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महिलाओं ने ललही छठ पर की पूजा-अर्चना
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सुकरौली ब्लाक के पिपरा लालमन गांव में छठ पर्व पर पूजन कर कथा सुनतीं महिलाएं।
- फोटो : KUSHINAGAR
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महिलाओं ने ललही छठ पर की पूजा-अर्चना
सुकरौली (कुशीनगर)। पुत्रों की लंबी आयु के लिए शनिवार को ललही छठपर्व क्षेत्र में परंपरागत तरीके से मनाया गया। महिलाओं ने उपवास रखकर छठ माता का पूजन-अर्चन किया और पुत्रों की दीर्घायु की कामना की।
महिलाओं ने छठ माता के प्रतीक कुश के पौधों में छह गांठ लगाकर महुआ के छह पत्तों पर तीनी का चावल, महुआ व दही आदि रखकर छठ माता को समर्पित किया। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने छठ माता से जुड़े किस्से सुने और सुनाए।
सुकरौली क्षेत्र के पिपरा लालमन गांव में सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र हुईं और विधि विधान से पूजा-अर्चना की। गांव की सरोज देवी, सूरत, नीरज मिश्रा, सुनीता देवी, अनीता, रानी, गुंजा, अतवारी, किरन ने बताया कि इस व्रत में खेतों में उत्पन्न होने वाली किसी भी चीज को ग्रहण नहीं किया जाता। तीनी का चावल तालाब में उत्पन्न धान से निकाला है। इसलिए इस व्रत में तीनी के चावल का ही प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि ललही छठ माता का पूजन-अर्चन व व्रत करने से संतान दीर्घायु होती है और उसे सुख, शांति तथा समृद्धि मिलती है।
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सुकरौली (कुशीनगर)। पुत्रों की लंबी आयु के लिए शनिवार को ललही छठपर्व क्षेत्र में परंपरागत तरीके से मनाया गया। महिलाओं ने उपवास रखकर छठ माता का पूजन-अर्चन किया और पुत्रों की दीर्घायु की कामना की।
महिलाओं ने छठ माता के प्रतीक कुश के पौधों में छह गांठ लगाकर महुआ के छह पत्तों पर तीनी का चावल, महुआ व दही आदि रखकर छठ माता को समर्पित किया। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने छठ माता से जुड़े किस्से सुने और सुनाए।
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सुकरौली क्षेत्र के पिपरा लालमन गांव में सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र हुईं और विधि विधान से पूजा-अर्चना की। गांव की सरोज देवी, सूरत, नीरज मिश्रा, सुनीता देवी, अनीता, रानी, गुंजा, अतवारी, किरन ने बताया कि इस व्रत में खेतों में उत्पन्न होने वाली किसी भी चीज को ग्रहण नहीं किया जाता। तीनी का चावल तालाब में उत्पन्न धान से निकाला है। इसलिए इस व्रत में तीनी के चावल का ही प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि ललही छठ माता का पूजन-अर्चन व व्रत करने से संतान दीर्घायु होती है और उसे सुख, शांति तथा समृद्धि मिलती है।
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