की जमीनें हुई थीं अधिग्रहीत
111 किसानों को पांच साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा
अब हक के लिए लड़ रहे मुकदमा
एनएच 24 मार्ग पर बाईपास बनने से यातायात भले ही सुगम होगा, लेकिन इसने 22 गांवों के 111 किसानों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है। नए सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा पाने के लिए किसान अधिकारियों की चौखट पर एड़िया घिस रहे हैं। कई किसान अपने हक को पाने के लिए डीएम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ रहे हैं।
बता देें कि आठ साल पहले 2009 में नेशनल हाईवे 24 के चौड़ीकरण में बाईपास बनाने के लिए मैगलगंज कस्बा समेत 22 गांवों के 2127 किसानों की खेती योग्य जमीनें अधिग्रहीत कर ली गई थीं। कुल 110.765 हेक्टेअर जमीन बाईपास बनाने के उपयोग में ली गई। तत्कालीन सर्किल रेट (करीब 11 लाख रुपये प्रति एकड़) के मुताबिक सभी किसानों को 24 करोड़ 21 लाख 56 हजार 453 रुपये मुआवजा दिया जाना था। सरकार ने धीरे-धीरे कई बार में 2016 किसानों को 22 करोड़ 65 लाख 49 हजार 909 रुपये मुआवजे का भुगतान कर दिया है। जबकि 111 किसानों का एक करोड़ 56 लाख छह हजार 544 रुपये बकाया है। हालांकि इनमें अधिकांश किसान मुआवजे की रकम से संतुष्ट नहीं थे। वर्ष 2014 में सरकार ने नया सर्किल रेट (करीब 18 लाख प्रति एकड़) घोषित कर दिया, जिससे शेष बचे 111 किसानों ने नए सर्किल रेट के आधार पर ही मुआवजा देने की मांग की। अधिकारियों ने किसानों की मांग को अनसुना कर दिया। इससे किसानों ने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन यहां पर उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, बल्कि उन्हें डीएम के समक्ष अपील करने के लिए कहा गया। मौजूदा समय में करीब 50 किसानों ने हक हासिल करने के लिए मुकदमा कर रखा है, लेकिन सालों बाद भी मामला लंबित पड़ा है। इससे किसानों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है, क्योंकि डीएम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही वह लोग हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकेंगे।
इन गांवों के किसानों को नहीं मिला मुआवजा
मैगलगंज 4, किशुनपुर जमुनी 6, उचौलिया 25, ढढौलिया 5, बरनैया 3, बालदेवता 7, कोटरा 1, लखनौरिया 4, जलालपुर 2, पनई 3, अलीपुर 1, बरखेरियाजाट 7, उदयपुर 5, चपरतला 9, इछनापुर 2, रहजनिया10, लालपुर 2, धर्माखेड़ा 4, चौखड़िया1, मोहिद्दीनपुर 3, सल्लिया 1, लिधियाई 6।
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बाईपास में तीन एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर ली गई है, जिसका अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। पुराने सर्किल रेट पर मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन मौजूदा समय में जमीन की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। खेती चले जाने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
आयुष कुमार, किसान
कुल तीन एकड़ जमीन थी, जो बाईपास में चली गई। इससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। कई साल से लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की कान पर जूं नहीं रेंगती है।
अरविंद कुमार, किसान
कुल तीन बीघा जमीन थी, जिसमें से दो बीघा जमीन अधिग्रहण में चली गई है। इसके एवज में 1.88 लाख मुआवजा दिया गया है, जो बहुत ही कम है। इस रेट में एक बीघा जमीन मिलना मुमकिन नहीं है।
हरप्रीत सिंह, किसान
हमारे पास कुल साढ़े सात एकड़ जमीन थी, जिसमें पांच एकड़ जमीन बाईपास में चली गई। अब ढाई एकड़ जमीन ही बची है। इसके एवज में मुआवजा बहुत ही कम मिला है, जिससे बाईपास में गई जमीन की भरपाई नहीं की जा सकती है। इस बाईपास के कारण किसानों को बहुत ही नुकसान उठाना पड़ा है।
छविनाथ सिंह यादव, किसान
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111 किसानों को पांच साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा
अब हक के लिए लड़ रहे मुकदमा
एनएच 24 मार्ग पर बाईपास बनने से यातायात भले ही सुगम होगा, लेकिन इसने 22 गांवों के 111 किसानों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है। नए सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा पाने के लिए किसान अधिकारियों की चौखट पर एड़िया घिस रहे हैं। कई किसान अपने हक को पाने के लिए डीएम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ रहे हैं।
बता देें कि आठ साल पहले 2009 में नेशनल हाईवे 24 के चौड़ीकरण में बाईपास बनाने के लिए मैगलगंज कस्बा समेत 22 गांवों के 2127 किसानों की खेती योग्य जमीनें अधिग्रहीत कर ली गई थीं। कुल 110.765 हेक्टेअर जमीन बाईपास बनाने के उपयोग में ली गई। तत्कालीन सर्किल रेट (करीब 11 लाख रुपये प्रति एकड़) के मुताबिक सभी किसानों को 24 करोड़ 21 लाख 56 हजार 453 रुपये मुआवजा दिया जाना था। सरकार ने धीरे-धीरे कई बार में 2016 किसानों को 22 करोड़ 65 लाख 49 हजार 909 रुपये मुआवजे का भुगतान कर दिया है। जबकि 111 किसानों का एक करोड़ 56 लाख छह हजार 544 रुपये बकाया है। हालांकि इनमें अधिकांश किसान मुआवजे की रकम से संतुष्ट नहीं थे। वर्ष 2014 में सरकार ने नया सर्किल रेट (करीब 18 लाख प्रति एकड़) घोषित कर दिया, जिससे शेष बचे 111 किसानों ने नए सर्किल रेट के आधार पर ही मुआवजा देने की मांग की। अधिकारियों ने किसानों की मांग को अनसुना कर दिया। इससे किसानों ने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन यहां पर उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, बल्कि उन्हें डीएम के समक्ष अपील करने के लिए कहा गया। मौजूदा समय में करीब 50 किसानों ने हक हासिल करने के लिए मुकदमा कर रखा है, लेकिन सालों बाद भी मामला लंबित पड़ा है। इससे किसानों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है, क्योंकि डीएम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही वह लोग हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकेंगे।
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इन गांवों के किसानों को नहीं मिला मुआवजा
मैगलगंज 4, किशुनपुर जमुनी 6, उचौलिया 25, ढढौलिया 5, बरनैया 3, बालदेवता 7, कोटरा 1, लखनौरिया 4, जलालपुर 2, पनई 3, अलीपुर 1, बरखेरियाजाट 7, उदयपुर 5, चपरतला 9, इछनापुर 2, रहजनिया10, लालपुर 2, धर्माखेड़ा 4, चौखड़िया1, मोहिद्दीनपुर 3, सल्लिया 1, लिधियाई 6।
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बाईपास में तीन एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर ली गई है, जिसका अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। पुराने सर्किल रेट पर मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन मौजूदा समय में जमीन की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। खेती चले जाने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
आयुष कुमार, किसान
कुल तीन एकड़ जमीन थी, जो बाईपास में चली गई। इससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। कई साल से लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की कान पर जूं नहीं रेंगती है।
अरविंद कुमार, किसान
कुल तीन बीघा जमीन थी, जिसमें से दो बीघा जमीन अधिग्रहण में चली गई है। इसके एवज में 1.88 लाख मुआवजा दिया गया है, जो बहुत ही कम है। इस रेट में एक बीघा जमीन मिलना मुमकिन नहीं है।
हरप्रीत सिंह, किसान
हमारे पास कुल साढ़े सात एकड़ जमीन थी, जिसमें पांच एकड़ जमीन बाईपास में चली गई। अब ढाई एकड़ जमीन ही बची है। इसके एवज में मुआवजा बहुत ही कम मिला है, जिससे बाईपास में गई जमीन की भरपाई नहीं की जा सकती है। इस बाईपास के कारण किसानों को बहुत ही नुकसान उठाना पड़ा है।
छविनाथ सिंह यादव, किसान