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मृदा परीक्षण में लापरवाही पर दो कर्मचारी नपे
Updated Thu, 14 Dec 2017 07:55 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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लखीमपुर खीरी। मृदा परीक्षण कराकर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने के मामले में लापरवाही बरतने वाले प्राविधिक सहायक को सस्पेंड किया गया है। वहीं, एक एटीएम (सहायक तकनीकी प्रबंधक) की सेवा समाप्त करते हुए आउटसोर्सिंग एजेंसी को वापस कर दिया गया है। यह कार्रवाई कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही के दौरे के बाद की गई है, तब सौंठन गांव के किसानों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड नहीं मिलने की शिकायत की थी।
नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना के तहत खेतों से ग्रिड के आधार पर मृदा नमूने लेकर जांच कराई जा रही है। नमूनों की जांच से प्राप्त रिपोर्ट तैयार कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किसानों को किया जाना है, जिससे संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करना आसान हो सके। यह कार्ड तीन सालों तक वैध रहेगा, जिसके बाद पुन: मिट्टी के नमूने की जांच कराई जाएगी। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारों ने कड़े निर्देश दे रखे हैं, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से बेखौफ कर्मचारी मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। पिछले सप्ताह जिला स्तरीय कृषि मेले में हिस्सा लेने आए कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने गोला क्षेत्र के गांव सौंठन का भी दौरा किया था। यहां पर कई किसानों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलने से इंकार करते हुए मिट्टी के नमूने न भरे जाने की बात कही थी। इसे गंभीरता से लेते हुए कृषि मंत्री ने जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
उपनिदेशक कृषि लाल बहादुर यादव ने इसे संज्ञान में लेते हुए सौंठन के प्राविधिक सहायक (ग्रुप सी) संजय कुमार को सस्पेंड कर दिया है, जबकि इसी गांव का कामकाज देख रहे संविदा कर्मी सहायक तकनीकी प्रबंधक (एटीएम) पंकज कुमार को इस कार्य से हटाते हुए सेवा प्रदाता एजेंसी को रिपोर्ट भेजकर दूसरे कर्मी की मांग की है।
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मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण सभी किसानों को कराया जाना शासन की प्राथमिकता है, जिसके लिए सभी कर्मचारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- लाल बहादुर यादव, उपनिदेशक (कृषि)
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नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना के तहत खेतों से ग्रिड के आधार पर मृदा नमूने लेकर जांच कराई जा रही है। नमूनों की जांच से प्राप्त रिपोर्ट तैयार कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किसानों को किया जाना है, जिससे संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करना आसान हो सके। यह कार्ड तीन सालों तक वैध रहेगा, जिसके बाद पुन: मिट्टी के नमूने की जांच कराई जाएगी। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारों ने कड़े निर्देश दे रखे हैं, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से बेखौफ कर्मचारी मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। पिछले सप्ताह जिला स्तरीय कृषि मेले में हिस्सा लेने आए कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने गोला क्षेत्र के गांव सौंठन का भी दौरा किया था। यहां पर कई किसानों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलने से इंकार करते हुए मिट्टी के नमूने न भरे जाने की बात कही थी। इसे गंभीरता से लेते हुए कृषि मंत्री ने जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
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उपनिदेशक कृषि लाल बहादुर यादव ने इसे संज्ञान में लेते हुए सौंठन के प्राविधिक सहायक (ग्रुप सी) संजय कुमार को सस्पेंड कर दिया है, जबकि इसी गांव का कामकाज देख रहे संविदा कर्मी सहायक तकनीकी प्रबंधक (एटीएम) पंकज कुमार को इस कार्य से हटाते हुए सेवा प्रदाता एजेंसी को रिपोर्ट भेजकर दूसरे कर्मी की मांग की है।
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मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण सभी किसानों को कराया जाना शासन की प्राथमिकता है, जिसके लिए सभी कर्मचारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- लाल बहादुर यादव, उपनिदेशक (कृषि)