{"_id":"0a59bfe53e7881499388c453366f694b","slug":"valmiki-tiger-reserve-forest-area-of-the-cameras-start-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाल्मीकि टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में कैमरे लगाने का काम शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में कैमरे लगाने का काम शुरू
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Tue, 01 Dec 2015 11:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खड्डा। उत्तर प्रदेश से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन प्रमंडल (दो) के जंगलों में मंगलवार से बाघों की गिनती के लिए कैमरा लगाने का कार्य शुरू हो गया। वन क्षेत्र में 450 कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों में जंगलों में विचरण करने वालों बाघों की सारी गतिविधियां कैद की जाएंगी।
अक्टूबर महीने से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन प्रमंडल (एक) के जंगलों में बाघों की गिनती के लिए कैमरे लगाने का कार्य पूरा हो गया है। इसके बाद मंगलवार को वन प्रमंडल दो के हरनाटाड़, वाल्मीकि, मदनपुर आदि वन क्षेत्रों में कैमरा लगाने का कार्य डीएफओ अमित कुमार की देखरेख में शुरू कर दिया गया। वन प्रमंडल में बाघों की गणना के लिए नाइट विजन से लैस उच्च क्षमता के 450 कैमरे लगाए जा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक पहले से चिह्नित बाघों के अधिवास, विचरण करने के जगहों पर कैमरे लगाए जा रहे हैं।
पिछले गणना के समय लकड़ी तस्कर अपनी फोटो खींच लिए जाए जाने के भय से कैमरे चुरा ले गए थे। चोरी से बचने के लिए कैमरे लगाने की जगहों को काफी गोपनीय रखा जा रहा है। साथ ही सुरक्षा के लिए वनकर्मी भी तैनात किए जा रहे हैं। इन कैमरों से खींची गई तस्वीरों को दिल्ली भेजा जाएगा।
विज्ञापन
जहां विशेषज्ञ बाघों की गणना करेंगे। पिछली गणना में 28 बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इसमें से हाल ही में एक बाघिन की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि बाघों की संख्या में वृद्धि हुई होगी। बताते चलें, लगभग 850 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल की सीमा नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान तथा यूपी के सोहगीबरवा वन्य जीव अभ्यारण्य से जुड़ी है।
बाघ विचरण करते हुए इधर-उधर होते रहते हैं। इसके लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा की ओर से दियारा में बाघ आने की सूचना पर यहां भी कैमरे लगाए जाएंगे। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निदेशक सह वन संरक्षक आरवी सिंह ने बताया कि गणना कार्य के लिए कैमरे लगाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अक्टूबर महीने से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन प्रमंडल (एक) के जंगलों में बाघों की गिनती के लिए कैमरे लगाने का कार्य पूरा हो गया है। इसके बाद मंगलवार को वन प्रमंडल दो के हरनाटाड़, वाल्मीकि, मदनपुर आदि वन क्षेत्रों में कैमरा लगाने का कार्य डीएफओ अमित कुमार की देखरेख में शुरू कर दिया गया। वन प्रमंडल में बाघों की गणना के लिए नाइट विजन से लैस उच्च क्षमता के 450 कैमरे लगाए जा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक पहले से चिह्नित बाघों के अधिवास, विचरण करने के जगहों पर कैमरे लगाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले गणना के समय लकड़ी तस्कर अपनी फोटो खींच लिए जाए जाने के भय से कैमरे चुरा ले गए थे। चोरी से बचने के लिए कैमरे लगाने की जगहों को काफी गोपनीय रखा जा रहा है। साथ ही सुरक्षा के लिए वनकर्मी भी तैनात किए जा रहे हैं। इन कैमरों से खींची गई तस्वीरों को दिल्ली भेजा जाएगा।
विज्ञापन
जहां विशेषज्ञ बाघों की गणना करेंगे। पिछली गणना में 28 बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। इसमें से हाल ही में एक बाघिन की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि बाघों की संख्या में वृद्धि हुई होगी। बताते चलें, लगभग 850 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल की सीमा नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान तथा यूपी के सोहगीबरवा वन्य जीव अभ्यारण्य से जुड़ी है।
बाघ विचरण करते हुए इधर-उधर होते रहते हैं। इसके लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा की ओर से दियारा में बाघ आने की सूचना पर यहां भी कैमरे लगाए जाएंगे। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के निदेशक सह वन संरक्षक आरवी सिंह ने बताया कि गणना कार्य के लिए कैमरे लगाए जा रहे हैं।